MP में 24,196 जनजातीय स्कूल होंगे शिक्षा विभाग में मर्ज, सीएम मोहन यादव सरकार की बड़ी तैयारी, बदलेगी पूरी स्कूल व्यवस्था
मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को एकीकृत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप अब जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित स्कूलों को भी स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन लाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्ताव के अनुसार प्रदेश के 24,196 जनजातीय स्कूलों का चरणबद्ध तरीके से स्कूल शिक्षा विभाग में विलय (मर्जर) किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि एक ही विभाग के अधीन सभी स्कूल आने से शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासनिक व्यवस्था और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। इस बदलाव को प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा है।
एक विभाग के अधीन होगी पूरी स्कूल शिक्षा व्यवस्था
वर्तमान में मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग अलग-अलग स्कूलों का संचालन करते हैं। इससे नीतियों के क्रियान्वयन, प्रशासनिक नियंत्रण और संसाधनों के उपयोग में कई स्तरों पर अंतर देखने को मिलता है।
नई योजना के तहत सभी सरकारी स्कूलों का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रबंधन, निगरानी और शैक्षणिक गुणवत्ता में एकरूपता लाई जा सकेगी।
चरणबद्ध तरीके से होगा विलय
जानकारी के अनुसार, 24,196 स्कूलों के मर्जर की प्रक्रिया एक साथ नहीं होगी। इसे चार से पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना बनाई गई है, ताकि किसी भी स्तर पर छात्रों या शिक्षकों को असुविधा न हो और प्रशासनिक बदलाव सुचारु रूप से लागू किए जा सकें।
कैबिनेट के लिए तैयार हुआ प्रस्ताव
स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। फिलहाल इसे जनजातीय कार्य विभाग और वित्त विभाग से अभिमत (राय) प्राप्त करने के लिए भेजा जा रहा है। संबंधित विभागों की सहमति मिलने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
क्या होंगे संभावित फायदे
पूरे प्रदेश में स्कूली शिक्षा का एक समान प्रशासनिक ढांचा तैयार होगा। शिक्षकों और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी। योजनाओं और बजट के बेहतर उपयोग का रास्ता खुलेगा। छात्रों को समान शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में आसानी होगी।
सरकार का लक्ष्य
राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है तो मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
अब सभी की नजर कैबिनेट की मंजूरी और आगामी प्रक्रिया पर टिकी है, क्योंकि यह फैसला प्रदेश की लाखों छात्र-छात्राओं और हजारों शिक्षकों को प्रभावित करेगा।
news desk MPcg