खगड़िया में अतिक्रमण पर प्रशासन की कार्रवाई बेअसर: पांचवीं बार चला बुलडोजर, अगले ही दिन फिर सड़क पर सजी दुकानें; स्थायी समाधान की उठी मांग
बिहार के खगड़िया जिले के महेशखूंट बाजार में अतिक्रमण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। प्रशासन द्वारा बार-बार अभियान चलाने और बुलडोजर से अतिक्रमण हटाने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। शनिवार को सामने आई स्थिति ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक पांच बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा चुका है, लेकिन हर बार कार्रवाई के अगले ही दिन सड़क किनारे अस्थायी दुकानें, ठेले और खोमचे फिर से लग जाते हैं।
महेशखूंट का आसाम रोड चौराहा और मुख्य बाजार क्षेत्र लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी दुकानों के कारण मुख्य मार्ग की चौड़ाई काफी कम हो जाती है, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस समस्या का सबसे अधिक असर स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस, सार्वजनिक परिवहन और रोजमर्रा के यात्रियों पर पड़ता है।
पांच बार चला अतिक्रमण हटाओ अभियान
स्थानीय प्रशासन ने अब तक पांच अलग-अलग अवसरों पर जेसीबी मशीन और पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। अभियान के दौरान सड़क किनारे बने अस्थायी ढांचे, ठेले और दुकानों को हटाया गया तथा दुकानदारों को दोबारा सड़क पर कब्जा न करने की चेतावनी भी दी गई।
हालांकि स्थानीय लोगों के अनुसार प्रशासनिक टीम के लौटते ही धीरे-धीरे दुकानदार फिर से सड़क किनारे अपनी दुकानें लगा लेते हैं। परिणामस्वरूप कुछ ही घंटों या अगले दिन बाजार की स्थिति पहले जैसी हो जाती है और सड़क पर आवागमन प्रभावित होने लगता है।
रोजाना लगता है जाम, राहगीर परेशान
महेशखूंट बाजार खगड़िया जिले का महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और आवागमन के लिए पहुंचते हैं। सड़क पर सब्जी, फल, कपड़े, चाय-नाश्ते और अन्य सामान की अस्थायी दुकानें लगने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुबह और शाम के समय स्थिति सबसे अधिक खराब रहती है। कई बार स्कूल बसें, एंबुलेंस और आवश्यक सेवाओं के वाहन भी जाम में फंस जाते हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर भीड़ बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो जाती है।
दुकानदारों की भी अपनी मजबूरी
सड़क किनारे दुकान लगाने वाले फुटपाथी दुकानदारों का कहना है कि उनके पास व्यवसाय करने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि परिवार का पालन-पोषण इसी छोटे व्यवसाय पर निर्भर है और यदि उन्हें सड़क से हटाया जाता है तो उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।
दुकानदारों का सुझाव है कि प्रशासन उन्हें किसी निर्धारित स्थान या वेंडिंग जोन में व्यवस्थित रूप से दुकान लगाने की सुविधा उपलब्ध कराए। उनका कहना है कि यदि स्थायी स्थान दिया जाए तो वे सड़क पर दुकान लगाने से बचेंगे।
प्रशासन की कार्रवाई के बाद भी निगरानी का अभाव
स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल बुलडोजर चलाने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। उनका कहना है कि कार्रवाई के बाद नियमित निगरानी और प्रभावी प्रवर्तन की कमी के कारण अतिक्रमण दोबारा हो जाता है।
सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक स्तर पर भी माना जा रहा है कि केवल एक दिन की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। लगातार निगरानी, पुलिस की सक्रिय मौजूदगी और दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ जुर्माना या कानूनी कार्रवाई जैसे कदम उठाने की आवश्यकता है।
एसडीओ का पक्ष नहीं मिल सका
इस संबंध में एसडीओ, गोगरी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। इसलिए इस समाचार में उनका आधिकारिक बयान शामिल नहीं किया गया है। प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
वेंडिंग जोन बनाने की मांग तेज
स्थानीय बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों और व्यापारियों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान केवल अतिक्रमण हटाने से नहीं बल्कि सुनियोजित व्यवस्था से निकलेगा। उनका सुझाव है कि नगर प्रशासन फुटपाथी दुकानदारों के लिए एक अधिकृत वेंडिंग जोन विकसित करे, जहां वे व्यवस्थित तरीके से अपना व्यवसाय कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014 के तहत स्थानीय निकायों को सर्वे कर पात्र फुटपाथी विक्रेताओं के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने और उनकी आजीविका तथा यातायात व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
प्रशासन और नागरिकों के सामने दोहरी चुनौती
महेशखूंट बाजार की स्थिति प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती पेश कर रही है। एक ओर सड़क को अतिक्रमण मुक्त रखना और यातायात सुचारु बनाना आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों छोटे दुकानदारों की आजीविका भी इससे जुड़ी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक नियमित निगरानी, प्रभावी कार्रवाई और वैकल्पिक वेंडिंग जोन की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक बुलडोजर अभियान केवल अस्थायी समाधान बनकर रह जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान किस प्रकार निकालता है, इस पर क्षेत्र के लोगों की नजर बनी हुई है।
news desk MPcg