दिल्ली में 6 महीने में 866 लापता लोग बरामद, 226 बच्चे भी शामिल: ‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस की बड़ी सफलता
दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पश्चिम जिले ने वर्ष 2026 के पहले छह महीनों (1 जनवरी से 30 जून) के दौरान लापता लोगों की तलाश को लेकर महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। पुलिस के अनुसार इस अवधि में कुल 866 लापता व्यक्तियों को खोजकर सुरक्षित उनके परिवारों से मिलाया गया, जिनमें 226 बच्चे भी शामिल हैं। यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत की गई, जिसका उद्देश्य गुमशुदा और अपहृत लोगों की तेजी से तलाश कर उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
छह महीने में 866 लोगों की बरामदगी
दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बरामद किए गए 866 लोगों में बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल हैं। इनमें जून 2026 के महीने में ही 193 लोगों को सकुशल बरामद किया गया, जिनमें 48 बच्चे और 145 वयस्क शामिल थे।
पुलिस का कहना है कि लापता होने की सूचना मिलते ही तुरंत खोज अभियान शुरू किया गया और अलग-अलग टीमों ने समन्वित रूप से काम किया।
‘ऑपरेशन मिलाप’ कैसे काम करता है
पुलिस के अनुसार ‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत लापता व्यक्तियों की तलाश के लिए कई स्तरों पर काम किया जाता है। इसमें शामिल प्रमुख प्रक्रियाएं हैं:
स्थानीय स्तर पर तत्काल पूछताछ
CCTV फुटेज की जांच
बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, ऑटो और ई-रिक्शा स्टैंड पर फोटो वितरण
तकनीकी निगरानी और कॉल डिटेल विश्लेषण
विभिन्न थानों के बीच समन्वय
इन प्रयासों के जरिए पुलिस ने बड़ी संख्या में मामलों को सफलतापूर्वक हल किया।
226 बच्चे भी सुरक्षित बरामद
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार बरामद किए गए 866 लोगों में 226 नाबालिग बच्चे शामिल हैं। इनमें कई बच्चे परिवार से बिछड़ गए थे, जबकि कुछ मामलों में अपहरण की आशंका भी दर्ज की गई थी।
विशेष टीमों, जैसे एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), ने बच्चों की खोज में अहम भूमिका निभाई।
अलग-अलग थानों की भूमिका
जिले के विभिन्न पुलिस थानों ने इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई:
प्रमुख थानों के ऑपरेशन
वसंत विहार थाना: 10 वयस्कों को बरामद कर परिवारों से मिलाया
आर.के. पुरम: 5 लोग (2 बच्चे, 3 वयस्क) बरामद
वसंत कुंज उत्तर और दक्षिण: कई नाबालिग और वयस्क सुरक्षित मिले
पालम विलेज, सागरपुर और दिल्ली कैंट: दर्जनों वयस्कों की बरामदगी
सरोजिनी नगर और कापसहेड़ा: बच्चों और वयस्कों दोनों की तलाश पूरी
इसके अलावा AHTU/SWD यूनिट ने 18 बच्चों सहित कई मामलों का समाधान किया, जबकि अन्य विशेष इकाइयों ने दर्जनों वयस्कों को खोजा।
पुलिस की रणनीति: तकनीक + ग्राउंड वर्क
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस अभियान की सफलता का मुख्य कारण तकनीकी और फील्ड वर्क का संयोजन रहा।
डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम
कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन एनालिसिस
CCTV नेटवर्क का उपयोग
स्थानीय मुखबिर तंत्र
सार्वजनिक स्थानों पर व्यापक सूचना अभियान
इन सभी तरीकों को एक साथ लागू कर तेजी से खोज अभियान चलाया गया।
क्या बढ़ रहे हैं लापता होने के मामले?
हालांकि पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को बरामद किया है, लेकिन लापता मामलों की संख्या को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या शहरी क्षेत्रों में सामाजिक, पारिवारिक या अन्य कारणों से गुमशुदगी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार लापता मामलों के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
पारिवारिक विवाद
मानसिक तनाव
आर्थिक समस्याएं
नाबालिगों के मामलों में घर से भागना
गलत संगति या बाहरी प्रभाव
हालांकि पुलिस का कहना है कि हर मामला अलग प्रकृति का होता है और सभी मामलों को समान दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।
पुलिस की अपील
दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने की स्थिति में तुरंत नजदीकी थाने को सूचना दें। शुरुआती 24–48 घंटे किसी भी गुमशुदगी मामले में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
पुलिस ने यह भी कहा है कि बच्चों पर विशेष निगरानी रखें और उन्हें अकेले या अनजान स्थानों पर जाने से बचाएं।
निष्कर्ष
‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत 866 लोगों की सुरक्षित बरामदगी दिल्ली पुलिस की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषकर 226 बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाना इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
हालांकि, यह आंकड़े शहरी गुमशुदगी की जटिलता और तेजी से प्रतिक्रिया देने की जरूरत को भी उजागर करते हैं। पुलिस का दावा है कि आगे भी ऐसे अभियानों को और मजबूत किया जाएगा ताकि हर लापता व्यक्ति को समय पर सुरक्षित वापस लाया जा सके।
news desk MPcg