कलकत्ता हाई कोर्ट से ममता बनर्जी को बड़ा झटका! ऋतब्रत बनर्जी ही रहेंगे नेता प्रतिपक्ष, स्पीकर के फैसले पर रोक से इनकार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी को बड़ा कानूनी झटका देते हुए विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) का फैसला प्रभावी रहेगा।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इससे विधानसभा के भीतर विपक्ष की स्थिति और राजनीतिक समीकरणों पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है।
क्या कहा हाई कोर्ट ने
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता ऐसा कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके आधार पर स्पीकर के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई जा सके। इसी वजह से अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट के इस आदेश का मतलब है कि अंतिम सुनवाई तक स्पीकर द्वारा लिया गया निर्णय प्रभावी रहेगा और ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
क्या है पूरा विवाद
विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए टीएमसी के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के करीबी शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका में स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
हाई कोर्ट के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत बता रहा है, जबकि टीएमसी की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में राज्य की विधानसभा की कार्यवाही और विपक्ष की रणनीति पर असर डाल सकता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल अदालत ने केवल अंतरिम राहत देने से इनकार किया है। मामले की आगे भी सुनवाई होगी और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। तब तक विधानसभा अध्यक्ष का फैसला प्रभावी रहेगा और ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह फैसला एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी।
news desk MPcg