रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को मिल सकता है अंतरराष्ट्रीय दर्जा, खाड़ी देशों के लिए सीधी उड़ानों की तैयारी तेज; मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट
झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने एयरपोर्ट की आधारभूत संरचना, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए आवश्यक सुविधाओं का आकलन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेज दी है। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाना है।
यदि मंजूरी मिलती है, तो रांची से पहली बार नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन शुरू हो सकेगा। शुरुआती चरण में खाड़ी देशों (Gulf Countries) के लिए सीधी उड़ानों की योजना पर विचार किया जा रहा है, क्योंकि झारखंड से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, व्यापार और अन्य कारणों से इन देशों की यात्रा करते हैं।
मंत्रालय के पास पहुंची तकनीकी रिपोर्ट
एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय संचालन के लिए आवश्यक सभी बुनियादी पहलुओं का मूल्यांकन किया गया है। इसमें रनवे क्षमता, टर्मिनल भवन, सुरक्षा मानकों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, अग्नि सुरक्षा, बैगेज हैंडलिंग, यात्री सुविधाओं तथा भविष्य के विस्तार की संभावनाओं का विस्तृत विवरण शामिल है।
अब नागरिक उड्डयन मंत्रालय रिपोर्ट का परीक्षण करेगा और यदि सभी मानक पूरे पाए जाते हैं तो एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय संचालन की अनुमति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
खाड़ी देशों के लिए शुरू हो सकती हैं पहली उड़ानें
सूत्रों के अनुसार, रांची से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत खाड़ी देशों के लिए की जा सकती है। झारखंड के हजारों लोग रोजगार के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, ओमान, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में कार्यरत हैं।
वर्तमान में इन यात्रियों को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी पड़ती है। रांची से सीधी उड़ानें शुरू होने पर यात्रा का समय कई घंटे कम होगा और अतिरिक्त यात्रा खर्च में भी कमी आएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
रांची से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और निवेश को भी गति मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके प्रमुख लाभ होंगे—
विदेश जाने वाले यात्रियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मिलेगी।
दिल्ली और कोलकाता जैसे ट्रांजिट शहरों पर निर्भरता कम होगी।
मेडिकल टूरिज्म, शिक्षा और व्यापारिक यात्राओं को बढ़ावा मिलेगा।
प्रवासी श्रमिकों के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक और सस्ती होगी।
राज्य में विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
पर्यटन उद्योग को नई पहचान मिलने की संभावना बढ़ेगी।
अंतरराष्ट्रीय संचालन के लिए CIQ सुविधाएं होंगी स्थापित
किसी भी एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करने के लिए कस्टम, इमिग्रेशन और क्वारंटीन (CIQ) सुविधाएं अनिवार्य होती हैं।
एयरपोर्ट प्रशासन ने बताया है कि इन सुविधाओं के लिए टर्मिनल परिसर में आवश्यक स्थान पहले ही चिन्हित किया जा चुका है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही कस्टम, इमिग्रेशन और स्वास्थ्य विभागों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके बाद विदेश जाने वाले यात्रियों की पासपोर्ट जांच, कस्टम क्लीयरेंस और अन्य औपचारिकताएं रांची एयरपोर्ट पर ही पूरी की जा सकेंगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस है नया टर्मिनल
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
मुख्य विशेषताएं—
लगभग 19,000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में निर्मित टर्मिनल।
एक समय में करीब 500 यात्रियों को संभालने की क्षमता।
आधुनिक चेक-इन काउंटर।
उन्नत एक्स-रे बैगेज स्कैनिंग प्रणाली।
हाई-रिजॉल्यूशन CCTV निगरानी।
अत्याधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम।
आधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल सुविधाएं।
भविष्य में यात्री संख्या बढ़ने पर विस्तार की पर्याप्त संभावना।
एयरपोर्ट को पहले ही ISO प्रमाणन प्राप्त हो चुका है, जो इसकी संचालन क्षमता और गुणवत्ता मानकों को दर्शाता है।
एयरलाइंस कंपनियों से भी शुरू हुई बातचीत
एयरपोर्ट प्रबंधन ने संभावित अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को लेकर कई एयरलाइंस कंपनियों से भी संपर्क किया है। हालांकि केवल एयरपोर्ट तैयार होना पर्याप्त नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत के लिए निम्नलिखित शर्तें भी पूरी करनी होंगी—
केंद्र सरकार से अंतिम स्वीकृति।
एयरलाइंस कंपनियों की व्यावसायिक रुचि।
पर्याप्त यात्री मांग।
संबंधित देशों के साथ द्विपक्षीय एयर सर्विस समझौते।
स्लॉट आवंटन और उड़ान अनुमति।
CIQ व्यवस्था का संचालन।
झारखंड में बढ़ रही विदेश यात्रा की मांग
रांची एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा देने की मांग पिछले कई वर्षों से उठती रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण राज्य से विदेश जाने वाले यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या है।
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 से दिसंबर 2025 तक झारखंड में लगभग 10.98 लाख पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं।
कोविड महामारी के बाद पासपोर्ट जारी होने की संख्या लगातार बढ़ी है—
2022 – लगभग 1.01 लाख
2023 – लगभग 1.09 लाख
2024 – लगभग 1.12 लाख
2025 – लगभग 1.13 लाख
ये आंकड़े बताते हैं कि विदेश यात्रा और रोजगार के लिए राज्य के लोगों की मांग लगातार बढ़ रही है।
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
झारखंड में विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य गठन के शुरुआती वर्षों में जहां विदेशी पर्यटकों की संख्या बेहद सीमित थी, वहीं हाल के वर्षों में इसमें कई गुना वृद्धि हुई है।
सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क मिलने से राज्य के धार्मिक, प्राकृतिक और इको-टूरिज्म स्थलों तक विदेशी पर्यटकों की पहुंच और आसान होगी।
पहले भी संचालित हो चुकी है अंतरराष्ट्रीय उड़ान
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के निदेशक विनोद कुमार ने बताया कि एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय संचालन के लिए आवश्यक अधिकांश सुविधाओं से लैस है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय और एयरलाइंस कंपनियों को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2008-09 के दौरान रांची से जेद्दा के लिए सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित की जा चुकी हैं। इसलिए भविष्य में नियमित अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शुरू करना पूरी तरह असंभव नहीं है।
अब आगे क्या?
हालांकि एयरपोर्ट की तैयारियां लगभग पूरी बताई जा रही हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत का अंतिम निर्णय नागरिक उड्डयन मंत्रालय और केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है और एयरलाइंस कंपनियां संचालन के लिए आगे आती हैं, तो रांची जल्द ही देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो सकता है जहां से घरेलू उड़ानों के साथ नियमित अंतरराष्ट्रीय सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। इससे झारखंड के लाखों यात्रियों, प्रवासी श्रमिकों, व्यापारियों, छात्रों और पर्यटकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
news desk MPcg