कंबोडिया से संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़, राजस्थान-पंजाब में ED की बड़ी छापेमारी

कंबोडिया से संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़, राजस्थान-पंजाब में ED की बड़ी छापेमारी

कंबोडिया से संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़,

राजस्थान-पंजाब में ED की बड़ी छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंबोडिया से संचालित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान और पंजाब में एक साथ बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने जोधपुर, नागौर, किशनगढ़ (अजमेर) और लुधियाना समेत सात ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 14 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

जांच में खुलासा हुआ है कि स्थानीय सिम विक्रेताओं की मिलीभगत से आम लोगों के आधार और पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग कर हजारों फर्जी सिम कार्ड सक्रिय किए गए। इन सिम कार्डों को मलेशिया के रास्ते कंबोडिया भेजा जाता था, जहां बैठे साइबर अपराधी भारतीय नागरिकों को कॉल कर डिजिटल अरेस्ट, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी या शेयर बाजार और क्रिप्टो निवेश में मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी को अंजाम देते थे।

ईडी ने करीब 2.3 लाख संदिग्ध मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया, जिसमें लगभग 36 हजार भारतीय सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय पाए गए। इनमें से करीब 5300 सिम सीधे भारत में साइबर फ्रॉड के मामलों में इस्तेमाल हुए, जिनके जरिए देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की आशंका जताई गई है।

जांच के अनुसार, सिम विक्रेता टेलीकॉम कंपनियों की पॉइंट ऑफ सेल (POS) आईडी का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम कार्ड सक्रिय करते थे और कमीशन के बदले मलेशियाई एजेंटों को सौंप देते थे। बाद में ये सिम कार्ड कंबोडिया पहुंचाकर साइबर ठगी के नेटवर्क में इस्तेमाल किए जाते थे।

ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत जोधपुर साइबर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। एजेंसी को जांच के दौरान कई संदिग्ध बैंक खाते, डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्तियों की जानकारी भी मिली है। अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।