हापुड़ के किसानों को बड़ी सौगात जून के अंत से विदेशों में शुरू होगा सब्जियों का निर्यात, क्लस्टर मॉडल से बढ़ेगी आय
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के किसानों के लिए एक बड़ी आर्थिक राहत और अवसर की खबर सामने आई है। शासन स्तर से जिले की सब्जियों को किसान क्लस्टर के माध्यम से विदेशों में निर्यात करने की योजना को मंजूरी दे दी गई है। इस पहल से हजारों किसानों की आय में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
जून के अंत से शुरू होगा निर्यात
अधिकारियों के अनुसार, जून 2026 के अंतिम सप्ताह से हापुड़ की हरी सब्जियों का निर्यात विदेशों में शुरू किया जाएगा। इसके लिए एक्सपोर्टर और किसान क्लस्टर के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए संबंधित विभाग जल्द बैठक आयोजित करेगा।
क्लस्टर मॉडल क्या है
इस योजना के तहत किसानों को एक समूह (क्लस्टर) में जोड़ा जाता है, जिसमें कम से कम 50 हेक्टेयर भूमि का उत्पादन क्षेत्र शामिल होता है। हापुड़ में आरंभशील किसान उत्पादक संगठन (FPO) के अध्यक्ष हर्ष त्यागी द्वारा 52.33 हेक्टेयर क्षेत्र में एक क्लस्टर तैयार किया गया है।
किन किसानों को होगा फायदा
इस योजना से जिले के 27,000 से अधिक किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से मंडियों में उचित दाम न मिलने की समस्या झेल रहे किसानों को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे उनकी आय में सुधार होगा।
किन फसलों का होगा निर्यात
हापुड़ और गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र पहले से ही हरी मिर्च, लौकी, तोरई और इंग्लिश गाजर जैसे सब्जी उत्पादन के लिए जाना जाता है। इन उत्पादों को अब वैश्विक बाजार में पहचान मिलने की संभावना है।
किसानों को मिलेगी नई आर्थिक मजबूती
अभी तक किसानों को स्थानीय मंडियों में उतार-चढ़ाव वाले दामों के कारण कई बार नुकसान उठाना पड़ता था। क्लस्टर आधारित निर्यात व्यवस्था से उन्हें स्थिर और बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
सरकार की पहल का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, बिचौलियों पर निर्भरता कम करना और कृषि उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।
news desk MPcg