PoK में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग से भड़की हिंसा: रावलकोट में 2 की मौत, 50 से अधिक घायल; पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आंदोलन हुआ और उग्र
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir - PoK) में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। शुक्रवार को रावलकोट में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प के दौरान फायरिंग की घटना सामने आई, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए हैं तथा कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी पिछले कई सप्ताह से अपनी विभिन्न राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक मांगों को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रही और लगातार दमनात्मक रवैया अपना रही है।
फूड सप्लाई काफिले को लेकर बढ़ा विवाद
रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार को पाकिस्तानी सुरक्षा बल एक खाद्य आपूर्ति (फूड सप्लाई) काफिले के लिए सड़क खाली कराने पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों ने सड़क से हटने से इनकार कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी बहस हुई और फिर स्थिति हिंसक हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पहले बल प्रयोग किया और बाद में गोलीबारी हुई। हालांकि पाकिस्तान की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि सुरक्षा बलों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। फायरिंग किस परिस्थिति में हुई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल संभव नहीं हो सकी है।
पूरे PoK में बढ़ा आक्रोश
रावलकोट की घटना के बाद मुजफ्फराबाद, बाग, कोटली और अन्य इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन तेज होने की खबरें सामने आई हैं। कई स्थानों पर व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
स्थानीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लेती है तो पूरे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बड़े पैमाने पर आंदोलन चलाया जाएगा।
कौन कर रहा है आंदोलन?
इस आंदोलन का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। यह संगठन पिछले कई महीनों से पाकिस्तान सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहा है। JAAC का कहना है कि पाकिस्तान सरकार लगातार स्थानीय जनता के अधिकारों की अनदेखी कर रही है और क्षेत्र के संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा।
संगठन ने पाकिस्तान सरकार के सामने 38 प्रमुख मांगें रखी हैं और चेतावनी दी है कि यदि इन्हें स्वीकार नहीं किया गया तो आंदोलन और व्यापक होगा।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करना।
जलविद्युत (Hydropower) परियोजनाओं से जुड़े समझौतों की दोबारा समीक्षा करना।
बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं की कीमतों में राहत देना।
बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण करना।
खाद्य सामग्री एवं आवश्यक वस्तुओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना।
स्थानीय लोगों को अधिक राजनीतिक अधिकार और प्रशासनिक भागीदारी देना।
प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले लाभ में स्थानीय आबादी की हिस्सेदारी बढ़ाना।
नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी सुनिश्चित करना।
JAAC का आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण इस्लामाबाद का राजनीतिक नियंत्रण लगातार मजबूत हो रहा है, जबकि स्थानीय जनता की लोकतांत्रिक भागीदारी सीमित होती जा रही है।
जून से लगातार जारी है आंदोलन
PoK में विरोध प्रदर्शन कोई नई घटना नहीं है। जून 2026 से ही विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों द्वारा लगातार धरने और प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर सड़कों को जाम किया गया, सरकारी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन हुए और आम हड़ताल का भी आयोजन किया गया।
पिछले कुछ सप्ताहों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार झड़पें हो चुकी हैं। इससे पहले भी हिंसा की घटनाओं में लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई थीं।
प्रशासन की कार्रवाई भी विवादों में
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में पाकिस्तान प्रशासन ने JAAC के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए हैं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए गिरफ्तारियों और बल प्रयोग का सहारा ले रही है।
हालांकि पाकिस्तान सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
PoK में लगातार बढ़ते तनाव और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग भी की है।
भारत का रुख
भारत लगातार यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भारत का अभिन्न अंग है। भारत समय-समय पर पाकिस्तान पर PoK में रहने वाले लोगों के अधिकारों के हनन, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विकास संबंधी मुद्दों की अनदेखी करने के आरोप लगाता रहा है।
वर्तमान स्थिति
फायरिंग की घटना के बाद रावलकोट सहित कई इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। प्रदर्शनकारी संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक आंदोलनकारियों की सभी मांगों पर कोई औपचारिक सहमति नहीं दी गई है।
हालांकि मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में कुछ अंतर है, लेकिन यह स्पष्ट है कि रावलकोट की यह घटना PoK में चल रहे लंबे आंदोलन को और अधिक संवेदनशील तथा उग्र बना सकती है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।
news desk MPcg