ईरान तनाव के बीच तेल कंपनियों की बल्ले-बल्ले, दुनिया महंगाई से परेशान तो 6 बड़ी कंपनियों ने कमाया अरबों डॉलर
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर देखने को मिला। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर बढ़े खतरे के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा। कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ, माल ढुलाई की लागत बढ़ी और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिला।
लेकिन जहां दुनिया महंगाई से जूझ रही थी, वहीं बड़ी तेल कंपनियों के लिए यह संकट कमाई का बड़ा मौका बन गया। दूसरी तिमाही के नतीजों में दुनिया की छह बड़ी तेल कंपनियों ने रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब भी युद्ध या तनाव के कारण तेल की सप्लाई पर खतरा बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ते हैं और इसका फायदा तेल उत्पादन व बिक्री करने वाली कंपनियों को मिलता है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान सबसे ज्यादा नजर होर्मुज स्ट्रेट पर रही। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है। यहां किसी भी तरह की रुकावट की आशंका से बाजार में हलचल बढ़ गई और कीमतों में तेजी देखने को मिली।
वहीं, पिछले 24 घंटे में ईरान तनाव से जुड़े कई बड़े अपडेट सामने आए हैं। यमन के पास लाल सागर में भारतीय झंडे वाले कारोबारी जहाज पर हमले की खबर सामने आई, हालांकि जहाज में सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को हटाने की तैयारी की खबरों ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। कुछ ईरानी सांसदों की ओर से उनके खिलाफ महाभियोग की तैयारी की बात सामने आई है। आरोप है कि अमेरिका के साथ बातचीत और संभावित समझौते से देश के हितों को नुकसान पहुंचा है।
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा, विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों में अब सुरक्षा संस्थानों का प्रभाव बढ़ने की बात कही जा रही है।
वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी देखने को मिली। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों के बाद तेल बाजार में कुछ राहत आई।
ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बातचीत चलने की खबरें हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जहाजों की निगरानी और आवाजाही के लिए नए नियम बनाए जाने की चर्चा है। अमेरिका की कोशिश है कि यह अहम समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला रहे, ताकि वैश्विक तेल और गैस सप्लाई प्रभावित न हो।
हालांकि, ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका की धमकियों और हस्तक्षेप के कारण बातचीत प्रभावित हो रही है। वहीं अमेरिका लगातार कह रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना उसकी प्राथमिकता है।
कुल मिलाकर ईरान-अमेरिका तनाव ने जहां पूरी दुनिया में महंगाई की चिंता बढ़ाई है, वहीं तेल कंपनियों के लिए यह दौर भारी मुनाफे वाला साबित हुआ है।
news desk MPcg