बालाघाट पुलिस का ऐतिहासिक कारनामा: नशामुक्ति अभियान 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' को मिला 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन' का विश्व सम्मान
मध्य प्रदेश पुलिस प्रशासन के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्वर्णिम अध्याय दर्ज हो गया है। पूरे राज्य में नशे की रोकथाम और मादक पदार्थों के दुष्परिणामों के प्रति जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान के अंतर्गत बालाघाट जिला पुलिस द्वारा स्थापित किए गए अभूतपूर्व कीर्तिमान को अब वैश्विक धरातल पर भी सर्वोच्च मान्यता प्राप्त हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्था 'वर्ल्ड BOOK OF RECORDS, LONDON' (वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन) ने बालाघाट पुलिस के इस व्यापक सामाजिक आंदोलन को विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज करते हुए 'Certificate of Excellence' (उत्कृष्टता प्रमाण पत्र) से सम्मानित किया है।
भोपाल और बालाघाट में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा यह सम्मान पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों को सौंपा गया। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता न केवल बालाघाट पुलिस बल के अथक परिश्रम का परिणाम है, बल्कि यह संपूर्ण मध्य प्रदेश पुलिस प्रशासन और राज्य के नागरिकों के लिए एक गर्वित करने वाला क्षण है।
1 मिनट में 1.25 लाख विद्यार्थियों ने ली शपथ: बना नया विश्व रिकॉर्ड
बालाघाट जिला पुलिस द्वारा आयोजित इस नशामुक्ति संकल्प कार्यक्रम की योजना, विशालता, और समयबद्धता ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। एक ही समय पर पूरे जिले को एक सूत्र में बांधकर इस अभियान को क्रियान्वित किया गया, जिसके मुख्य आंकड़े निम्नलिखित हैं:
1,204 शैक्षणिक संस्थानों का ऐतिहासिक समन्वय: बालाघाट जिले के शहरी क्षेत्रों से लेकर अति-संवेदनशील, वनांचल और सुदूर ग्रामीण अंचलों में स्थित कुल 1,204 प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च तथा उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इस अभियान के साथ एक साथ डिजिटल और प्रशासनिक रूप से जोड़ा गया।
1.25 लाख से अधिक विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी: जिले भर के लगभग 1 लाख 25 हजार विद्यार्थियों ने अपने-अपने विद्यालयों के प्रांगण में एक साथ एकत्र होकर जीवन भर किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने, अपने परिवार को सुरक्षित रखने और समाज को नशा-मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
मात्र 1 मिनट में निष्पादित हुई प्रक्रिया: संपूर्ण जिले के 1,200 से अधिक स्कूलों में यह नशामुक्ति शपथ प्रक्रिया मात्र 1 मिनट के भीतर सफलता पूर्वक संपन्न कराई गई। इतने बड़े पैमाने पर सटीक समय प्रबंधन (Time Management) और अनुशासित समन्वय का यह उदाहरण अपने आप में दुर्लभ है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों की सहभागिता: जमीनी स्तर पर स्कूलों में आयोजित इस शपथ ग्रहण के साथ-साथ बालाघाट पुलिस के आधिकारिक डिजिटल एवं सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से भी जिले और प्रदेश भर के लाखों नागरिकों ने ऑनलाइन जुड़कर इस महा-अभियान में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन' की आधिकारिक जांच टीम और प्रतिनिधियों ने इतनी विशाल जन-भागीदारी को इतने कम समय में अनुशासित ढंग से संचालित करने की सराहना की और इसे विश्व रिकॉर्ड घोषित किया।
'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' अभियान का मुख्य उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि
यह संपूर्ण अभियान मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प "नशा-मुक्त मध्य प्रदेश" की परिकल्पना तथा प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना के सक्षम मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। प्रदेश भर में यह 15-दिवसीय विशेष अभियान 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक संचालित हुआ।
बालाघाट जिले में इस महा-अभियान का सफल नियोजन एवं जमीनी क्रियान्वयन बालाघाट रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) ललित शाक्यवार, पुलिस अधीक्षक (SP) तथा जिले के समस्त थाना प्रभारियों और पुलिसकर्मियों की टीम द्वारा किया गया। इस अभियान का प्राथमिक ध्येय बच्चों और युवाओं को कम उम्र में ही नशे की बुरी लत से बचाना, अवैध मादक पदार्थों की सप्लाई चेन को पूरी तरह से ध्वस्त करना और समाज में स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देना था।
बहुआयामी रणनीति: भाषणों से आगे बढ़कर धरातल पर ठोस कदम
बालाघाट पुलिस ने इस अभियान को औपचारिक आयोजनों तक सीमित न रखते हुए इसे एक जन-आंदोलन का रूप दिया। 15 दिनों तक चले इस विशेष अभियान के तहत कई रचनात्मक और कड़े कदम उठाए गए:
शैक्षणिक संस्थानों में रचनात्मक प्रतियोगिताएं: युवाओं को केवल उपदेश देने के बजाय उनकी सोच को बदलने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में निबंध लेखन, वाद-विवाद, चित्रकला, पोस्टर मेकिंग, स्लोगन राइटिंग, नुक्कड़ नाटक और खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में चौपाल का आयोजन: बालाघाट के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय बहुल क्षेत्रों में ग्राम रक्षा समितियों, जन-अभियान परिषद, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर 'नशा-विरोधी चौपालों' का आयोजन किया गया, जहां लोगों को नशे से होने वाले सामाजिक व आर्थिक नुकसान के बारे में समझाया गया।
हेल्पलाइन और पुनर्वास केंद्रों का व्यापक प्रचार: जो लोग पहले से ही नशे की लत के शिकार हो चुके हैं, उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने और चिकित्सीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय नशामुक्ति हेल्पलाइन नंबर 1933 और 14446 का गांव-गांव में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।
मादक पदार्थों के तस्करों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई: जागरूकता अभियानों के साथ-साथ पुलिस बल ने अवैध शराब, गांजा, नशीली दवाओं और अन्य मादक पदार्थों का व्यापार करने वाले अपराधियों के खिलाफ विशेष चेकिंग अभियान चलाकर कई बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा।
अंतरराष्ट्रीय संस्था का मंतव्य और दूरगामी सामाजिक प्रभाव
'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन' के प्रतिनिधियों ने यह प्रतिष्ठित सम्मान सौंपते हुए कहा कि आधुनिक युग में पुलिसिंग का दायरा केवल अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। सामाजिक सरोकारों से जुड़कर भावी पीढ़ी को सही दिशा देना और अपराध की जड़ (नशा) पर प्रहार करना आधुनिक पुलिसिंग का सबसे प्रभावी रूप है। एक ही समय में 1.25 लाख बच्चों के मन में नशामुक्ति के बीज बोना सामुदायिक पुलिसिंग (Community Policing) का एक बेजोड़ और अनुकरणीय मॉडल है।
इस ऐतिहासिक सफलता पर मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे, स्थानीय नागरिकों, शिक्षाविदों, समाजशास्त्रियों और अभिभावकों ने बालाघाट पुलिस की पूरी टीम को बधाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अभियानों से न केवल वर्तमान पीढ़ी जागरूक होती है, बल्कि एक अपराध-मुक्त, नशा-मुक्त और समृद्ध समाज की मजबूत नींव भी तैयार होती है।
news desk MPcg