गुरदासपुर में बढ़ते जलस्तर से आधी रात मची अफरा-तफरी, समय रहते खुले गलहड़ी हाइडल के गेट; सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूबने से बची

गुरदासपुर में बढ़ते जलस्तर से आधी रात मची अफरा-तफरी, समय रहते खुले गलहड़ी हाइडल के गेट; सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूबने से बची

पंजाब के गुरदासपुर जिले के दीनानगर विधानसभा क्षेत्र में शुक्रवार देर रात अचानक जलस्तर बढ़ने से कई गांवों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गलहड़ी हाइडल परियोजना (Galhri Hydel Project) के आसपास पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के कारण निचले इलाकों और खेतों में पानी घुसने लगा। इससे धान सहित अन्य खरीफ फसलों के डूबने का खतरा पैदा हो गया। हालांकि, सिंचाई विभाग द्वारा समय रहते हाइडल परियोजना के गेट खोल दिए जाने से पानी की निकासी तेज हुई और संभावित बड़े नुकसान को टाल लिया गया।

हालांकि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। प्रभावित क्षेत्र का आकलन स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा किया जा रहा है।

आधी रात अचानक बढ़ा जलस्तर, किसानों में मची चिंता

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार देर रात गलहड़ी हाइडल के पास जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। देखते ही देखते पानी नहरों और जल निकासी मार्गों से निकलकर आसपास के कृषि क्षेत्रों में पहुंचने लगा। कई गांवों के किसानों ने बताया कि खेतों में पानी तेजी से भरने लगा, जिससे हाल ही में रोपी गई धान की फसल के डूबने का खतरा पैदा हो गया।

बरसात के मौसम में लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों और किसानों ने तुरंत स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सिंचाई विभाग को सूचना दी। स्थिति गंभीर होने की आशंका के कारण रात में ही प्रशासन सक्रिय हो गया।

जनप्रतिनिधियों और सिंचाई विभाग ने की त्वरित कार्रवाई

सूचना मिलने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के दीनानगर हलका इंचार्ज शमशेर सिंह मौके पर पहुंचे और स्थानीय किसानों तथा अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से तत्काल संपर्क कर जल निकासी की व्यवस्था करने का आग्रह किया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग ने देर रात ही गलहड़ी हाइडल परियोजना के गेट खोलने का निर्णय लिया। गेट खुलते ही अतिरिक्त पानी की निकासी शुरू हुई, जिससे बढ़ते जलस्तर पर नियंत्रण पाया गया और आसपास के क्षेत्रों में पानी फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो गया।

समय रहते गेट खुलने से टला बड़ा नुकसान

स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि गेट खोलने में थोड़ी भी देरी होती तो सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो सकती थी।

गांव मुगलानी चक के सरपंच जोगा सिंह और अन्य किसानों ने बताया कि समय पर पानी की निकासी होने से धान और अन्य खरीफ फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने से बचा लिया गया। हालांकि जिन खेतों में पहले ही पानी भर चुका था, वहां फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।

किसानों के अनुसार, यदि जलस्तर कुछ और देर तक ऊंचा रहता तो न केवल धान की फसल बल्कि पशुओं के चारे और अन्य कृषि भूमि को भी भारी नुकसान हो सकता था।

किन फसलों पर था सबसे अधिक खतरा?

वर्तमान समय में पंजाब के अधिकांश हिस्सों में खरीफ सीजन के तहत धान की रोपाई का कार्य चल रहा है। ऐसे में खेतों में अत्यधिक जलभराव होने से—

नई रोपी गई धान की पौध खराब हो सकती है।
लंबे समय तक पानी खड़े रहने से जड़ों को नुकसान पहुंचता है।
दोबारा रोपाई की आवश्यकता पड़ सकती है।
किसानों की लागत बढ़ जाती है।
उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इसी कारण किसानों में जलभराव को लेकर चिंता बढ़ गई थी।

किसानों ने प्रशासन का जताया आभार

स्थिति सामान्य होने के बाद स्थानीय किसानों ने समय पर कार्रवाई के लिए सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि यदि अधिकारियों ने त्वरित निर्णय नहीं लिया होता तो नुकसान कई गुना अधिक हो सकता था।

हालांकि किसानों ने यह भी कहा कि हर वर्ष मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने की समस्या सामने आती है, इसलिए केवल आपातकालीन कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।

स्थायी समाधान की उठी मांग

ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्थायी जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि—

नहरों और जल निकासी चैनलों की नियमित सफाई कराई जाए।
हाइडल परियोजना और नहरों के जलस्तर की 24 घंटे निगरानी की जाए।
जलस्तर बढ़ने की स्थिति में स्वचालित या समयबद्ध गेट संचालन व्यवस्था विकसित की जाए।
गांव स्तर पर बाढ़ एवं जलभराव की पूर्व चेतावनी प्रणाली लागू की जाए।
सिंचाई विभाग, प्रशासन और स्थानीय पंचायतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

किसानों का कहना है कि समय पर निगरानी और वैज्ञानिक जल प्रबंधन से मानसून के दौरान होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

प्रशासन कर रहा है नुकसान का आकलन

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कुछ खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। संबंधित विभाग प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं और वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा रहा है। यदि आवश्यकता हुई तो प्रशासन आगे राहत एवं सहायता संबंधी निर्णय ले सकता है।

मानसून में जल प्रबंधन की चुनौती

पंजाब के सीमावर्ती जिलों में मानसून के दौरान नदियों, नहरों और हाइडल परियोजनाओं में जलस्तर तेजी से बढ़ने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जल निकासी, नहरों का रखरखाव और वास्तविक समय (Real-Time) जलस्तर निगरानी प्रणाली ऐसी परिस्थितियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस घटना में समय रहते गेट खोल दिए जाने से संभावित बड़े नुकसान को टाल लिया गया, लेकिन इसने एक बार फिर मानसून के दौरान प्रभावी जल प्रबंधन और मजबूत आपदा तैयारी की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

(यह समाचार स्थानीय प्रशासन, सिंचाई विभाग से उपलब्ध जानकारी तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है।)