अमेरिका में पुरुषों के खिलाफ हिंसा भी बड़ी चुनौती, शर्म और सामाजिक दबाव के कारण नहीं कराते शिकायत
जब सुरक्षा और हिंसा की बात होती है तो अक्सर महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर चर्चा होती है, लेकिन दुनिया के कई देशों में पुरुष भी शारीरिक, मानसिक और यौन हिंसा का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक सोच और शर्म के कारण बड़ी संख्या में पुरुष अपने साथ हुई घटनाओं की शिकायत तक दर्ज नहीं कराते।
अमेरिका जैसे विकसित देश में भी पुरुषों के खिलाफ घरेलू हिंसा, शारीरिक हमला और यौन उत्पीड़न के मामले सामने आते रहते हैं। कई शोधों और सर्वेक्षणों के अनुसार पुरुष पीड़ित अक्सर इस डर से चुप रहते हैं कि समाज उनकी बात पर विश्वास नहीं करेगा या उनकी मर्दानगी पर सवाल उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों के खिलाफ होने वाली हिंसा के मामलों की रिपोर्टिंग महिलाओं की तुलना में काफी कम होती है। कई पीड़ित मानसिक तनाव, अवसाद और सामाजिक दबाव के कारण पुलिस या सहायता एजेंसियों तक नहीं पहुंच पाते। यही वजह है कि वास्तविक मामलों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है।
घरेलू हिंसा के मामलों में भी पुरुष पीड़ितों की मौजूदगी को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया है। कई मामलों में पुरुष अपने साथी द्वारा मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना झेलते हैं, लेकिन सामाजिक कलंक के डर से चुप रहना पसंद करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंसा का शिकार चाहे महिला हो या पुरुष, दोनों को समान रूप से कानूनी सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और न्याय मिलने का अधिकार है। जागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों को बिना भेदभाव सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।
हालांकि, उपलब्ध शोध यह भी बताते हैं कि अमेरिका में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और यौन अपराधों की संख्या अब भी पुरुषों की तुलना में अधिक दर्ज होती है। इसलिए सुरक्षा और सहायता तंत्र को सभी पीड़ितों के लिए समान रूप से संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है।
news desk MPcg