भोपाल: डिजिटल अरेस्ट के जरिए 68.49 लाख की ठगी, राजस्थान से दो और आरोपी गिरफ्तार, कुल 10 हिरासत में

भोपाल में डिजिटल अरेस्ट के जरिए रिटायर्ड नेवी कमांडर से 68.49 लाख रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने राजस्थान के बीकानेर से दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया, अब तक कुल 10 आरोपी पकड़े जा चुके हैं। ठगों ने पीड़ित को फर्जी जांच के नाम पर 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया और रकम ट्रांसफर करवाई। भोपाल पुलिस ने 4.99 लाख रुपये पीड़ित को वापस कराए और 10 लाख रुपये आरोपियों के खातों में फ्रीज किए, साथ ही लोगों से फर्जी कॉल्स से सावधान रहने की अपील की।

भोपाल: डिजिटल अरेस्ट के जरिए 68.49 लाख की ठगी, राजस्थान से दो और आरोपी गिरफ्तार, कुल 10 हिरासत में

भोपाल, 16 अप्रैल 2025: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में डिजिटल अरेस्ट के जरिए एक रिटायर्ड नेवी कमांडर से 68.49 लाख रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। भोपाल साइबर क्राइम पुलिस ने राजस्थान के बीकानेर से दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसके साथ इस मामले में अब तक कुल 10 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। यह घटना शहर में साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, जहां ठग नए-नए तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।

पिछले साल, भोपाल में रहने वाले एक रिटायर्ड नेवी कमांडर को साइबर ठगों ने अपने निशाने पर लिया। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को फोन किया। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए किया गया है और उनके खिलाफ जांच चल रही है। डर और दबाव में आए पीड़ित को 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया, इस दौरान उन्हें सोने तक की अनुमति नहीं दी गई। ठगों ने इस मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाकर पीड़ित से 68.49 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

पुलिस की कार्रवाई

भोपाल साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू की। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) योगेश देशमुख के निर्देश पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि ठगी की रकम को कई फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था, जिनमें से कुछ राजस्थान के बीकानेर से संचालित हो रहे थे। 

पुलिस ने बीकानेर में छापेमारी कर दो आरोपियों को हिरासत में लिया। इनके पास से ठगी से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल फोन और बैंक खातों की जानकारी बरामद की गई है। इससे पहले, पुलिस ने इस मामले में 8 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से कुछ का संबंध बिहार, राजस्थान और दक्षिण भारत से था। पुलिस ने पीड़ित को 4.99 लाख रुपये वापस कराए हैं और 10 लाख रुपये की राशि आरोपियों के खातों में फ्रीज कर दी गई है।

डिजिटल अरेस्ट: ठगी का नया हथियार

डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका बनकर उभरा है। इसमें ठग फोन या वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। वे पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या अन्य गंभीर अपराधों में फंसाने की धमकी देकर डराते हैं। पीड़ित को घर में ही 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर बंधक बनाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। 
भोपाल में पिछले डेढ़ साल में डिजिटल अरेस्ट के 50 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें करीब 17 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। पुलिस के अनुसार, पढ़े-लिखे और मोबाइल का अधिक उपयोग करने वाले लोग इस तरह की ठगी का आसान शिकार बन रहे हैं।

पुलिस की अपील

भोपाल पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्रा ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के फर्जी कॉल्स से सावधान रहें। उन्होंने कहा, "कोई भी जांच एजेंसी फोन पर डराने-धमकाने का काम नहीं करती। अगर आपको ऐसा कॉल आए, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।" 
पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि संदिग्ध कॉल्स पर अपनी निजी जानकारी, जैसे बैंक खाता विवरण या आधार नंबर, साझा न करें। साथ ही, किसी भी अज्ञात ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी जांच कर लें।

साइबर जागरूकता अभियान

मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर साइबर जागरूकता अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हर जिले में साइबर थाना और साइबर डेस्क स्थापित करने का ऐलान किया है। इसके अलावा, साइबर हेल्पलाइन 1930 को और प्रभावी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 

आगे की जांच

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस ठगी के नेटवर्क का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गिरोह के तार अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हैं।