राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय सिंह का बड़ा अभियान: उज्जैन से अयोध्या तक 1000 KM पदयात्रा का ऐलान, कोर्ट में हिसाब मांगेंगे; सोशल मीडिया से भी रहेंगे दूर
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा राजनीतिक और कानूनी अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की कि 2 अक्टूबर 2026 से वे उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तक लगभग 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से एकत्र किए गए चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना और आर्थिक पारदर्शिता की मांग उठाना होगा।
भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के प्रचार के लिए नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक स्वरूप में आयोजित की जाएगी और इसमें कांग्रेस का कोई प्रचार नहीं होगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि यात्रा के दौरान वे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेंगे, ताकि पूरा ध्यान केवल यात्रा और उसके उद्देश्य पर केंद्रित रहे।
राम मंदिर निर्माण के लिए दिया था 1.11 लाख रुपये का दान
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने स्वयं राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपये का चंदा दिया था। उनके अनुसार, उनके पास आज भी चेक की प्रति और आधिकारिक रसीद सुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था के केंद्र हैं और मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ आर्थिक सहयोग दिया था। ऐसे में मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त कुल राशि, उसके उपयोग, खर्च और शेष निधि का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अभियान नहीं बल्कि जनता के धन की पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रश्न है।
कोर्ट में दायर करेंगे याचिका
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि 5 या 6 जुलाई को वे वरिष्ठ अधिवक्ताओं से विस्तृत कानूनी सलाह लेंगे। इसके बाद वे अयोध्या जाकर संबंधित न्यायालय में याचिका दायर करेंगे।
उन्होंने कहा कि अदालत से मांग की जाएगी कि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे का संपूर्ण वित्तीय लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए। यदि जांच या न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का अंतिम निर्णय केवल न्यायालय या सक्षम जांच एजेंसी ही कर सकती है।
समाचार लिखे जाने तक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से दिग्विजय सिंह के इन आरोपों या प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
पदयात्रा में शामिल होंगे देशभर के दानदाता
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी यात्रा केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं होगी। उन्होंने उन सभी लोगों को पदयात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया है जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए किसी भी राशि का दान दिया था।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा है लेकिन मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे की पारदर्शिता चाहता है, तो उसका भी यात्रा में स्वागत किया जाएगा।
यात्रा के दौरान वे अपने साथ दान की रसीद, चेक की प्रति और अन्य दस्तावेज भी लेकर चलेंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे स्वयं भी मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग देने वालों में शामिल रहे हैं।
"अगर गड़बड़ी साबित हुई तो अपना दान वापस लेकर धार्मिक संस्था को देंगे"
दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि अदालत या जांच एजेंसी यह निष्कर्ष निकालती है कि मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए धन के उपयोग में वित्तीय अनियमितता हुई है, तो वे अपना दान वापस मांगेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा संभव हुआ तो वह राशि किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ, मठ, शंकराचार्य पीठ या धार्मिक न्यास को दान कर देंगे।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल यह केवल उनकी प्रस्तावित कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और अभी किसी भी प्रकार की अनियमितता न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुई है।
महाकाल क्षेत्र में बने गेस्ट हाउस पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में निर्मित एक गेस्ट हाउस को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर क्षेत्र की बहुमूल्य भूमि पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े एक ट्रस्ट द्वारा गेस्ट हाउस का निर्माण किया गया है और वहां लगभग 100 कमरों वाला होटल विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि वहां ठहरने वाले लोगों को विशेष दर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं तथा इस परियोजना में उपयोग किए गए धन और चंदे की भी जांच होनी चाहिए।
इन आरोपों पर संबंधित ट्रस्ट, आरएसएस अथवा अन्य संबंधित संस्थाओं की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
सभी धार्मिक ट्रस्टों के लिए समान नियम की मांग
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी मांग केवल राम मंदिर ट्रस्ट तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि देश के सभी प्रमुख मंदिर ट्रस्ट, धार्मिक न्यास और धार्मिक संस्थानों की आय, व्यय और चंदे का नियमित सार्वजनिक ऑडिट होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब करोड़ों श्रद्धालु अपनी आस्था के आधार पर आर्थिक सहयोग देते हैं तो यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उस धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप हुआ हो।
घर के बाहर लगाएंगे विशेष संदेश
दिग्विजय सिंह ने घोषणा की कि वे अपने भोपाल स्थित निवास के बाहर एक बोर्ड लगाएंगे, जिस पर लिखा होगा—
"मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।"
उन्होंने कहा कि यह संदेश उन लोगों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध होगा जो धार्मिक आस्था के नाम पर धन संग्रह कर उसके उपयोग को लेकर जवाबदेही से बचते हैं।
राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण अभियान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्तावित पदयात्रा केवल धार्मिक या कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। एक ओर कांग्रेस इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का विषय बता रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं, इस पर भी राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दिग्विजय सिंह वास्तव में न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं, तो मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि कानूनी बहस का भी विषय बन सकता है।
अभी क्या स्पष्ट है और क्या नहीं?
फिलहाल यह स्पष्ट है कि दिग्विजय सिंह ने पदयात्रा और कानूनी कार्रवाई की घोषणा की है। हालांकि अभी तक:
पदयात्रा का विस्तृत रूट सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अदालत में कोई याचिका दायर नहीं हुई है।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
किसी भी वित्तीय अनियमितता को लेकर कोई न्यायिक या जांच एजेंसी का निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।
इसलिए चंदे में कथित गड़बड़ियों से जुड़े सभी आरोप फिलहाल दिग्विजय सिंह के दावे हैं, जिनकी पुष्टि या खंडन संबंधित कानूनी प्रक्रिया और आधिकारिक जांच के बाद ही संभव होगा।
मुख्य बिंदु
2 अक्टूबर 2026 से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक लगभग 1000 किमी पदयात्रा।
राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का सार्वजनिक लेखा-जोखा मांगने की घोषणा।
वरिष्ठ वकीलों से सलाह लेकर अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी।
यात्रा के दौरान किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेंगे।
देशभर के दानदाताओं और आम नागरिकों को पदयात्रा में शामिल होने का निमंत्रण।
सभी धार्मिक ट्रस्टों की वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक ऑडिट की मांग।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।
news desk MPcg