मोहाली का चर्चित सूटकेस मर्डर केस: 9 साल बाद पत्नी को उम्रकैद, 6.3 फीट लंबे पति की हत्या कर शव सूटकेस में छिपाया था

मोहाली का चर्चित सूटकेस मर्डर केस: 9 साल बाद पत्नी को उम्रकैद, 6.3 फीट लंबे पति की हत्या कर शव सूटकेस में छिपाया था

पंजाब के सबसे चर्चित हत्या मामलों में शामिल एकम सिंह ढिल्लों हत्याकांड में करीब नौ साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी पत्नी सीरत कौर को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। अदालत ने हत्या, साक्ष्य मिटाने और अवैध हथियार रखने से जुड़े आरोपों में दोषी करार देते हुए कठोर कारावास और आर्थिक जुर्माना भी लगाया। यह मामला वर्ष 2017 में उस समय पूरे देश में सुर्खियों में आया था, जब एक 6.3 फीट लंबे व्यक्ति का शव छोटे से सूटकेस में मोड़कर कार की पिछली सीट पर बरामद हुआ था।

2017 में सामने आया था दिल दहला देने वाला मामला

यह घटना 19 मार्च 2017 की है। मृतक एकम सिंह ढिल्लों (40 वर्ष) पेशे से ऑटो चालक थे। उनकी गुमशुदगी के बाद पुलिस जांच शुरू हुई। कुछ समय बाद उनकी बीएमडब्ल्यू कार मोहाली के फेज-3बी1 क्षेत्र में खड़ी मिली, जिसकी पिछली सीट पर एक बड़ा सूटकेस रखा था।

जब पुलिस ने सूटकेस खोला तो अंदर एकम सिंह का शव मिला। शव को इतनी बेरहमी से मोड़कर रखा गया था कि मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी भी स्तब्ध रह गए। उस समय यह मामला पंजाब के सबसे सनसनीखेज हत्याकांडों में शामिल हो गया था।

पोस्टमार्टम में हुआ हत्या का खुलासा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि एकम सिंह की मौत गोली लगने से हुई थी। मेडिकल जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद शव को छिपाने और पहचान छिपाने की कोशिश की गई थी।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और घर से कई महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए। वैज्ञानिक जांच में यह भी सामने आया कि घर में मौजूद खून के धब्बों और अन्य सबूतों को साफ कर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया था।

पत्नी पर केंद्रित हुई जांच

पुलिस जांच के दौरान कई परिस्थितिजन्य साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान और घटनाक्रम ने मृतक की पत्नी सीरत कौर की भूमिका पर संदेह मजबूत किया। जांच एजेंसियों ने अदालत में यह दलील दी कि हत्या के बाद साक्ष्य नष्ट करने और शव को ठिकाने लगाने की पूरी कोशिश की गई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी अपने व्यवहार और घटनाक्रम के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सकी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों की श्रृंखला को पर्याप्त मानते हुए उसे दोषी करार दिया।

अदालत ने क्या सजा सुनाई?

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरदीप सिंह की अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद सीरत कौर को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना।

अदालत ने आदेश दिया कि—

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कठोर कारावास तथा 50,000 रुपये का जुर्माना।
धारा 201 (साक्ष्य मिटाने) के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास और 20,000 रुपये जुर्माना।
आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास और 20,000 रुपये जुर्माना।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की एक मजबूत और पूर्ण श्रृंखला प्रस्तुत की, जो आरोपी की संलिप्तता स्थापित करने के लिए पर्याप्त है।

अभियोजन पक्ष ने रखे मजबूत सबूत

सरकारी पक्ष की ओर से अधिवक्ता तरमिंदर सिंह, पूजा मल्होत्रा और मनप्रीत सिंह कलेर ने अदालत के समक्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, गवाहों के बयान और जांच से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए।

अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य इतने मजबूत हैं कि वे किसी अन्य संभावित निष्कर्ष की गुंजाइश नहीं छोड़ते।

नौ साल लंबी चली कानूनी प्रक्रिया

इस मामले की जांच, फॉरेंसिक परीक्षण, गवाहों की पेशी और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने में लगभग नौ वर्ष का समय लगा। आखिरकार अदालत ने सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद दोषसिद्धि और सजा का आदेश सुनाया।

पुलिस जांच में क्या सामने आया?

जांच एजेंसियों के अनुसार—

हत्या के बाद शव को सूटकेस में छिपाया गया।
शव को कार की पिछली सीट पर रखकर मामले को छिपाने की कोशिश की गई।
घर से खून के निशान और अन्य सबूत मिटाने का प्रयास किया गया।
फॉरेंसिक साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों ने मामले की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस फैसले का महत्व

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला दर्शाता है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence), वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण यदि मजबूत हों, तो वर्षों बाद भी गंभीर आपराधिक मामलों में दोषियों को सजा दिलाई जा सकती है। यह निर्णय हत्या और साक्ष्य मिटाने जैसे मामलों में वैज्ञानिक जांच की अहम भूमिका को भी रेखांकित करता है।