हरियाणा की 17 हजार आशा वर्करों को नौकरी पक्की होने की उम्मीद, कोर्ट के आदेशों से बढ़ी राहत
21 साल की सेवा के बाद आशा वर्करों की नौकरी पक्की होने की दिशा में बड़ा संकेत कोर्ट के आदेशों से बढ़ी उम्मीद हरियाणा में वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत लगभग 17 हजार आशा वर्करों के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के हालिया आदेशों ने नई उम्मीद जगा दी है। इन आदेशों के बाद अब लंबे समय से सेवा दे रही आशा वर्करों के नियमितीकरण की संभावना मजबूत होती दिख रही है।
21 वर्षों से दे रही हैं सेवाएं
राज्य में करीब 20 हजार आशा वर्कर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत काम कर रही हैं। इनमें से लगभग 17 हजार वर्कर 10 वर्ष से अधिक समय से सेवाएं दे रही हैं। कई आशा वर्कर पिछले 21 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रही हैं।
यूनियन ने सरकार से की मांग
आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर मांग रखी कि लंबे समय से कार्यरत वर्करों को स्थायी किया जाए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा व अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाएं। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला भी दिया।
हाई कोर्ट के फैसले से मिला आधार
हाल ही में हाई कोर्ट ने संविदा कर्मचारियों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए कहा था कि सरकार संविदा व्यवस्था की आड़ में कर्मचारियों का अनिश्चितकाल तक शोषण नहीं कर सकती। इस फैसले को आशा वर्करों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदर्शन स्थगित, बातचीत जारी
स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के बाद फिलहाल आशा वर्करों ने अपने आंदोलन को स्थगित कर दिया है और सरकार के सकारात्मक निर्णय का इंतजार कर रही हैं।
भविष्य पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे तय होगा कि वर्षों से सेवाएं दे रही आशा वर्करों को स्थायी नौकरी का लाभ कब तक मिल पाएगा।
news desk MPcg