सेंसेक्स और निफ्टी सपाट बंद, IT और बैंकिंग शेयरों ने संभाला बाजार; निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की तेजी के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव, एक्सपर्ट ने बताया आगे का ट्रेंड
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण घरेलू बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, लेकिन दिन के दूसरे हिस्से में आईटी और बैंकिंग सेक्टर के प्रमुख शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने नुकसान की भरपाई कर ली।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। निवेशकों ने जहां वैश्विक जोखिमों को लेकर सतर्कता दिखाई, वहीं घरेलू कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन ने बाजार को सहारा दिया।
शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में आई रिकवरी
सोमवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में शुरुआती घंटों में भारी दबाव देखने को मिला। एक समय सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा नीचे चला गया था। हालांकि, निचले स्तरों पर निवेशकों की खरीदारी और बड़े शेयरों में तेजी के कारण बाजार ने मजबूत वापसी की।
दिन के अंत में:
सेंसेक्स 47 अंक या 0.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,616.40 अंक पर बंद हुआ।
निफ्टी 50 में 4 अंक या 0.02 प्रतिशत की मामूली तेजी दर्ज की गई और इंडेक्स 24,211 अंक पर बंद हुआ।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, गिरावट के बावजूद निफ्टी का 24,000 के स्तर के ऊपर बने रहना बाजार की मजबूती को दर्शाता है।
IT और बैंकिंग शेयरों ने दिया बाजार को सहारा
सोमवार के कारोबार में आईटी सेक्टर और बैंकिंग शेयरों ने बाजार को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निवेशकों ने टेक्नोलॉजी कंपनियों और चुनिंदा बैंकिंग शेयरों में खरीदारी दिखाई।
सेंसेक्स को सबसे ज्यादा मजबूती देने वाले शेयरों में शामिल रहे:
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
इंफोसिस
एचसीएल टेक्नोलॉजीज
कोटक महिंद्रा बैंक
इन शेयरों में खरीदारी से बाजार को शुरुआती नुकसान से उबरने में मदद मिली।
वहीं दूसरी ओर कुछ बड़े शेयरों में गिरावट ने बाजार की तेजी को सीमित रखा। इनमें:
एचडीएफसी बैंक
रिलायंस इंडस्ट्रीज
भारती एयरटेल
प्रमुख रहे।
मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर
बाजार पर वैश्विक घटनाक्रमों का भी बड़ा असर रहा। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत तक उछाल देखने को मिला।
भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई, कंपनियों की लागत और बाजार की धारणा पर पड़ सकता है।
निवेशकों ने इसी वजह से सोमवार को सतर्क रुख अपनाया और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा।
व्यापक बाजारों में भी सीमित हलचल
सोमवार को केवल बड़े शेयरों में ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी ज्यादा तेजी या गिरावट देखने को नहीं मिली।
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स सपाट बंद हुआ।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी सीमित बदलाव रहा।
बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर करीब 482 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया।
पिछले कारोबारी सत्र में यह आंकड़ा करीब 481.75 लाख करोड़ रुपये था।
निफ्टी के 50 शेयरों में 29 में गिरावट
निफ्टी 50 इंडेक्स के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सोमवार को 50 में से 29 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि बाकी शेयरों में तेजी दर्ज की गई।
गिरावट वाले प्रमुख शेयर
ग्रासिम इंडस्ट्रीज
टाटा स्टील
नेस्ले इंडिया
इटरनल
इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो)
इन शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
तेजी वाले प्रमुख शेयर
टीसीएस
एचसीएल टेक्नोलॉजीज
इंफोसिस
टेक महिंद्रा
बजाज ऑटो
इन कंपनियों में खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली।
एक्सपर्ट की राय: 24,000 का स्तर निफ्टी के लिए अहम
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के अनुसार, निफ्टी ने 24,000 के स्तर को एक मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि सोमवार को निचले स्तरों से आई तेज रिकवरी यह संकेत देती है कि बाजार में अभी भी खरीदारी की ताकत मौजूद है।
उनके मुताबिक:
"अगर निफ्टी 24,200 के स्तर के ऊपर मजबूती से टिकता है तो शॉर्ट टर्म में इसमें तेजी बढ़ सकती है और इंडेक्स 24,500 के स्तर तक पहुंच सकता है।"
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर निफ्टी 24,000 के नीचे फिसलता है तो बाजार में कमजोरी बढ़ सकती है और गिरावट का दबाव देखने को मिल सकता है।
आगे किन संकेतों पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी।
इनमें प्रमुख हैं:
1. वैश्विक बाजारों का रुख
अमेरिका और अन्य प्रमुख बाजारों की चाल भारतीय बाजारों को प्रभावित करेगी।
2. कच्चे तेल की कीमतें
तेल की कीमतों में तेजी भारत की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत को प्रभावित कर सकती है।
3. विदेशी निवेशकों की गतिविधियां
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी और बिकवाली बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
4. कंपनियों के तिमाही नतीजे
निवेशक कंपनियों के प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं पर नजर रखेंगे।
निष्कर्ष
सोमवार का कारोबारी सत्र उतार-चढ़ाव वाला रहा। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की तेजी के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई और सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट से उबरकर लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए।
आईटी और बैंकिंग शेयरों की मजबूती ने बाजार को सहारा दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण रहेगा, जबकि 24,200 के ऊपर टिकाव बाजार में नई तेजी का संकेत दे सकता है।
news desk MPcg