गोरखपुर विश्वविद्यालय में बड़ा शैक्षणिक फैसला: रवि किशन, चंद्र प्रकाश अग्रवाल और अतुल सर्राफ बने ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’, 25 प्रोफेसरों को पदोन्नति
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) की कार्य परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और शोध कार्यों को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और कार्य परिषद के सदस्यों ने भाग लिया।
बैठक में सबसे चर्चित निर्णय गोरखपुर के सांसद एवं अभिनेता रवि किशन, शहर के प्रमुख उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल (चंदू बाबू) तथा उद्यमी अतुल सर्राफ को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नियुक्त करने का रहा। इसके अलावा 11 विभागों के 25 प्रोफेसरों को वरिष्ठ प्रोफेसर पद पर पदोन्नति, विभिन्न विभागों में नई शिक्षकों की नियुक्ति और आगामी दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के नाम पर भी अंतिम मुहर लगाई गई।
तीन प्रतिष्ठित हस्तियों को मिली ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की जिम्मेदारी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत विश्वविद्यालयों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे अनुभवी व्यक्तियों को शिक्षण संस्थानों से जोड़ना है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया हो और जिनके अनुभव से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान मिल सके।
इसी व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय ने—
रवि किशन को ललित कला एवं संगीत विभाग में,
चंद्र प्रकाश अग्रवाल (चंदू बाबू) को वाणिज्य विभाग में,
अतुल सर्राफ को वाणिज्य विभाग में
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन तीनों व्यक्तित्वों का अनुभव विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें मनोरंजन उद्योग, व्यापार, उद्योग प्रबंधन, नेतृत्व, उद्यमिता और व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों को समझने का अवसर भी मिलेगा।
क्या होता है ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’?
‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ ऐसे विशेषज्ञ होते हैं जो पारंपरिक शैक्षणिक पृष्ठभूमि से अलग किसी विशेष क्षेत्र में लंबा व्यावसायिक अनुभव रखते हैं। विश्वविद्यालय उन्हें नियमित अध्यापक के रूप में नहीं, बल्कि विशेषज्ञ मार्गदर्शक के रूप में जोड़ता है।
वे विद्यार्थियों के लिए—
विशेष व्याख्यान देंगे,
कार्यशालाओं का संचालन करेंगे,
उद्योग आधारित प्रशिक्षण देंगे,
परियोजनाओं में मार्गदर्शन करेंगे,
रोजगार और कौशल विकास से जुड़ी जानकारी साझा करेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य उच्च शिक्षा को उद्योग और समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है।
25 प्रोफेसरों को वरिष्ठ प्रोफेसर पद पर पदोन्नति
बैठक में शिक्षकों के कैरियर उन्नयन से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। कार्य परिषद ने विश्वविद्यालय के 11 विभागों के 25 प्रोफेसरों को वरिष्ठ प्रोफेसर पद पर पदोन्नत करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।
पदोन्नति प्राप्त करने वाले विभागों में—
गणित एवं सांख्यिकी
जंतु विज्ञान
इतिहास
अर्थशास्त्र
रसायन विज्ञान
जैव प्रौद्योगिकी
वनस्पति विज्ञान
अंग्रेजी
रक्षा अध्ययन
संस्कृत
समाजशास्त्र
शामिल हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पदोन्नति से शिक्षकों की जिम्मेदारियां और बढ़ेंगी तथा शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को और गति मिलेगी।
नई नियुक्तियों को भी मिली मंजूरी
कार्य परिषद ने विभिन्न विभागों में चयनित शिक्षकों की नियुक्ति को भी अंतिम स्वीकृति प्रदान की।
सांख्यिकी विभाग में डॉ. अशोक कुमार पाठक के सहयुक्त आचार्य पद पर चयन को मंजूरी दी गई।
समाजशास्त्र विभाग में डॉ. पूजा त्रिपाठी तथा विनय कुमार गुप्ता के सहायक आचार्य पद पर चयन को भी अनुमोदित किया गया।
विश्वविद्यालय का मानना है कि नई नियुक्तियों से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा और विभागों में शिक्षण व्यवस्था और मजबूत होगी।
छह अगस्त को होगा दीक्षांत समारोह
बैठक में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के प्रस्तावित दीक्षांत समारोह को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
कार्य परिषद ने 6 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वी.के. सारस्वत के नाम को मंजूरी दी।
डॉ. सारस्वत वर्तमान में नीति आयोग के सदस्य हैं। इससे पहले वे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के महानिदेशक रह चुके हैं। रक्षा अनुसंधान, मिसाइल प्रौद्योगिकी, विज्ञान, नवाचार और राष्ट्रीय नीति निर्माण में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित कर चुकी है।
शोध और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियों, नवाचार, अकादमिक गुणवत्ता और प्रशासनिक सुधारों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्य परिषद ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को केवल डिग्री आधारित शिक्षा नहीं, बल्कि कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।
विश्वविद्यालय का मानना है कि उद्योग जगत, कला, व्यापार और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विशेषज्ञों के जुड़ने से छात्रों को वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता और पेशेवर दक्षता में वृद्धि होगी।
कुलपति ने क्या कहा?
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय उत्कृष्ट शिक्षण, गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में अनुभवी विशेषज्ञों की नियुक्ति, शिक्षकों की पदोन्नति और नई नियुक्तियां विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊंचाई देंगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि इन निर्णयों से विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान के साथ-साथ उद्योग, व्यापार, संस्कृति, कला और समाज से जुड़े व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होंगे। इससे विश्वविद्यालय में शिक्षा, शोध और नवाचार का वातावरण और अधिक मजबूत होगा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में भी सहायता मिलेगी।
news desk MPcg