दिल्ली HC में NEET-UG पेपर लीक केस पर बड़ा विवाद, केंद्र का दावा Telegram अपराधियों और आतंकियों का अड्डा

दिल्ली HC में NEET-UG पेपर लीक केस पर बड़ा विवाद, केंद्र का दावा Telegram अपराधियों और आतंकियों का अड्डा

NEET-UG परीक्षा विवाद से जुड़े एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Telegram को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की है। सरकार ने आरोप लगाया कि Telegram का इस्तेमाल परीक्षा लीक सामग्री फैलाने समेत कई अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

यह मामला 21 जून को होने वाली NEET-UG की दोबारा परीक्षा से पहले सामने आया है, जिसमें पेपर लीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को लेकर गंभीर बहस चल रही है।

केंद्र सरकार का बड़ा दावा

केंद्र सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि Telegram एक ऐसा इकोसिस्टम बनाता है, जो:

मिरर चैनलों के जरिए ऑटोमैटिक रीडायरेक्शन की सुविधा देता है
यूजरनेम आधारित पहचान की वजह से निगरानी कठिन बनाता है
बड़ी फाइलों को आसानी से शेयर करने की अनुमति देता है

सरकार के अनुसार, इसी वजह से प्लेटफॉर्म का उपयोग परीक्षा लीक सामग्री को तेजी से फैलाने के लिए किया जा रहा है।

“बेकाबू और खतरनाक प्लेटफॉर्म” बताया गया

अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ने अदालत में Telegram पर रोक के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि यह प्लेटफॉर्म अपनी संरचना के कारण “बेकाबू और खतरनाक” बन चुका है।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि देश ऐसे प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग पर रोक लगाने में सक्षम नहीं है, तो यह गंभीर चुनौती बन सकती है।

“अपराधियों और आतंकियों का अड्डा” वाला बयान

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने Telegram को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह प्लेटफॉर्म:

अपराधियों के लिए सुविधाजनक माध्यम बन चुका है
आतंकवादी गतिविधियों में भी इसका उपयोग होता है
अवैध सूचनाओं के प्रसार में यह बड़ी भूमिका निभा रहा है
कोर्ट में लंबी बहस, फैसला सुरक्षित

दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले पर केंद्र सरकार और Telegram की ओर से लंबी बहस हुई। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वह इस पर अपना निर्णय बाद में सुनाएगी।

NEET-UG विवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सवाल

यह मामला केवल परीक्षा लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और साइबर सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे मामलों में कड़े नियम और निगरानी व्यवस्था की जरूरत और बढ़ सकती है।

फिलहाल सभी की नजरें अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।