उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका! दिल्ली बैठक में 9 में से सिर्फ 3 सांसद पहुंचे, टूट की अटकलें तेज
महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े घटनाक्रम की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के भीतर संभावित टूट की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। दिल्ली में बुलाई गई पार्टी की अहम बैठक में 9 सांसदों में से केवल 3 सांसदों की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में चल रहे कथित 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद शिंदे खेमे के संपर्क में बताए जा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बैठक में छह सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
बैठक में कम उपस्थिति बनी चर्चा का विषय
दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक को उद्धव ठाकरे ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बुलाया था। पार्टी नेतृत्व ने सभी सांसदों को शामिल होने के निर्देश दिए थे और अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
इसके बावजूद बैठक में केवल तीन सांसदों का पहुंचना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि कम उपस्थिति के कारण बैठक को बीच में ही स्थगित करना पड़ा।
क्या सफल हो रहा है 'ऑपरेशन टाइगर'
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि एकनाथ शिंदे गुट लगातार उद्धव गुट के जनप्रतिनिधियों से संपर्क बनाए हुए है। इसी रणनीति को राजनीतिक हलकों में 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया जा रहा है। चर्चाएं हैं कि यदि छह सांसद शिंदे गुट का दामन थामते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने या शिंदे गुट में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है।
उद्धव ठाकरे के सामने नई चुनौती
2022 में शिवसेना में हुए बड़े विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे लगातार अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में सांसदों की कथित नाराजगी और बैठक से दूरी को पार्टी के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि सांसदों की ओर से कोई बड़ा फैसला लिया जाता है तो इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल सभी की नजर उन छह सांसदों पर टिकी है जो बैठक में शामिल नहीं हुए। क्या वे पार्टी में बने रहेंगे या शिंदे गुट का साथ देंगे, इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकता है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अंतिम स्थिति आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सत्ता और संगठन के बीच नई हलचल देखने को मिल रही है, और आने वाले दिन इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।
news desk MPcg