IPS संजीव गांधी पर बड़ा प्रशासनिक एक्शन SP रेजिडेंस खाली न करने पर 1.80 लाख का डैमेज चार्ज, वेतन से वसूली की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार गांधी के खिलाफ सरकारी आवास खाली न करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने उन पर 1.80 लाख रुपये से अधिक का डैमेज चार्ज (दंडात्मक किराया) लगाने के साथ-साथ स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि राशि जमा नहीं की गई तो यह उनके वेतन से काटकर वसूली जाएगी।
मामला शिमला स्थित पुलिस अधीक्षक (SP) के लिए आरक्षित सरकारी आवास से जुड़ा है, जिसमें वर्तमान में संजीव कुमार गांधी के रहने का आरोप है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, वह पहले शिमला SP के पद पर तैनात थे और उन्होंने 7 फरवरी 2026 को यह पद छोड़ दिया था। इसके बाद नियमों के तहत उन्हें एक महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करना था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के बावजूद आवास खाली नहीं किया गया।
हिमाचल प्रदेश अलॉटमेंट ऑफ गवर्नमेंट रेजिडेंसेज (जनरल पूल) नियम, 1994 के तहत किसी भी अधिकारी को स्थानांतरण या पद परिवर्तन के बाद तय समय में सरकारी आवास खाली करना अनिवार्य होता है। इसी नियम के उल्लंघन को आधार बनाते हुए विभाग ने यह कार्रवाई की है।
पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि सरकारी आवास का अनधिकृत रूप से उपयोग जारी रखना नियमों का उल्लंघन है और इसके लिए निर्धारित दरों के अनुसार डैमेज चार्ज लगाया गया है। विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि आवास को तुरंत प्रभाव से खाली किया जाए ताकि उसे पात्र अधिकारी को आवंटित किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल आवास खाली न करने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन और नियमों के सख्त पालन से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि इस तरह की स्थिति से सरकारी आवास व्यवस्था प्रभावित होती है और प्रतीक्षारत अधिकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संजीव कुमार गांधी निर्धारित राशि जमा नहीं करते हैं, तो इसे सीधे उनके वेतन से वसूल किया जाएगा। यह प्रावधान सरकारी बकाया वसूली के नियमों के तहत लागू किया जाएगा।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर संबंधित अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक स्तर पर यह मामला चर्चा में है और इसे नियमों के सख्त पालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी आवास आवंटन व्यवस्था, नियमों के अनुपालन और प्रशासनिक अनुशासन को लेकर बहस छेड़ दी है।
news desk MPcg