सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर विपक्ष का समर्थन, केजरीवाल-अखिलेश ने की अनशन खत्म करने की अपील; जंतर-मंतर पर 24वें दिन भी प्रदर्शन जारी
शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के लिए जाने जाने वाले सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को विपक्षी नेताओं का समर्थन मिलना शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने वांगचुक के आंदोलन का समर्थन किया है। हालांकि, नेताओं ने उनकी गिरती सेहत को देखते हुए उनसे अनशन समाप्त करने की अपील भी की है।
जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन 24वें दिन में पहुंच गया है। इस आंदोलन में परीक्षा प्रणाली में सुधार, कथित पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाई जा रही है।
28 जून से भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 से दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP आंदोलन में शामिल होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। वह इस आंदोलन में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर समर्थन देने पहुंचे थे।
वांगचुक की भूख हड़ताल का मुख्य मुद्दा कथित परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठा रहे हैं।
जंतर-मंतर पर 24 दिन से जारी आंदोलन
CJP का प्रदर्शन 20 जून 2026 से जंतर-मंतर पर चल रहा है। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों के हितों की सुरक्षा और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक के शामिल होने के बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिली। लगातार उपवास के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक का वजन कम हुआ है और मेडिकल टीम उनकी नियमित जांच कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनशन के 16वें दिन तक उनका वजन करीब 8 किलो से ज्यादा घट चुका था।
समर्थकों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि वांगचुक की मांगों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन उनकी सेहत को देखते हुए उन्हें अनशन खत्म करने पर भी विचार करना चाहिए।
केजरीवाल और अखिलेश ने जताया समर्थन
आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर समर्थन जताया है।
अरविंद केजरीवाल ने वांगचुक की मांगों और आंदोलन को लेकर समर्थन की बात कही और उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की। वहीं अखिलेश यादव ने भी छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से संवाद की मांग की।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी मांगों को उठाने का अधिकार है और सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की क्या मांग है?
CJP आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से इन मुद्दों को उठा रहे हैं:
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
कथित पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई
छात्रों के भविष्य की सुरक्षा
परीक्षा प्रणाली में सुधार
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है।
सरकार से बातचीत की मांग
सोनम वांगचुक और आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए। समर्थक लगातार सरकार से संवाद शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं विपक्षी नेताओं ने भी कहा है कि लंबे समय तक चल रहे आंदोलन को बातचीत के जरिए सुलझाने की जरूरत है।
संसद मार्च की तैयारी
आंदोलन से जुड़े लोगों ने आगे की रणनीति के तहत संसद मार्च की घोषणा भी की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 20 जुलाई को संसद सत्र के दौरान मार्च निकालने की योजना बताई गई है।
राजनीतिक मुद्दा बना सोनम वांगचुक का आंदोलन
सोनम वांगचुक इससे पहले भी शिक्षा, पर्यावरण और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं। इस बार परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को लेकर उनका अनशन राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत शुरू होती है या आंदोलन आगे और तेज होता है।
news desk MPcg