एयर इंडिया और इंडिगो की बड़ी कटौती, महंगे जेट फ्यूल के चलते सैकड़ों घरेलू उड़ानें कम होंगी
जेट फ्यूल महंगा होने से विमानन सेक्टर पर दबाव, यात्रियों पर भी पड़ सकता है असर एयर इंडिया का बड़ा फैसला टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया ने जून से अगस्त 2026 के बीच अपनी घरेलू उड़ानों में लगभग 800 फ्लाइट्स प्रति सप्ताह की कटौती करने का निर्णय लिया है। कंपनी के अनुसार यह कदम बढ़ती ऑपरेशनल कॉस्ट और जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल के कारण उठाया गया है।
इंडिगो भी घटा सकती है उड़ानें
रिपोर्ट्स के अनुसार देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो भी अपनी घरेलू उड़ानों में लगभग 5% से 7% तक की कटौती करने की तैयारी में है। इससे आने वाले महीनों में घरेलू हवाई यात्रा की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
बढ़ती लागत बनी मुख्य वजह
एविएशन सेक्टर में जेट फ्यूल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे एयरलाइंस की कुल ऑपरेशनल लागत पर भारी असर पड़ा है। पहले जहां फ्यूल खर्च कुल लागत का लगभग 40% था, अब यह बढ़कर 60% तक पहुंच गया है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र प्रतिबंध और लंबे रूट्स के कारण भी एयरलाइंस की लागत बढ़ी है।
यात्रियों पर असर
उड़ानों में कटौती का सीधा असर यात्रियों पर पड़ सकता है। कम फ्लाइट्स और बढ़ती मांग के कारण हवाई किराए और अधिक महंगे होने की संभावना जताई जा रही है। पहले से ही कई रूट्स पर टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
बाजार में दबदबा
भारत के घरेलू एविएशन मार्केट में इंडिगो और एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी लगभग 90% है। ऐसे में दोनों कंपनियों के फ्लाइट कटौती के फैसले का असर पूरे सेक्टर पर पड़ना तय माना जा रहा है।
पहले भी हुई थीं कटौतियां
हाल ही में एयर इंडिया ने कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी उड़ानें कम या रद्द की थीं, जिससे कंपनी की लागत नियंत्रण रणनीति साफ दिखाई देती है।
आगे क्या
एयरलाइंस का कहना है कि जैसे ही बाजार की स्थिति और फ्यूल कीमतें स्थिर होंगी, उड़ानों की संख्या फिर से बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल पूरा विमानन सेक्टर लागत दबाव से गुजर रहा है।
news desk MPcg