WhatsApp-Telegram के यूजरनेम फीचर पर केंद्र सरकार की कड़ी नजर, नए नियमों की तैयारी तेज; साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
भारत में डिजिटल संचार और साइबर सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार एक बड़ा नियामक ढांचा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने WhatsApp, Telegram और Signal जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध या प्रस्तावित यूजरनेम आधारित मैसेजिंग फीचर की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि इस फीचर से जुड़ी कंपनियों द्वारा भेजे गए जवाबों का परीक्षण किया जा रहा है और समीक्षा पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
सरकार का स्पष्ट संकेत है कि यदि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग के लिए कोई नया नियामक ढांचा तैयार किया जाता है, तो वह किसी एक ऐप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर समान रूप से लागू होगा। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, साइबर अपराधों पर अंकुश लगाना और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए एक समान मानक तैयार करना है।
क्या है पूरा मामला?
हाल के महीनों में WhatsApp ने यूजरनेम आधारित मैसेजिंग फीचर पर काम शुरू किया है। इस फीचर के जरिए उपयोगकर्ता भविष्य में अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल यूजरनेम के माध्यम से दूसरे लोगों से संपर्क कर सकेंगे। Telegram पर यह सुविधा पहले से उपलब्ध है, जबकि Signal भी इसी तरह की पहचान प्रणाली पर काम करता है।
सरकार ने इस फीचर को लेकर तीनों कंपनियों को नोटिस जारी कर उनसे पूछा था कि यूजरनेम आधारित संचार में उपयोगकर्ताओं की पहचान, सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने के लिए क्या तकनीकी और कानूनी सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं।
सरकार ने क्या कहा?
सोमवार को एक साइबर सुरक्षा रिपोर्ट के लॉन्च कार्यक्रम के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि मंत्रालय को WhatsApp की ओर से जवाब प्राप्त हो चुका है।
उन्होंने बताया कि—
"जवाब पिछले सप्ताह मिला था। फिलहाल उसकी समीक्षा की जा रही है। समीक्षा पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई या किसी नियामक निर्णय पर विचार किया जाएगा।"
सरकार ने अभी किसी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा नहीं की है, लेकिन स्पष्ट किया है कि सुरक्षा पहलुओं की गहन जांच की जाएगी।
सरकार को किन बातों की चिंता है?
सरकार का मानना है कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता बढ़ाने के साथ-साथ साइबर अपराधियों के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि मोबाइल नंबर सार्वजनिक नहीं होगा, तो अपराधी नकली यूजरनेम बनाकर लोगों से संपर्क कर सकते हैं। इससे निम्न प्रकार के अपराधों का खतरा बढ़ सकता है—
फर्जी पहचान (Identity Theft)
फिशिंग लिंक भेजकर बैंकिंग धोखाधड़ी
डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड
एआई आधारित सोशल इंजीनियरिंग हमले
नकली सरकारी अधिकारी या बैंक कर्मचारी बनकर ठगी
डीपफेक और फर्जी प्रोफाइल के जरिए लोगों को भ्रमित करना
निवेश और नौकरी के नाम पर ऑनलाइन ठगी
सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग चुनौतीपूर्ण हो सकती है, इसलिए पहले सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन आवश्यक है।
WhatsApp ने अपने जवाब में क्या कहा?
WhatsApp ने सरकार को भेजे गए जवाब में कहा है कि यूजरनेम फीचर का उद्देश्य केवल उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता को बेहतर बनाना है।
कंपनी के अनुसार—
यूजरनेम मोबाइल नंबर का विकल्प नहीं होगा।
WhatsApp अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर अनिवार्य रहेगा।
यूजरनेम केवल दूसरे लोगों से संपर्क स्थापित करने का अतिरिक्त माध्यम होगा।
इससे उपयोगकर्ता अपना नंबर सार्वजनिक किए बिना चैट शुरू कर सकेंगे।
यह फीचर फिलहाल चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है।
वर्ष 2026 के अंत तक इसे वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराने की योजना है।
फिलहाल उपयोगकर्ता अपने पसंदीदा यूजरनेम आरक्षित कर सकते हैं।
WhatsApp ने यह भी कहा कि वह फीचर को जल्दबाजी में लागू नहीं करना चाहता और उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए इसे बेहतर बनाया जा रहा है।
Telegram की स्थिति क्या है?
Telegram कई वर्षों से यूजरनेम आधारित पहचान प्रणाली का उपयोग कर रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ता बिना मोबाइल नंबर साझा किए केवल यूजरनेम के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।
सरकार अब यह भी समझना चाहती है कि Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर इस सुविधा के दौरान सुरक्षा संबंधी कौन-कौन से उपाय लागू किए गए हैं और क्या वे भारतीय उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त हैं।
सरकार क्यों बना रही है समान नियम?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार यदि प्रत्येक प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग नियम बनाए जाएंगे तो उनका पालन और निगरानी करना कठिन होगा।
इसी कारण सरकार सभी मैसेजिंग सेवाओं के लिए एक कॉमन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार कर रही है।
इस ढांचे में संभावित रूप से निम्न बिंदुओं पर नियम बनाए जा सकते हैं—
यूजरनेम बनाने के मानक
नकली पहचान रोकने के उपाय
शिकायत और रिपोर्टिंग व्यवस्था
फर्जी अकाउंट की पहचान
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग
साइबर अपराध की जांच में तकनीकी सहायता
उपयोगकर्ता सुरक्षा और गोपनीयता के बीच संतुलन
साइबर अपराध बढ़ने के बीच सरकार की बढ़ी सतर्कता
भारत में पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराधों के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। विशेष रूप से—
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड
फर्जी निवेश योजनाएं
बैंकिंग फ्रॉड
KYC अपडेट के नाम पर ठगी
OTP और UPI फ्रॉड
एआई आधारित वॉयस क्लोनिंग
डीपफेक वीडियो
सोशल मीडिया इम्पर्सनेशन
जैसे मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
इसी वजह से सरकार नई तकनीकों और डिजिटल सुविधाओं की सुरक्षा समीक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
विशेषज्ञ क्या मानते हैं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग गोपनीयता के लिहाज से उपयोगी हो सकती है, क्योंकि इससे उपयोगकर्ताओं को अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, यदि मजबूत सत्यापन, रिपोर्टिंग और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होगी तो इसका दुरुपयोग भी संभव है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गोपनीयता और सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल क्या बदलेगा?
अभी तक सरकार ने—
WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर प्रतिबंध नहीं लगाया है।
Telegram की मौजूदा सेवा में कोई बदलाव नहीं किया है।
कोई नया कानून या नियम लागू नहीं किया है।
वर्तमान में केवल कंपनियों द्वारा भेजे गए जवाबों की समीक्षा चल रही है। समीक्षा पूरी होने के बाद ही सरकार आगे की नीति, दिशा-निर्देश या नियामक ढांचे की घोषणा कर सकती है।
निष्कर्ष
यूजरनेम आधारित मैसेजिंग डिजिटल संचार को अधिक निजी और सुविधाजनक बना सकती है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन पहचान से जुड़े नए जोखिम भी सामने आते हैं। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार सभी प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के लिए समान और पारदर्शी नियम तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में यह फैसला तय करेगा कि भारत में डिजिटल प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाएगा।
news desk MPcg