भारत-जापान की आतंकवाद पर दोटूक चेतावनी: 'सीमा पार से आतंकवाद स्वीकार नहीं', पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क और फंडिंग पर वैश्विक कार्रवाई की मांग
भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ अपने साझा रुख को और मजबूत करते हुए सीमा-पार आतंकवाद, आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों और उनकी वित्तीय सहायता (टेरर फंडिंग) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाईची के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की स्पष्ट शब्दों में निंदा की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समन्वित कार्रवाई की अपील की।
संयुक्त बयान में सीमा-पार आतंकवाद को क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा गया कि आतंकवाद को किसी भी प्रकार का समर्थन, सुरक्षित ठिकाना या आर्थिक सहायता मिलना पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा है।
सीमा-पार आतंकवाद पर साझा और स्पष्ट रुख
भारत और जापान ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंडों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने तथा आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क, फंडिंग और सीमा-पार गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता दोहराई।
संयुक्त बयान में विशेष रूप से राज्य-समर्थित सुरक्षित ठिकानों (State-Sponsored Safe Havens) और आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली वित्तीय सहायता के स्रोतों को समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाने का आह्वान किया गया।
पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा
दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की।
संयुक्त बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की निगरानी टीम की उस रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें इस हमले में द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका का संदर्भ दिया गया था।
भारत और जापान ने कहा कि इस प्रकार के आतंकी हमलों के दोषियों, साजिशकर्ताओं, समर्थकों और वित्तीय मदद उपलब्ध कराने वालों को बिना किसी देरी के न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।
दिल्ली कार बम विस्फोट का भी किया उल्लेख
संयुक्त बयान में 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में लाल किले के निकट हुए कार बम विस्फोट की भी कड़ी निंदा की गई।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा कि आतंकवादी घटनाओं के पीछे शामिल व्यक्तियों, संगठनों और उनके सहयोगियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
इन आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
भारत और जापान ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध आतंकवादी संगठनों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया।
संयुक्त बयान में विशेष रूप से निम्न संगठनों का उल्लेख किया गया—
लश्कर-ए-तैयबा (LeT)
जैश-ए-मोहम्मद (JeM)
अल-कायदा (Al-Qaeda)
इस्लामिक स्टेट (ISIS)
दोनों देशों ने कहा कि इन संगठनों के नेटवर्क, भर्ती तंत्र, आर्थिक संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को समाप्त करने के लिए सभी देशों को संयुक्त प्रयास करने चाहिए।
आतंकवाद और संगठित अपराध के गठजोड़ पर चिंता
भारत और जापान ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और अवैध वित्तीय नेटवर्क के बीच बढ़ता संबंध वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
दोनों देशों ने कहा कि—
आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त किया जाए।
टेरर फंडिंग पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
सीमा-पार आतंकियों की आवाजाही रोकी जाए।
अंतरराष्ट्रीय खुफिया सहयोग को और मजबूत बनाया जाए।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर भी चर्चा
आतंकवाद के अलावा दोनों नेताओं ने ईस्ट चाइना सी और साउथ चाइना सी की सुरक्षा स्थिति पर भी चर्चा की।
संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देश—
समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही (Freedom of Navigation) के पक्षधर हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की आवश्यकता पर बल देते हैं।
यथास्थिति को बलपूर्वक बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का विरोध करते हैं।
विवादित क्षेत्रों के सैन्यीकरण (Militarisation) पर चिंता व्यक्त करते हैं।
यह रुख हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने की भारत और जापान की साझा नीति को दर्शाता है।
भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को मिली नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संयुक्त बयान केवल आतंकवाद के खिलाफ राजनीतिक संदेश नहीं है, बल्कि भारत और जापान के बीच बढ़ते रणनीतिक, सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग का भी संकेत है।
दोनों देश पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक सहयोग, आर्थिक साझेदारी और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने के लिए लगातार मिलकर काम कर रहे हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अहम संदेश
विश्लेषकों के अनुसार संयुक्त बयान में सीमा-पार आतंकवाद, आतंकी फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों का स्पष्ट उल्लेख दक्षिण एशिया में आतंकवाद के खिलाफ भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने का संकेत माना जा रहा है।
इसके साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था पर दोनों देशों की समान सोच भी इस बैठक में स्पष्ट रूप से सामने आई।
भारत और जापान ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है और इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित एवं ठोस कार्रवाई आवश्यक है।
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