Dhamaal 4 Review: हंसी का वादा, लेकिन कहानी और VFX ने किया निराश; क्या फ्रेंचाइजी की चमक अब फीकी पड़ गई?
करीब दो दशक पहले रिलीज हुई 'धमाल' (2007) ने हिंदी सिनेमा में स्लैपस्टिक कॉमेडी का नया दौर शुरू किया था। अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रितेश देशमुख और संजय दत्त की कॉमिक टाइमिंग ने फिल्म को कल्ट का दर्जा दिलाया। इसके बाद आई 'डबल धमाल' (2011) और 'टोटल धमाल' (2019) ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन तो किया, लेकिन पहली फिल्म जैसा जादू दोहरा नहीं सकीं।
अब लंबे इंतजार के बाद रिलीज हुई 'धमाल 4' से दर्शकों को उम्मीद थी कि यह फ्रेंचाइजी फिर से पुरानी ऊर्जा के साथ लौटेगी। हालांकि शुरुआती प्रतिक्रियाओं और समीक्षाओं के अनुसार फिल्म इस उम्मीद पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई। कमजोर पटकथा, पुराने कॉमेडी फॉर्मूले और औसत विजुअल इफेक्ट्स के कारण फिल्म को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है।
फिर वही खजाने की तलाश, लेकिन नया रोमांच नहीं
'धमाल 4' की कहानी एक बार फिर खजाने की खोज के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी के अनुसार करीब सौ साल पहले समुद्री लुटेरे शैतान सिंह अंग्रेजों से खजाना लूटकर एक रहस्यमयी द्वीप पर छिपा देता है और उसका नक्शा तैयार करता है।
वर्तमान समय में यह नक्शा पृथ्वी (उपेंद्र लिमये) के हाथ लगता है, लेकिन परिस्थितियों के चलते नक्शा नष्ट हो जाता है। मरने से पहले पृथ्वी खजाने का सुराग गुड्डू (अजय देवगन), लल्लन (रितेश देशमुख), आदी (अरशद वारसी), मानव (जावेद जाफरी) समेत कई किरदारों को बता देता है। इसके बाद सभी खजाने की तलाश में निकल पड़ते हैं और यहीं से कॉमेडी, भ्रम और भागदौड़ शुरू होती है।
हालांकि कहानी का मूल विचार नया नहीं लगता। कई दृश्य दर्शकों को फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्मों की याद दिलाते हैं, लेकिन उनमें ताजगी और नया मनोरंजन कम दिखाई देता है।
पटकथा बनी सबसे कमजोर कड़ी
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी स्क्रिप्ट मानी जा रही है। कॉमेडी फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत उनका स्क्रीनप्ले और संवाद होते हैं, लेकिन यहां दोनों ही अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाते।
फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं जो पहले भी हिंदी फिल्मों में देखे जा चुके हैं। पंचलाइन कई जगह दोहराव का शिकार होती हैं और हास्य पैदा करने की कोशिश कृत्रिम लगती है। इंटरवल के बाद कहानी और अधिक बिखरी हुई महसूस होती है।
ट्रेलर में ही खत्म हो गया सरप्राइज
कई समीक्षकों का मानना है कि फिल्म के सबसे मजेदार दृश्य पहले ही ट्रेलर में दिखा दिए गए थे। थिएटर में फिल्म देखते समय नए हास्य दृश्य बहुत कम देखने को मिलते हैं।
जिस तरह पहली 'धमाल' में लगातार हंसी का सिलसिला बना रहता था, वैसा प्रभाव इस बार दिखाई नहीं देता।
कमजोर VFX ने बढ़ाई निराशा
आज के दौर में दर्शक तकनीकी गुणवत्ता को लेकर काफी जागरूक हैं। ऐसे में फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स अपेक्षा से कमजोर नजर आते हैं।
कई एक्शन और एडवेंचर सीक्वेंस कृत्रिम लगते हैं। CGI का उपयोग कई जगह वास्तविकता से दूर दिखाई देता है, जिससे बड़े पर्दे का अनुभव प्रभावित होता है।
कलाकारों ने पूरी कोशिश की
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट है।
अजय देवगन अपने शांत लेकिन प्रभावी अंदाज में नजर आते हैं। रितेश देशमुख अपनी कॉमिक टाइमिंग से कुछ दृश्यों में हंसी निकालने में सफल रहते हैं।
अरशद वारसी और जावेद जाफरी की जोड़ी आज भी फिल्म के सबसे मनोरंजक हिस्सों में शामिल है। दोनों की बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी दर्शकों को पहली फिल्म की याद दिलाती है।
रवि किशन, संजय मिश्रा और उपेंद्र लिमये भी अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट के कारण उनके अभिनय का पूरा प्रभाव सामने नहीं आ पाता।
संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का संगीत बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ता। कुछ रीक्रिएटेड गाने जरूर ध्यान आकर्षित करते हैं, लेकिन कोई नया गीत ऐसा नहीं बन पाता जो लंबे समय तक याद रहे।
बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों को ऊर्जा देता है और सिनेमैटोग्राफी फिल्म के एडवेंचर वाले हिस्सों को बेहतर बनाने की कोशिश करती है।
पहली 'धमाल' जैसा जादू अब भी दूर
2007 में आई पहली 'धमाल' की सफलता का सबसे बड़ा कारण उसकी सरल लेकिन बेहद मनोरंजक कहानी, शानदार कॉमिक टाइमिंग और यादगार किरदार थे।
'धमाल 4' उन्हीं यादों को दोहराने की कोशिश करती है, लेकिन नई कहानी और ताजगी की कमी के कारण वह उसी स्तर का मनोरंजन नहीं दे पाती।
दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कुछ दर्शकों ने अरशद वारसी और जावेद जाफरी की जोड़ी की जमकर तारीफ की है।
कई लोगों ने अजय देवगन और रितेश देशमुख की मौजूदगी को फिल्म की सकारात्मक बात बताया।
वहीं बड़ी संख्या में दर्शकों ने कहानी, कमजोर VFX और पुराने कॉमेडी फॉर्मूले को फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बताया।
क्या देखनी चाहिए फिल्म?
यदि आप 'धमाल' फ्रेंचाइजी के पुराने प्रशंसक हैं और हल्की-फुल्की फैमिली कॉमेडी पसंद करते हैं तो फिल्म एक बार देखी जा सकती है। लेकिन यदि आप पहली 'धमाल' जैसी नई, तेज रफ्तार और लगातार हंसाने वाली फिल्म की उम्मीद लेकर जा रहे हैं तो यह फिल्म शायद आपकी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी न उतरे।
'धमाल 4' में कलाकारों की मेहनत जरूर दिखाई देती है, लेकिन कमजोर कहानी और तकनीकी कमियां इसकी सबसे बड़ी बाधा बन जाती हैं। फ्रेंचाइजी का नाम और लोकप्रिय किरदार दर्शकों को थिएटर तक तो ला सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक याद रहने के लिए सिर्फ पुरानी यादें काफी नहीं होतीं। नई कहानी और मजबूत लेखन की जरूरत इस फिल्म में स्पष्ट रूप से महसूस होती है।
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