शुजालपुर में नशे का खतरनाक नेटवर्क: एविल इंजेक्शन और स्मैक मिलाकर बना रहे ‘एमडी’ जैसा नशा, डॉक्टर से लेकर सप्लायरों तक पहुंची जांच
मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में नशे के अवैध कारोबार को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक जांच में दावा किया गया है कि कुछ लोग प्रतिबंधित दवा एविल इंजेक्शन और स्मैक को मिलाकर ऐसा नशा तैयार कर रहे हैं, जिसका असर उन्हें कथित तौर पर एमडी (मेथामफेटामाइन/एमडीएमए जैसे सिंथेटिक ड्रग्स) जैसा महसूस होता है।
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल नशे के आदी लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कथित तौर पर अवैध दवा बिक्री करने वाले लोग, सप्लायर और कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों से जुड़े नाम भी सामने आए हैं।
हालांकि, सामने आए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों और पुलिस कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
15 दिन की पड़ताल में सामने आया नशे का नेटवर्क
रिपोर्ट के अनुसार, शुजालपुर में नशे के इस नेटवर्क की पड़ताल के लिए करीब 15 दिनों तक नशे के आदी लोगों के बीच रहकर जानकारी जुटाई गई।
जांच के दौरान दावा किया गया कि नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले एविल इंजेक्शन बिना डॉक्टर की पर्ची के आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।
कुछ स्थानों पर कथित तौर पर किराना दुकानों और निजी स्थानों से भी इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई।
जांच में यह भी दावा किया गया कि स्मैक की पुड़िया भी स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध कराई जा रही है।
एविल और स्मैक का खतरनाक मिश्रण
नशे के आदी लोगों के अनुसार, एविल इंजेक्शन को गर्म करके उसमें स्मैक मिलाई जाती है। इसके बाद तैयार मिश्रण को दोबारा गर्म कर ठंडा किया जाता है और फिर सिरिंज के जरिए शरीर में पहुंचाया जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह का मिश्रण बेहद खतरनाक हो सकता है।
एविल एक एंटी-एलर्जिक दवा है, जिसका उपयोग चिकित्सकीय जरूरतों में किया जाता है। इसे नशीले पदार्थों के साथ मिलाकर लेना शरीर के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के इंजेक्शन से:
दिल और दिमाग पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ओवरडोज की स्थिति में जान जाने का खतरा रहता है।
संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
300 रुपये में मिल रहे थे इंजेक्शन, सप्लाई का तरीका बेहद गोपनीय
जांच में दावा किया गया कि एविल इंजेक्शन की सप्लाई करने वाले लोग नए ग्राहकों पर आसानी से भरोसा नहीं करते।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक सप्लायर तक पहुंचने के लिए पहले नशे के आदी व्यक्ति के माध्यम से संपर्क बनाया गया।
शुरुआत में सप्लायर ने अनजान व्यक्ति को इंजेक्शन देने से इनकार किया, लेकिन पहचान और भरोसा दिलाने के बाद कथित तौर पर दो इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए।
इसके लिए करीब 300 रुपये लिए जाने की बात कही गई।
जांच में सामने आया कि सप्लायर सीधे सौदा करने से बचते हैं और पहचान वाले लोगों के जरिए ही नए ग्राहकों तक पहुंचते हैं।
स्मैक सप्लाई नेटवर्क में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे का नाम
जांच के दौरान स्मैक सप्लाई करने वाले एक कथित व्यक्ति का नाम भी सामने आया।
रिपोर्ट के अनुसार, शुजालपुर मंडी क्षेत्र में रहने वाले नवरंगी उर्फ घनश्याम पर स्मैक सप्लाई करने के आरोप लगाए गए हैं।
बताया गया कि वह छोटी मात्रा में स्मैक की पुड़िया बेचता है।
जांच में यह भी दावा किया गया कि नवरंगी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोहनलाल अहिरवार का बेटा है।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने नहीं आया है।
डॉक्टर पर भी अवैध बिक्री का आरोप
जांच में एक डॉक्टर का नाम भी सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक डॉक्टर से एविल इंजेक्शन उपलब्ध होने की जानकारी मिलने के बाद संपर्क किया गया।
आरोप है कि डॉक्टर ने कथित तौर पर बिना पर्चे के इंजेक्शन उपलब्ध कराया।
हालांकि, किसी भी डॉक्टर के खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई या जांच की जानकारी संबंधित विभाग की ओर से सामने नहीं आई है।
सड़क किनारे भी हो रही स्मैक की बिक्री का दावा
जांच में दावा किया गया कि स्मैक बेचने वाले लोग सार्वजनिक स्थानों पर भी सक्रिय हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एक कथित सप्लायर ने घर पर बुलाने के बजाय सड़क पर मिलने के लिए कहा और वहां सौदा किया।
बताया गया कि नेटवर्क में शामिल लोग नए लोगों से दूरी रखते हैं और पहले उनकी पहचान की पुष्टि करते हैं।
एक सिरिंज के इस्तेमाल से HIV और संक्रमण का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इंजेक्शन के जरिए नशा करने वालों में सबसे बड़ा खतरा संक्रमण का होता है।
एक ही सिरिंज या सुई का इस्तेमाल कई लोगों द्वारा करने से:
HIV संक्रमण,
हेपेटाइटिस बी,
हेपेटाइटिस सी
जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।
शुजालपुर क्षेत्र में इंजेक्शन से नशा करने वाले कुछ लोगों में HIV संक्रमण मिलने की बात भी सामने आई है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है क्योंकि कई लोग जांच नहीं कराते।
मेडिकल दुकानों की निगरानी पर सवाल
नशे के इस नेटवर्क को लेकर मेडिकल दुकानों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि कुछ जगहों पर दवाओं की बिक्री नियमों के अनुसार नहीं हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के लिए डॉक्टर की सलाह और रिकॉर्ड रखना जरूरी है।
यदि बिना जांच-पड़ताल के ऐसी दवाएं उपलब्ध होती हैं तो उनका गलत इस्तेमाल बढ़ सकता है।
पुलिस कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई छोटे पैडलर कम मात्रा में नशीला पदार्थ रखते हैं, जिससे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना चुनौती बन जाता है।
कई मामलों में आरोपियों पर छोटी धाराओं में कार्रवाई होने के बाद वे दोबारा उसी गतिविधि में शामिल हो जाते हैं।
लोगों ने पुलिस और प्रशासन से नशे के नेटवर्क के बड़े सप्लायरों तक पहुंचने और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
शुजालपुर जैसे शहरों में नशे का बढ़ता नेटवर्क युवाओं के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छोटे सप्लायरों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क की जांच, अवैध दवा बिक्री पर नियंत्रण और नशामुक्ति अभियान को मजबूत करना जरूरी है।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नशे के इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और कितनी बड़ी कार्रवाई होती है।
news desk MPcg