कौशांबी टोल प्लाजा एलपीजी अग्निकांड: 8 दिन बाद सामने आया सीसीटीवी, गैस रिसाव से मचा था महाविनाश, 4 की मौत की पुष्टि
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में 26 जून 2026 की सुबह कोखराज क्षेत्र स्थित सिहोरी टोल प्लाजा के पास हुए एलपीजी टैंकर अग्निकांड का भयावह सीसीटीवी फुटेज अब घटना के करीब 8 दिन बाद सामने आया है। यह वीडियो सामने आने के बाद हादसे की पूरी श्रृंखला एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
ताजा पुलिस और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस हादसे में अब तक कम से कम 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज प्रयागराज में जारी है।
कैसे हुआ था यह भीषण हादसा?
सीसीटीवी फुटेज और जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, यह दुर्घटना उस समय हुई जब एक एलपीजी टैंकर कानपुर से वाराणसी की ओर जा रहा था और सुबह लगभग 6:30–6:40 बजे के बीच सिहोरी टोल प्लाजा के पास पहुंचा।
घटनाक्रम इस प्रकार सामने आया है:
टैंकर तेज रफ्तार में टोल प्लाजा क्षेत्र में पहुंचा
वाहन नियंत्रण से बाहर होकर डिवाइडर/बैरियर से टकरा गया
टक्कर लगते ही टैंकर के टैंक से गैस रिसाव शुरू हो गया
एलपीजी गैस बेहद तेजी से फैलकर पूरे टोल परिसर में फैल गई
कुछ ही सेकंड में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारी और यात्री जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे।
गैस रिसाव से कैसे बना आग का गोला?
विशेषज्ञों और जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एलपीजी गैस बेहद ज्वलनशील होती है और हवा के संपर्क में आते ही किसी भी चिंगारी से भड़क सकती है।
इस मामले में भी यही हुआ—
गैस रिसाव टोल प्लाजा के खुले क्षेत्र में फैल गया
टोल पर चल रहा विद्युत जनरेटर संभावित रूप से चिंगारी का स्रोत बना
कुछ ही मिनटों में जोरदार विस्फोट हुआ
आग ने पूरे टोल परिसर को अपनी चपेट में ले लिया
लपटें 25–30 फीट ऊंचाई तक उठती देखी गईं
मौत और नुकसान का पूरा आंकड़ा
अब तक की पुष्टि के अनुसार:
4 लोगों की मौत (टैंकर चालक सहित टोल कर्मचारी)
कई लोग गंभीर रूप से घायल
कुछ घायलों की बाद में इलाज के दौरान मौत हुई
टोल प्लाजा पर खड़े कई वाहन जलकर खाक
घटना में टैंकर चालक की मौके पर ही जलकर मौत हो गई, जबकि कुछ टोल कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए थे।
8 दिन बाद क्यों सामने आया सीसीटीवी?
हादसे के बाद टोल प्लाजा पर लगा सिस्टम बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार:
सीसीटीवी सिस्टम और सर्वर जलकर या फेल हो गए
डेटा पूरी तरह एक्सेस नहीं हो पा रहा था
तकनीकी टीम ने बाद में बैकअप/रिकवरी डेटा निकाला
इसके बाद फुटेज सार्वजनिक किया गया
इसी वजह से यह वीडियो करीब एक हफ्ते से ज्यादा समय बाद सामने आया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
टोल प्लाजा कैसे बना मौत का जाल?
सिहोरी टोल प्लाजा दिल्ली–कोलकाता नेशनल हाईवे पर स्थित है और यह एक व्यस्त ट्रैफिक कॉरिडोर है।
यहां:
लगभग 10 लेन का बड़ा टोल प्लाजा है
प्रशासनिक भवन और कंट्रोल रूम पास में स्थित हैं
करीब 50 कर्मचारी कार्यरत रहते हैं
नियमित रूप से भारी वाहनों की आवाजाही होती है
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हाई-ट्रैफिक और संवेदनशील स्थान पर ज्वलनशील गैस का रिसाव एक “डोमिनो इफेक्ट” बन गया, जिसने पूरे सिस्टम को कुछ मिनटों में तबाह कर दिया।
सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या एलपीजी जैसे खतरनाक वाहनों के लिए रूट और स्पीड मॉनिटरिंग पर्याप्त थी?
क्या टोल प्लाजा पर इमरजेंसी गैस रिसाव नियंत्रण प्रणाली मौजूद थी?
क्या बिजली जनरेटर की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी?
क्या आपातकालीन निकासी (इवैक्युएशन) समय पर हो पाई?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती मिनटों में रिसाव को नियंत्रित कर लिया जाता, तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था।
निष्कर्ष
कौशांबी टोल प्लाजा एलपीजी अग्निकांड सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि हाईवे सुरक्षा, खतरनाक सामग्री परिवहन और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की गंभीर कमजोरियों को उजागर करने वाला मामला है।
8 दिन बाद सामने आया सीसीटीवी फुटेज इस बात का प्रमाण है कि कुछ सेकंड की चूक कैसे एक पूरे हाईवे सिस्टम को आग और तबाही में बदल सकती है।
news desk MPcg