बिहार में सरकारी टेंडर डालना हुआ महंगा, ई-प्रोक्योरमेंट शुल्क बढ़ा, ठेकेदारों पर बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ

बिहार में सरकारी टेंडर डालना हुआ महंगा, ई-प्रोक्योरमेंट शुल्क बढ़ा, ठेकेदारों पर बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ

बिहार सरकार ने राज्य में लागू ई-प्रोक्योरमेंट (ई-क्रय 2.0) प्रणाली के तहत निविदा (टेंडर) शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब सरकारी टेंडर में भाग लेने वाले ठेकेदारों और एजेंसियों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य निविदा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और तेज बनाना है।

नई अधिसूचना के अनुसार टेंडर प्रोसेसिंग फीस (TPF) में संशोधन किया गया है। अब 70 लाख रुपये तक की निविदा पर 1,000 रुपये, 70 लाख से 3 करोड़ रुपये तक की निविदा पर 5,000 रुपये, जबकि 3 करोड़ रुपये से अधिक की निविदा पर 10,000 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा। इन सभी शुल्कों पर लागू कर (टैक्स) अलग से जोड़ा जाएगा।

सरकार ने केवल प्रोसेसिंग फीस ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के निविदाकारों के पंजीकरण शुल्क में भी बदलाव किया है। नए नियमों के तहत राष्ट्रीय स्तर के निविदाकारों के लिए नया पंजीकरण शुल्क 2,000 रुपये और नवीकरण शुल्क 1,000 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर के निविदाकारों के लिए पंजीकरण शुल्क 15,000 रुपये और नवीकरण शुल्क 5,000 रुपये तय किया गया है।

सरकार का कहना है कि नई शुल्क व्यवस्था से ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा, जिससे निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी परियोजनाओं के निष्पादन में तेजी आएगी। साथ ही तकनीकी ढांचे को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

हालांकि, इस फैसले के बाद छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। कई ठेकेदारों का मानना है कि बढ़े हुए शुल्क से छोटे कारोबारियों की भागीदारी प्रभावित हो सकती है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक सुधार की दिशा में आवश्यक कदम बता रही है।

नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही बिहार में सरकारी टेंडर प्रक्रिया की लागत बढ़ गई है और अब सभी विभागों, निगमों, बोर्डों तथा निकायों में इसी संशोधित शुल्क संरचना के अनुसार निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी।