NEET UG री-टेस्ट से पहले Telegram बैन पर X (ट्विटर) पर बवाल, IIT कानपुर निदेशक, एथिकल हैकर और छात्र में तीखी बहस

NEET UG री-टेस्ट से पहले Telegram बैन पर X (ट्विटर) पर बवाल, IIT कानपुर निदेशक, एथिकल हैकर और छात्र में तीखी बहस

कानपुर/नई दिल्ली: NEET UG री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम ऐप पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बहस में एक तरफ Manindra Agrawal हैं, जबकि दूसरी ओर एथिकल हैकर Nisarg Adhikari और छात्र Sarthak Siddhant आमने-सामने आ गए हैं।

टेलीग्राम बैन का कारण

21 जून को होने वाले NEET UG री-एग्जाम से पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पेपर लीक और उससे जुड़ी अफवाहों को रोकने के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य परीक्षा से जुड़ी गलत और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकना है।

IIT निदेशक का पक्ष

IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि समस्या सिर्फ पेपर लीक नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी झूठी और भ्रामक खबरों का तेजी से फैलना भी एक बड़ा खतरा है।

उनके अनुसार, ऐसे मैसेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होकर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं और छात्रों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा करते हैं।

एथिकल हैकर का विरोध

निसर्ग अधिकारी ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि टेलीग्राम को पूरी तरह रोकना व्यावहारिक समाधान नहीं है। उनके अनुसार, यह ऐप प्रॉक्सी और अन्य तरीकों से आसानी से एक्सेस किया जा सकता है, इसलिए इसे ब्लॉक करने से समस्या का वास्तविक समाधान नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि असली समस्या सिस्टम में मौजूद कमजोरियों की है, न कि सिर्फ एक ऐप की।

छात्र ने उठाए सवाल

छात्र सार्थक सिद्धांत ने भी इस बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि अगर किसी प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी फैल सकती है तो क्या उसे बंद करना सही समाधान है? उन्होंने सवाल उठाया कि फिर क्या व्हाट्सएप या X जैसे प्लेटफॉर्म भी बंद किए जाएंगे, क्योंकि वहां भी गलत जानकारी फैलती है।

उनका कहना था कि इस तरह के प्रतिबंध डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करते हैं।

IIT निदेशक और छात्र के बीच बहस

बहस उस समय और तेज हो गई जब IIT निदेशक ने कहा कि टेलीग्राम में कुछ संदेश बिना स्पष्ट ट्रैक के एडिट किए जा सकते हैं, जिससे फेक जानकारी फैल सकती है।

इसके जवाब में सार्थक ने स्क्रीनशॉट साझा करते हुए दावा किया कि टेलीग्राम में एडिट किए गए मैसेज पर “Edited” का संकेत दिखाई देता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।

बहस का बढ़ता दायरा

यह विवाद अब केवल NEET परीक्षा या टेलीग्राम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बड़ा सवाल बन गया है कि—

क्या किसी ऐप को बैन करना सही उपाय है?
या फिर सिस्टम में सुधार और निगरानी जरूरी है?
क्या फेक न्यूज रोकने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध समाधान है या समस्या का नया रूप?
साइबर सुरक्षा और डिजिटल नीति पर बहस

इस पूरी बहस ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा, परीक्षा पारदर्शिता और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे मुद्दों पर और भी गंभीर बहस देखने को मिल सकती है।