जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के नियम बदलेंगे: राज्यसभा से जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन बिल 2026 पास, देरी से रजिस्ट्रेशन पर बढ़ेगी कानूनी प्रक्रिया

जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के नियम बदलेंगे: राज्यसभा से जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन बिल 2026 पास, देरी से रजिस्ट्रेशन पर बढ़ेगी कानूनी प्रक्रिया

देश में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्यसभा ने मंगलवार को ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस बिल के जरिए सरकार जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक सुरक्षित, डिजिटल और प्रमाणिक बनाने की तैयारी कर रही है।

राज्यसभा में बिल पारित होने के दौरान विपक्षी सांसदों ने कई मुद्दों को लेकर हंगामा किया। विपक्ष की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग की गई। इसके अलावा अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़े मामले को लेकर भी नारेबाजी की गई। हालांकि, हंगामे के बीच बिल को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी गई।

जन्म प्रमाणपत्र बनेगा पहचान का अहम आधार

इस संशोधन विधेयक का सबसे बड़ा उद्देश्य जन्म प्रमाणपत्र को नागरिकों की पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में मजबूत करना है।

सरकार का कहना है कि जन्म का रिकॉर्ड केवल उम्र प्रमाणित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी व्यक्ति की कानूनी पहचान का आधार होता है। आने वाले समय में जन्म प्रमाणपत्र का इस्तेमाल शिक्षा, सरकारी सेवाओं, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

जन्म पंजीकरण के सही और समय पर होने से सरकार को नागरिकों से जुड़े आंकड़े तैयार करने, योजनाओं की बेहतर योजना बनाने और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

देरी से जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन पर सख्ती

मौजूदा व्यवस्था में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय सीमा के बाद भी कराया जा सकता है, लेकिन इसके लिए अलग-अलग स्तर पर अनुमति की जरूरत होती है।

संशोधन के बाद देरी से किए जाने वाले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और सख्त बनाया जा सकता है। खासतौर पर लंबे समय बाद जन्म या मृत्यु दर्ज कराने के मामलों में अतिरिक्त जांच और कानूनी प्रक्रिया का प्रावधान किया जा सकता है।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन घटना के काफी समय बाद कराया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को सक्षम अधिकारी या न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिकॉर्ड में बाद में बदलाव, गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के जरिए किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

प्रमाणपत्र में गलती सुधारना हो सकता है चुनौतीपूर्ण

नए नियम लागू होने के बाद जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र में दर्ज जानकारी को लेकर लोगों को अधिक सावधानी बरतनी होगी।

यदि प्रमाणपत्र में नाम, जन्म तारीख, माता-पिता के नाम या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी गलत दर्ज हो जाती है, तो उसे ठीक कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था मजबूत होने के बाद एक बार दर्ज जानकारी को प्रमाणित करना जरूरी होगा, ताकि सरकारी डेटाबेस में गलत जानकारी शामिल न हो।

इसलिए अभिभावकों और परिवारों के लिए जरूरी होगा कि वे जन्म या मृत्यु के समय ही सभी जानकारियां सही तरीके से दर्ज कराएं।

डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत करने की तैयारी

सरकार जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर लगातार काम कर रही है।

इसका उद्देश्य देशभर में जन्म और मृत्यु के आंकड़ों को एक समान प्रणाली के तहत लाना है। इससे अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड को अपडेट करने में आसानी होगी।

मजबूत डिजिटल रिकॉर्ड से स्वास्थ्य सेवाओं, जनसंख्या आंकड़ों, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

फर्जी प्रमाणपत्रों पर लगेगी रोक

सरकार का मानना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ने से फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकेगी।

कई मामलों में गलत जन्म तिथि या पहचान संबंधी जानकारी का इस्तेमाल सरकारी सुविधाओं, नौकरी, शिक्षा और अन्य प्रक्रियाओं में किया जाता है। नए प्रावधानों का उद्देश्य ऐसे मामलों को नियंत्रित करना है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

राज्यसभा में बिल पारित होने के दौरान विपक्ष ने सरकार के कई फैसलों को लेकर विरोध जताया। विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग की और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर सदन में नारेबाजी की।

हालांकि, हंगामे के बावजूद सरकार ने बिल को आगे बढ़ाया और सदन में इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया।

अब आगे क्या होगा?

राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा और इसके तहत नए नियम लागू किए जा सकेंगे।

इसके बाद जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े रजिस्ट्रेशन, सुधार और सत्यापन की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल सकता है।

आम लोगों पर संभावित असर
जन्म प्रमाणपत्र बनवाते समय जानकारी सही दर्ज कराना ज्यादा जरूरी होगा।
देरी से रजिस्ट्रेशन कराने वालों को अतिरिक्त प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।
प्रमाणपत्र में बदलाव या सुधार के लिए अधिक दस्तावेज और सत्यापन की जरूरत हो सकती है।
सरकारी रिकॉर्ड पहले से ज्यादा सुरक्षित और डिजिटल हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन बिल 2026 का उद्देश्य देश में नागरिक रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाना है। हालांकि, नए नियम लागू होने के बाद आम लोगों को प्रमाणपत्र बनवाते समय और ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।