UN सुरक्षा परिषद में भारत की नई दावेदारी का आगाज: अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से अभियान शुरू करेंगे एस. जयशंकर, 2028-29 कार्यकाल की अस्थायी सीट पर नजर

UN सुरक्षा परिषद में भारत की नई दावेदारी का आगाज: अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से अभियान शुरू करेंगे एस. जयशंकर, 2028-29 कार्यकाल की अस्थायी सीट पर नजर

भारत वैश्विक कूटनीति के सबसे महत्वपूर्ण मंचों में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम उठाने जा रहा है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अगले सप्ताह न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत की अस्थायी (Non-Permanent) सदस्यता के अभियान का औपचारिक शुभारंभ करेंगे।

यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब दुनिया यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान-इज़राइल-अमेरिका विवाद, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे वैश्विक परिदृश्य में भारत स्वयं को एक जिम्मेदार, संतुलित और विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होगा विशेष कार्यक्रम

विदेश मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम के अनुसार, डॉ. एस. जयशंकर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भारत के चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष भारत की प्राथमिकताओं और वैश्विक दृष्टिकोण को प्रस्तुत करने का अवसर होगा।

इस दौरान भारत सुरक्षा परिषद में अपनी भूमिका, बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता, वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ उठाने और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए अपने योगदान को प्रमुखता से रखेगा।

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से होगी मुलाकात

न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच वैश्विक सुरक्षा, संयुक्त राष्ट्र सुधार, शांति स्थापना अभियानों, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय संकटों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

यह बैठक भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच सहयोग को और मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

किस सीट के लिए चुनाव लड़ रहा है भारत?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें—

5 स्थायी सदस्य (Permanent Members) – अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस।
10 अस्थायी सदस्य (Non-Permanent Members) – जिनका कार्यकाल दो वर्ष का होता है और उनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा किया जाता है।

भारत 2028-29 कार्यकाल के लिए एशिया-प्रशांत समूह (Asia-Pacific Group) की एक अस्थायी सीट के लिए चुनाव लड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस सीट का चुनाव जून 2027 में होगा।

रिपोर्टों के अनुसार, इस सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान प्रमुख दावेदार हैं। चुनाव में जीत के लिए महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन आवश्यक होता है।

भारत का UNSC में अब तक का सफर

भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कई बार अस्थायी सदस्य रह चुका है। भारत अब तक 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22 कार्यकाल के दौरान UNSC का निर्वाचित सदस्य रह चुका है।

अपने पिछले कार्यकाल (2021-22) के दौरान भारत ने—

आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग,
समुद्री सुरक्षा,
शांति स्थापना मिशनों में सुधार,
प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग,
महिलाओं की भागीदारी,
अफगानिस्तान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के मुद्दों

पर सक्रिय भूमिका निभाई थी।

भारत स्थायी सदस्यता की भी करता रहा है मांग

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि 1945 में बनी सुरक्षा परिषद वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

भारत का कहना है कि—

वह दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला लोकतांत्रिक देश है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रमुख शक्तियों में शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक रहा है।
वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को प्रभावी ढंग से उठा सकता है।

भारत के अलावा जर्मनी, जापान और ब्राज़ील भी सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के दावेदार हैं। ये चारों देश मिलकर G4 समूह का हिस्सा हैं और संयुक्त राष्ट्र सुधारों की लगातार वकालत करते रहे हैं।

हालिया पश्चिम एशिया दौरे के बाद अमेरिका पहुंचे जयशंकर

संयुक्त राष्ट्र पहुंचने से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 5 से 10 जुलाई के बीच कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की आधिकारिक यात्रा की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा सहयोग, निवेश, क्षेत्रीय सुरक्षा और भारतीय समुदाय से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न देशों के नेताओं के साथ बातचीत की।

इन यात्राओं के बाद उनके अमेरिका पहुंचने की उम्मीद है, जहां संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम में भाग लेने के साथ-साथ कई द्विपक्षीय बैठकों का भी कार्यक्रम है।

इसके बाद ब्रसेल्स का दौरा

संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम समाप्त होने के बाद विदेश मंत्री 14 और 15 जुलाई को ब्रसेल्स (बेल्जियम) जाएंगे। वहां वह तीसरी भारत-यूरोपीय संघ (India-EU) व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे।

इस बैठक में—

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA),
डिजिटल सहयोग,
सेमीकंडक्टर,
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI),
स्वच्छ ऊर्जा,
महत्वपूर्ण खनिज,
आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain)

जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में होगा चुनाव

भारत की यह दावेदारी ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया अनेक जटिल भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, ईरान से जुड़ा विवाद, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, खाद्य एवं ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में प्रमुख बने हुए हैं।

ऐसे माहौल में भारत स्वयं को एक ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है जो संवाद, बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?

विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से चुनाव अभियान की शुरुआत केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगले एक वर्ष के दौरान भारत विभिन्न देशों से समर्थन जुटाने, अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं को साझा करने और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करने का प्रयास करेगा।

यदि भारत 2027 में होने वाला चुनाव जीतता है, तो वह 2028-29 के दौरान एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का निर्वाचित सदस्य बनेगा और वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाएगा।