जुकरबर्ग से 3 दिन में माफी की मांग, Meta विवाद पर सरकार सख्त

जुकरबर्ग से 3 दिन में माफी की मांग, Meta विवाद पर सरकार सख्त

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया वीडियो को हटाए जाने के मामले में Meta की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस मामले को लेकर संसदीय समिति ने Meta प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के अंदर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। समिति ने साफ किया है कि अगर तय समय में जवाब नहीं दिया गया तो कंपनी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई 2026 को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में उन्होंने पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर बात करते हुए कड़े कदम उठाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही थी। पोस्ट किए जाने के कुछ समय बाद यह वीडियो फेसबुक से हटा दिया गया था।

बाद में Meta की ओर से वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया गया और कंपनी ने इसे तकनीकी समस्या बताते हुए सफाई दी थी। Meta ने कहा था कि पोस्ट गलती से हट गई थी, लेकिन सरकार और संसदीय समिति ने इस जवाब को पर्याप्त नहीं माना।

संसदीय समिति ने Meta से मांगा जवाब

मेटा के प्रतिनिधि आईटी मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने पेश हुए थे। इस दौरान सांसदों ने कंपनी की कंटेंट मॉडरेशन नीति, एल्गोरिद्म और प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री को लेकर कई सवाल उठाए।

समिति ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सही और महत्वपूर्ण सामग्री बिना उचित कारण के हटाई न जाए। साथ ही आपत्तिजनक सामग्री को रोकने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।

कानूनी सुरक्षा हटाने की चेतावनी

संसदीय समिति ने मार्क जुकरबर्ग से माफी की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के अंदर जवाब नहीं दिया गया तो Meta को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और छूट पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को कुछ परिस्थितियों में कानूनी जिम्मेदारी से सुरक्षा मिलती है। समिति ने संकेत दिया है कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में इस सुरक्षा को हटाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

IT मंत्रालय और Meta के बीच बैठक

इस पूरे विवाद को लेकर IT मंत्रालय और Meta अधिकारियों के बीच दिल्ली में दो दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने Meta की ग्लोबल टीम को भी चर्चा के लिए बुलाया है।

बैठक में यह जांच की जा रही है कि Meta भारतीय कानूनों का पालन किस तरह कर रही है और उसके कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में क्या कमियां हैं। इसके अलावा VIP अकाउंट सुरक्षा, WhatsApp की नई यूजरनेम पॉलिसी और Instagram पर आपत्तिजनक कंटेंट से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।

VIP अकाउंट सुरक्षा पर भी उठे सवाल

आईटी मंत्रालय ने Meta से यह भी जवाब मांगा है कि बड़े और महत्वपूर्ण अकाउंट्स की सुरक्षा के लिए बनाए गए सिस्टम कैसे काम करते हैं। सरकार यह जानना चाहती है कि प्रधानमंत्री जैसे हाई-प्रोफाइल अकाउंट से जुड़ी सामग्री हटने जैसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए कंपनी के पास क्या व्यवस्था है।

इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट और अन्य संवेदनशील सामग्री को लेकर भी कंपनी से जानकारी मांगी गई है।

Meta पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Meta पहले भी कंटेंट मॉडरेशन और एल्गोरिद्म को लेकर आलोचनाओं का सामना करती रही है। भारत में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और नियमों को लेकर सरकार लगातार सख्ती दिखाती रही है।

इस मामले को सिर्फ एक वीडियो हटाने का विवाद नहीं बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी और भारतीय कानूनों के पालन से जोड़कर देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर Meta और मार्क जुकरबर्ग की प्रतिक्रिया पर है। अगर कंपनी संसदीय समिति और सरकार की चिंताओं को दूर नहीं कर पाती है तो भारत में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नियम और ज्यादा सख्त किए जा सकते हैं।

इस पूरे विवाद का असर आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नीतियों, कंटेंट मॉडरेशन और यूजर्स की सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर पड़ सकता है।