बरेली स्काईवॉक हादसे के बाद संचालन पर फिर मंथन: ₹11.18 करोड़ की परियोजना ढाई साल से उपयोग से बाहर, युवक की मौत के बाद सुरक्षा और प्रबंधन पर उठे सवाल

बरेली स्काईवॉक हादसे के बाद संचालन पर फिर मंथन: ₹11.18 करोड़ की परियोजना ढाई साल से उपयोग से बाहर, युवक की मौत के बाद सुरक्षा और प्रबंधन पर उठे सवाल

बरेली के पटेल चौक स्थित स्काईवॉक से एक युवक के गिरकर मौत होने की घटना के बाद लंबे समय से बंद पड़ी इस स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर प्रशासन सक्रिय हो गया है। करीब 11.18 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह स्काईवॉक लगभग ढाई वर्ष पहले बनकर तैयार हो गया था, लेकिन संचालन एजेंसी का चयन न हो पाने के कारण अब तक नियमित रूप से जनता के लिए शुरू नहीं किया जा सका। घटना के बाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने परियोजना के संचालन और सुरक्षा प्रबंधन की समीक्षा शुरू कर दी है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि युवक की मौत और स्काईवॉक के बंद रहने के बीच प्रत्यक्ष कारण-परिणाम संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस घटना की जांच कर रही है, जबकि स्मार्ट सिटी प्रशासन परियोजना के भविष्य पर निर्णय लेने की तैयारी कर रहा है।

क्या है पूरा मामला

पटेल चौक बरेली शहर का सबसे व्यस्त यातायात जंक्शन माना जाता है। यहां लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एक बहु-दिशीय स्काईवॉक का निर्माण कराया गया था। इसका उद्देश्य पैदल यात्रियों को बिना सड़क पार किए सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना था।

हाल ही में स्काईवॉक से एक युवक के गिरने की घटना में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की है। अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जांच जारी है और यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि घटना दुर्घटना थी, आत्महत्या थी या किसी अन्य परिस्थिति में हुई।

निर्माण पूरा, लेकिन संचालन नहीं

स्मार्ट सिटी अधिकारियों के अनुसार स्काईवॉक का निर्माण लगभग ढाई वर्ष पहले पूरा हो चुका था। इसके बावजूद संचालन मॉडल तय नहीं हो सका।

परियोजना के संचालन के लिए अब तक चार बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई।

दो बार कोई एजेंसी सामने नहीं आई।
दो बार प्रशासनिक एवं तकनीकी कारणों से निविदा प्रक्रिया निरस्त कर दी गई।

इसके परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये की सार्वजनिक परियोजना लंबे समय तक उपयोग से बाहर रही।

क्यों महत्वपूर्ण है यह स्काईवॉक

पटेल चौक शहर का प्रमुख ट्रैफिक इंटरसेक्शन है, जहां से प्रतिदिन हजारों वाहन और पैदल यात्री गुजरते हैं। स्काईवॉक चालू होने पर लोगों को ट्रैफिक के बीच सड़क पार करने की आवश्यकता कम हो सकती है।

परियोजना की संरचना इस प्रकार है:

हनुमान मंदिर दिशा – 90.95 मीटर
चौपुला दिशा – 87 मीटर
बरेली कॉलेज–श्यामगंज दिशा – 81 मीटर
चौकी चौराहा दिशा – 111 मीटर

इन चारों दिशाओं को जोड़ने के लिए परियोजना में:

5 सीढ़ियां
1 एस्केलेटर
4 लिफ्ट

स्थापित की गई हैं।

केवल पैदल पुल नहीं, व्यावसायिक मॉडल भी था

स्मार्ट सिटी परियोजना के दस्तावेजों के अनुसार स्काईवॉक को सेल्फ-सस्टेनेबल बनाने की योजना भी तैयार की गई थी।

इसके तहत:

88 कियोस्क (दुकानें) विकसित करने का प्रस्ताव था।
स्थानीय खाद्य पदार्थ, छोटे व्यवसाय और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से राजस्व अर्जित करने की योजना बनाई गई थी।
इसी राजस्व से रखरखाव एवं संचालन व्यय का एक हिस्सा पूरा करने का मॉडल प्रस्तावित था।

लेकिन संचालन एजेंसी तय न होने के कारण यह मॉडल लागू नहीं हो सका।

हादसे के बाद क्या बदला

घटना के बाद स्मार्ट सिटी प्रशासन ने परियोजना की समीक्षा शुरू की है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव कुमार मौर्य के अनुसार:

स्काईवॉक के संचालन को लेकर उच्च अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श चल रहा है।
स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक बुलाने की तैयारी की जा रही है।
संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव पर निर्णय लिया जाएगा।

हालांकि बैठक की तिथि और अंतिम निर्णय अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

युवक की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर स्काईवॉक की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और रखरखाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक अवसंरचना के लिए केवल निर्माण पर्याप्त नहीं होता। नियमित संचालन, सुरक्षा निगरानी, CCTV, बैरिकेडिंग, रखरखाव और आपातकालीन प्रबंधन भी समान रूप से आवश्यक होते हैं।

हालांकि, यह कहना कि दुर्घटना केवल संचालन न होने के कारण हुई, फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों से प्रमाणित नहीं है।

दूसरी स्मार्ट सिटी परियोजना भी लंबित

बरेली स्मार्ट सिटी की संजय कम्युनिटी सरोवर परियोजना भी अभी तक पूरी तरह चालू नहीं हो सकी है।

करीब 8.55 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस परियोजना के संचालन के लिए निजी एजेंसी का चयन किया गया था, लेकिन बाद में निविदा प्रक्रिया निरस्त कर दी गई।

यहां पर्यटन, फूड कोर्ट और मनोरंजन गतिविधियां विकसित करने की योजना थी।

व्यापक परिप्रेक्ष्य

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देशभर में कई शहरी अवसंरचना परियोजनाएं बनाई गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण पूरा होने के बाद यदि समय पर संचालन एजेंसी, रखरखाव व्यवस्था और वित्तीय मॉडल तय नहीं होते, तो परियोजनाएं लंबे समय तक निष्क्रिय रह सकती हैं।

बरेली स्काईवॉक का मामला इसी चुनौती को सामने लाता है, जहां निर्माण पूरा होने के वर्षों बाद भी संचालन शुरू नहीं हो पाया।

निष्कर्ष

बरेली स्काईवॉक से युवक की मौत की घटना की जांच अभी जारी है और उसके कारणों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है। वहीं, इस घटना के बाद स्मार्ट सिटी प्रशासन ने वर्षों से लंबित संचालन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पहल शुरू की है। अब यह देखना होगा कि प्रस्तावित बोर्ड बैठक के बाद परियोजना के संचालन, सुरक्षा और रखरखाव को लेकर कौन-से ठोस निर्णय लिए जाते हैं और यह सार्वजनिक सुविधा आखिरकार आम नागरिकों के उपयोग के लिए कब उपलब्ध हो पाती है।