भोपाल में मानसून से पहले व्यापक तैयारी: 6 जुलाई को खानूगांव में बाढ़ प्रबंधन की मॉक ड्रिल, जलभराव, डैम, जर्जर भवन और कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा पर प्रशासन का फोकस
मानसून के दौरान संभावित बाढ़, जलभराव, भवन दुर्घटनाओं और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भोपाल जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देशन में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों की तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता अपर कलेक्टर सुमित पांडे ने की। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में विभागों के बीच त्वरित समन्वय और संसाधनों की समय पर उपलब्धता ही प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
6 जुलाई को खानूगांव में होगी बाढ़ प्रबंधन की मॉक ड्रिल
बैठक में जानकारी दी गई कि 6 जुलाई को भोपाल के खानूगांव क्षेत्र में बाढ़ प्रबंधन की व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस अभ्यास में जिला प्रशासन, नगर निगम, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, राजस्व विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से भाग लेंगी।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य संभावित बाढ़ जैसी वास्तविक परिस्थितियों में राहत एवं बचाव व्यवस्था की तैयारियों का परीक्षण करना, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करना, आपदा की स्थिति में प्रतिक्रिया समय कम करना तथा बचाव अभियान की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना है।
अपर कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि इसे वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों के अनुरूप संचालित किया जाए ताकि कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जा सके।
जलभराव रोकने के लिए नालों और ड्रेनेज सिस्टम की विशेष सफाई
मानसून के दौरान शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति से बचने के लिए नगर निगम एवं संबंधित विभागों को सभी प्रमुख नालों, ड्रेनेज लाइन और जल निकासी तंत्र की विशेष सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने कहा कि जिन क्षेत्रों में हर वर्ष जलभराव की समस्या सामने आती है, वहां प्राथमिकता के आधार पर जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की जाए ताकि भारी वर्षा के दौरान यातायात बाधित न हो और नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पहले से पहुंचेंगे राहत संसाधन
बैठक में निर्देश दिए गए कि संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, नाव, लाइफ जैकेट, बचाव उपकरण, प्राथमिक उपचार सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही नगर निगम तथा एसडीआरएफ की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त संसाधनों सहित तैनात रखने और सभी नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सातों दिन (24×7) सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
केरवा, कलियासोत सहित सभी संवेदनशील जलस्रोतों पर बढ़ेगी सुरक्षा
वर्षाकाल में डैम, झरनों और पिकनिक स्थलों पर दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने केरवा डैम, कलियासोत, अमरगढ़, महादेव पानी सहित जिले के अन्य संवेदनशील जलस्रोतों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इन स्थानों पर सुरक्षा जालियां लगाने, चेतावनी बोर्ड स्थापित करने, जोखिम वाले क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान करने तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करने को कहा गया है।
प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वर्षा के दौरान जलस्रोतों के समीप अनावश्यक जोखिम न लें, तेज बहाव वाले क्षेत्रों में प्रवेश न करें तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
हर एसडीएम अपने क्षेत्र में गठित करेंगे आपदा प्रबंधन टीम
अपर कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में समर्पित आपदा प्रबंधन टीमों का गठन करें और स्थानीय स्तर पर सभी विभागों के बीच समन्वय बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्घटना या आपदा की सूचना तत्काल जिला नियंत्रण कक्ष तक पहुंचनी चाहिए ताकि न्यूनतम प्रतिक्रिया समय के साथ राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
जर्जर भवनों की पहचान कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के निर्देश
मानसून के दौरान पुराने और जर्जर भवनों के गिरने की घटनाओं की आशंका को देखते हुए नगर निकायों को जिले के सभी खतरनाक भवनों का सर्वेक्षण कर सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
जहां आवश्यकता हो, वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने तथा ऐसे भवनों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
बंद खदानों की होगी फेंसिंग
बैठक में बंद पड़ी खदानों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। प्रशासन ने निर्देश दिए कि सभी परित्यक्त खदानों के चारों ओर मजबूत फेंसिंग कराई जाए तथा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ताकि बारिश के दौरान किसी प्रकार की जनहानि न हो।
कोचिंग संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष निगरानी
हाल के वर्षों में देश के विभिन्न शहरों में कोचिंग संस्थानों में हुई अग्निकांड और अन्य दुर्घटनाओं को देखते हुए भोपाल प्रशासन ने फायर सेफ्टी को भी प्राथमिकता दी है।
अपर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले के सभी कोचिंग संस्थानों का नियमित निरीक्षण किया जाए और जहां अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिले, वहां नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी संस्थानों में अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास मार्ग तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं पूरी तरह कार्यशील हों।
सभी विभागों को समन्वित तरीके से काम करने के निर्देश
समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, राजस्व विभाग तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मानसून के पूरे मौसम में सभी विभाग अलर्ट मोड पर रहेंगे। जिला स्तर से लेकर स्थानीय स्तर तक निगरानी, संसाधनों की उपलब्धता और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, ताकि किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।
प्रशासन का कहना है कि समय रहते की गई तैयारी, नियमित अभ्यास, विभागीय समन्वय और नागरिकों की सतर्कता ही मानसून के दौरान संभावित आपदाओं के प्रभाव को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
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