उत्तराखंड NCC कैडेटों की ऐतिहासिक उपलब्धि: 5200 मीटर ऊंचाई पर माउंट देव टिब्बा क्षेत्र में सफल शिखरारोहण, कठिन परिस्थितियों में लहराया तिरंगा

उत्तराखंड NCC कैडेटों की ऐतिहासिक उपलब्धि: 5200 मीटर ऊंचाई पर माउंट देव टिब्बा क्षेत्र में सफल शिखरारोहण, कठिन परिस्थितियों में लहराया तिरंगा

राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के अखिल भारतीय पर्वतारोहण अभियान में उत्तराखंड निदेशालय के तीन कैडेटों ने कठिन हिमालयी परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन करते हुए हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और कुल्लू क्षेत्र से जुड़े पर्वतीय ट्रैक में स्थित लगभग 5200 मीटर ऊंची चोटी पर सफल शिखरारोहण किया। इस अभियान को NCC के राष्ट्रीय स्तर के साहसिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का हिस्सा माना जाता है, जिसका उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व, अनुशासन और उच्च-ऊंचाई परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता विकसित करना है।

राष्ट्रीय NCC पर्वतारोहण अभियान का उद्देश्य और ढांचा

NCC द्वारा संचालित अखिल भारतीय पर्वतारोहण अभियान (All India NCC Mountaineering Expedition) देशभर के चयनित कैडेटों के लिए एक प्रतिष्ठित साहसिक प्रशिक्षण कार्यक्रम होता है। इसमें विभिन्न निदेशालयों से चुने गए कैडेटों को कठिन चयन प्रक्रिया के बाद शामिल किया जाता है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल शिखर तक पहुंचना नहीं होता, बल्कि यह भी होता है कि कैडेट—

उच्च ऊंचाई (High Altitude) पर शरीर के अनुकूलन (acclimatization) को समझें
बर्फीले और खतरनाक क्षेत्रों में सुरक्षित संचालन सीखें
टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित करें
आपात स्थिति में जीवित रहने (survival skills) का प्रशिक्षण प्राप्त करें

आधिकारिक NCC पर्वतारोहण अभियानों में आमतौर पर भारतीय सेना के प्रशिक्षित पर्वतारोहण विशेषज्ञ गाइड, डॉक्टर और तकनीकी स्टाफ भी शामिल होते हैं, जो पूरे मिशन की निगरानी करते हैं।

अभियान की शुरुआत और प्रशिक्षण प्रक्रिया

सूत्रों और आधिकारिक पर्वतारोहण मानकों के अनुसार, इस अभियान को 4 जून 2026 को हिमाचल प्रदेश में औपचारिक रूप से रवाना किया गया था। रवाना करने की प्रक्रिया में राज्य प्रशासन और NCC के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रहती है।

शिखरारोहण से पहले कैडेटों को कई चरणों में प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें शामिल होते हैं—

बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स (BMC)
आइस वॉकिंग और रोप ट्रैवर्स तकनीक
क्रेवास रेस्क्यू (बर्फीली दरारों से बचाव)
ऑक्सीजन लेवल कम होने पर प्रतिक्रिया प्रशिक्षण
अत्यधिक ठंड (-10°C से -20°C तक) में जीवित रहने की तकनीक

इस तैयारी के बाद ही टीम को वास्तविक पर्वतारोहण मिशन के लिए भेजा जाता है।

शिखरारोहण मिशन: 18 जून का निर्णायक दिन

18 जून 2026 को उत्तराखंड NCC टीम ने अंतिम और सबसे कठिन चढ़ाई शुरू की। यह चढ़ाई सुबह लगभग 4 बजे टेंटा बेस कैंप से प्रारंभ हुई।

मिशन के दौरान टीम को जिन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ा, उनमें शामिल थे—

कम ऑक्सीजन स्तर (Hypoxia conditions)
बर्फीले और फिसलन भरे रास्ते
अचानक मौसम परिवर्तन और तेज हवाएं
ऊंचाई बढ़ने के साथ शरीर पर बढ़ता दबाव
सीमित संचार और आपात स्थिति का जोखिम

लगातार कई घंटों की कठिन चढ़ाई के बाद टीम ने लगभग 5200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित जगतसुख चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया। यह क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के कुल्लू–मनाली बेल्ट के उच्च पर्वतीय ट्रैकिंग रूट से जुड़ा हुआ माना जाता है।

उत्तराखंड टीम का प्रतिनिधित्व

इस अभियान में उत्तराखंड निदेशालय की ओर से तीन कैडेटों का चयन किया गया था—

सायशा पंवार (11 यूके बटालियन, NCC, दून विश्वविद्यालय)
नैना देवी (84 यूके बटालियन, NCC)
एसयूओ हिमांशु सिंह (1 यूके एयर स्क्वाड्रन, देहरादून)

इन सभी कैडेटों ने प्रशिक्षण, अनुशासन और टीम समन्वय के आधार पर मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया।

उच्च-ऊंचाई पर्वतारोहण में जोखिम और सुरक्षा प्रबंधन

NCC और भारतीय सेना के पर्वतारोहण अभियानों में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इस तरह के अभियानों में आमतौर पर—

मेडिकल टीम और ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध रहता है
मौसम की लगातार निगरानी की जाती है
प्रत्येक कैडेट की स्वास्थ्य स्थिति का नियमित आकलन किया जाता है
किसी भी आपात स्थिति में रेस्क्यू प्रोटोकॉल तैयार रहता है

विशेषज्ञों के अनुसार 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर “लो-ऑक्सीजन ज़ोन” शुरू हो जाता है, जहां शरीर में थकान, चक्कर और सांस लेने में कठिनाई सामान्य जोखिम हैं।

अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों की प्रतिक्रिया

एनसीसी अधिकारियों ने इस उपलब्धि को “उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और मानसिक दृढ़ता का परिणाम” बताया। उनके अनुसार इस तरह के अभियानों से कैडेटों में—

नेतृत्व क्षमता
निर्णय लेने की क्षमता
संकट प्रबंधन कौशल
राष्ट्रीय सेवा की भावना

और अधिक मजबूत होती है।

दून विश्वविद्यालय और संबंधित NCC इकाइयों ने भी इस उपलब्धि को संस्थान की बड़ी सफलता बताया।

उत्तराखंड के लिए रणनीतिक और प्रेरणादायक महत्व

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है क्योंकि यहां के युवा प्राकृतिक रूप से पर्वतीय वातावरण से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान—

युवाओं को रक्षा सेवाओं के लिए प्रेरित करते हैं
साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) को बढ़ावा देते हैं
राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की पहचान मजबूत करते हैं
निष्कर्ष

माउंट देव टिब्बा क्षेत्र में 5200 मीटर की ऊंचाई पर सफल शिखरारोहण केवल एक खेल या प्रशिक्षण उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह NCC कैडेटों के अनुशासन, साहस और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। कठिन हिमालयी परिस्थितियों में तिरंगा फहराना न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है और यह आने वाले समय में अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।