खड़गे का सरकार पर हमला: ‘12 साल में सवा लाख छात्रों ने सुसाइड किया’, पेपर लीक बिल को बताया अधूरा; बोले- सिर्फ सजा बढ़ाने से नहीं रुकेगा पेपर लीक

खड़गे का सरकार पर हमला: ‘12 साल में सवा लाख छात्रों ने सुसाइड किया’, पेपर लीक बिल को बताया अधूरा; बोले- सिर्फ सजा बढ़ाने से नहीं रुकेगा पेपर लीक

 राज्यसभा में गुरुवार को पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पर चर्चा के दौरान सरकार पर छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में यह संशोधन विधेयक पेश किया। इससे एक दिन पहले, 29 जुलाई को लोकसभा ने करीब सात घंटे की चर्चा के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया था। अब राज्यसभा में इस पर चर्चा हो रही है।

खड़गे बोले- बिल में नया क्या है?

खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कानून में संशोधन तो किया है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।

उन्होंने कहा कि संशोधन विधेयक में मुख्य रूप से सजा और जुर्माने की रकम बढ़ाई गई है, जबकि पेपर लीक रोकने की व्यवस्था, जवाबदेही और परीक्षा संचालन में सुधार पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

खड़गे ने कहा कि अगर परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले समय में फिर पेपर लीक हो सकते हैं। उनका तर्क था कि केवल कठोर सजा का प्रावधान करने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी।

‘12 साल में सवा लाख छात्रों ने सुसाइड किया’- खड़गे का दावा

बहस के दौरान खड़गे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में सवा लाख छात्रों ने आत्महत्या की। यह आंकड़ा खड़गे के भाषण में किया गया राजनीतिक दावा है; इसे स्वतंत्र आधिकारिक आंकड़े के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

खड़गे ने परीक्षा विवादों और छात्रों के आंदोलनों का जिक्र करते हुए सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों के दबाव और विरोध के बाद सरकार को पेपर लीक से जुड़ा संशोधन विधेयक लाना पड़ा।

2024 में बना था पेपर लीक रोकने का कानून

पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 बनाया था। यह कानून 21 जून 2024 से लागू हुआ था। इसके दायरे में UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, IBPS और NTA जैसी प्रमुख सार्वजनिक परीक्षा एजेंसियों की परीक्षाएं आती हैं।

2026 का संशोधन विधेयक इसी 2024 के कानून को और सख्त करने के लिए लाया गया है। सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक और संगठित परीक्षा अनियमितताओं के मद्देनजर मौजूदा कानूनी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

बिल में क्या बदलेगा?
1. सामान्य अपराध में सजा 5 से 10 साल

मौजूदा कानून में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 3 से 5 साल तक की जेल और अधिकतम 10 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। संशोधन विधेयक में इसे बढ़ाकर 5 से 10 साल की जेल और अधिकतम 50 लाख रुपए जुर्माना करने का प्रस्ताव है।

2. संगठित अपराध पर 10 करोड़ तक जुर्माना

पेपर लीक या परीक्षा में धोखाधड़ी के संगठित अपराध के मामले में न्यूनतम सजा को 5 साल से बढ़ाकर 7 साल करने का प्रस्ताव है। अधिकतम सजा 10 साल रहेगी, जबकि जुर्माने की न्यूनतम सीमा को 1 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है।

3. जांच दो महीने में पूरी करने का प्रावधान

विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान प्रस्तावित है। केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स भी गठित कर सकेगी।

4. राज्यों में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट

प्रस्तावित कानून के तहत प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित किए जाने का प्रावधान है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मामलों की सुनवाई रोजाना किए जाने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

5. सर्विस प्रोवाइडर पर भी सख्ती

परीक्षा कराने वाली सर्विस प्रोवाइडर संस्थाओं के लिए भी जुर्माने को बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसमें अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्था को सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से आठ साल तक प्रतिबंधित किया जा सकता है, जबकि मौजूदा कानून में यह अवधि चार साल है।

सरकार का तर्क- कानून को मजबूत और कार्रवाई को तेज करना जरूरी

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए सरकार का पक्ष रखा। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य केवल सजा बढ़ाना नहीं, बल्कि जांच, ट्रायल और अपील की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना भी है।

सरकार ने यह भी कहा है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है।

जितेंद्र सिंह ने बहस के दौरान NTA का भी उल्लेख किया और कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की अवधारणा लंबे समय से चर्चा में थी और मोदी सरकार ने इसे लागू किया।

विपक्ष की आपत्ति- ‘सजा बढ़ाने से सिस्टम नहीं सुधरेगा’

विपक्ष का मुख्य तर्क है कि पेपर लीक की समस्या का समाधान केवल कठोर कानून बनाने से नहीं होगा। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की छपाई और परिवहन, डिजिटल सिस्टम, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही और समय पर जांच जैसे स्तरों पर सुधार जरूरी हैं।

PRS Legislative Research ने भी विधेयक का विश्लेषण करते हुए कुछ व्यावहारिक सवाल उठाए हैं। मसलन, दो महीने में जांच पूरी करने का लक्ष्य तो प्रस्तावित है, लेकिन समयसीमा पूरी न होने की स्थिति में क्या होगा, इस पर विधेयक में स्पष्ट प्रावधान नहीं बताया गया है।

इसी तरह तीन महीने में ट्रायल पूरा करने की समयसीमा को लेकर भी कानूनी और व्यावहारिक चुनौतियों पर सवाल उठाए गए हैं।

सदन में खड़गे के बयान पर भी हंगामा

पेपर लीक पर बोलते हुए खड़गे ने शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के प्रदर्शन और पाठ्यक्रम से जुड़े कई मुद्दे उठाए। इसी दौरान उन्होंने मनुस्मृति और शूद्रों से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख किया, जिस पर सदन में हंगामा हुआ।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खड़गे के बयान पर आपत्ति जताते हुए उन्हें तथ्यों और तर्क के साथ बात रखने को कहा। सभापति ने खड़गे की मनुस्मृति से जुड़ी टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया।

राज्यसभा में असंसदीय या आपत्तिजनक माने जाने वाले शब्दों और टिप्पणियों को सभापति के आदेश पर रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है।

2026 का NEET विवाद बना बड़ी पृष्ठभूमि

पेपर लीक कानून में संशोधन की तत्काल पृष्ठभूमि में इस साल की NEET परीक्षा से जुड़ा विवाद भी महत्वपूर्ण है। PRS के अनुसार, NEET 2026 को मई में रद्द कर अगले महीने दोबारा आयोजित किया गया था, जिसे कथित पेपर लीक से जोड़ा गया। इसी व्यापक परीक्षा विवाद के बीच सरकार ने मौजूदा कानून को और सख्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

अब नजर राज्यसभा की कार्यवाही और विधेयक पर होने वाली अंतिम चर्चा पर है। सरकार इसे परीक्षा व्यवस्था में कठोर सजा और तेज न्याय की दिशा में कदम बता रही है, जबकि विपक्ष का सवाल है कि कानून सख्त होने के साथ पेपर लीक रोकने की वास्तविक व्यवस्था और जवाबदेही कितनी मजबूत होगी।