राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपी अविनाश शुक्ला के कमरे से 'रामराज्य कोष' लिखा संदूक बरामद, QR कोड मिलने से जांच का दायरा बढ़ा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आरोपी अविनाश शुक्ला के कमरे से 'रामराज्य कोष' लिखा संदूक बरामद, QR कोड मिलने से जांच का दायरा बढ़ा


अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने आरोपी अविनाश शुक्ला के कथित ठिकाने से एक लोहे का संदूक बरामद किया है, जिस पर "रामराज्य कोष" लिखा हुआ है। संदूक पर एक डिजिटल भुगतान (QR) कोड भी लगा मिला है। बरामदगी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

इस बीच, SIT चोरी के पैसों की रिकवरी, डिजिटल लेन-देन, बैंक खातों और आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच कर रही है। मामले में अब तक करीब 80 लाख रुपये की बरामदगी का दावा किया गया है, जबकि जांच अभी जारी है।

क्या मिला आरोपी के कमरे से?

SIT की तलाशी के दौरान आरोपी अविनाश शुक्ला के कमरे से एक संदूक बरामद हुआ, जिस पर "रामराज्य कोष" लिखा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि संदूक पर QR कोड भी चिपका हुआ मिला, जिससे डिजिटल माध्यम से धन एकत्र किए जाने की संभावना की भी जांच की जा रही है।

फिलहाल पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि—

QR कोड किस बैंक खाते या भुगतान मंच से जुड़ा था।
उसके माध्यम से कोई लेन-देन हुआ या नहीं।
बरामद संदूक का कथित चोरी से क्या प्रत्यक्ष संबंध है।

इन सभी पहलुओं की जांच जारी है।

चोरी के मामले की जांच कहां तक पहुंची?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच पिछले कई सप्ताह से जारी है। पुलिस और SIT आरोपियों से जेल में पूछताछ कर रही है, जबकि उनके ठिकानों पर लगातार छापेमारी भी की जा रही है।

जांच एजेंसियां निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दे रही हैं—

चोरी की कुल राशि का वास्तविक आकलन।
बरामद नकदी और उसके स्रोत का सत्यापन।
डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच।
आरोपियों की संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण।
कथित चोरी में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका।
80 लाख रुपये तक की बरामदगी का दावा

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अब तक विभिन्न स्थानों से करीब 80 लाख रुपये की नकदी बरामद किए जाने का दावा किया गया है।

हालांकि, पुलिस ने अभी तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है कि बरामद पूरी राशि सीधे मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी है या नहीं। इसकी पुष्टि फॉरेंसिक और वित्तीय जांच के बाद ही होगी।

योगाचार्य ने क्या कहा?

श्याम साधनालय की योगाचार्य सीमा तिवारी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि आरोपी अविनाश शुक्ला पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से अयोध्या में रह रहे थे और राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय थे।

उन्होंने यह भी कहा कि अविनाश का परिचय योग गुरु डॉ. चैतन्य और उनके भाई अभिषेक के माध्यम से हुआ था।

हालांकि, ये व्यक्तिगत बयान हैं और पुलिस ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

प्रत्यक्षदर्शी का दावा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर से जुड़े एक सेवादार सुंदरलाल ने दावा किया कि 5 जून को पुलिस अविनाश शुक्ला को उसके किराये के मकान पर लेकर गई थी।

उनके अनुसार, वहां से एक बैग बरामद किया गया जिसमें कुछ नकदी मौजूद थी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें बाहर भेज दिया और आरोपी को अपने साथ ले गई।

इस दावे की भी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस ने इस संबंध में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।

जेल में आठों आरोपी, सुरक्षा बढ़ाई गई

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपी फिलहाल जिला कारागार में न्यायिक हिरासत में हैं।

जेल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से सभी आरोपियों की निगरानी बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार—

आरोपियों को अलग-अलग निगरानी में रखा गया है।
उन्हें एक-दूसरे से मिलने से रोकने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
बैरकों के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई है।

जेल प्रशासन ने आरोपियों के बीच विवाद की चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

परिजनों से सीमित मुलाकात

जेल सूत्रों के अनुसार, न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद आरोपियों से उनके परिजनों ने अब तक केवल एक बार मुलाकात की है।

जेल नियमों के तहत विचाराधीन बंदियों को सप्ताह में निर्धारित संख्या में मुलाकात और सत्यापित मोबाइल नंबरों पर बातचीत की सुविधा मिल सकती है। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार आरोपियों ने अब तक फोन पर बातचीत की इच्छा व्यक्त नहीं की है।

SIT को मिला अतिरिक्त समय

मामले की गंभीरता और व्यापक जांच को देखते हुए संबंधित न्यायालय ने SIT को जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया है।

अब विशेष जांच टीम को 15 जुलाई 2026 तक अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। इस अवधि में वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड, बरामद नकदी और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच पूरी की जाएगी।

जांच के प्रमुख बिंदु

SIT फिलहाल निम्नलिखित पहलुओं की जांच कर रही है—

मंदिर के चढ़ावे से कथित तौर पर कितनी राशि गायब हुई।
चोरी का कथित नेटवर्क कितना बड़ा था।
QR कोड और डिजिटल भुगतान प्रणाली का वास्तविक उद्देश्य क्या था।
बरामद नकदी का स्रोत क्या है।
क्या किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका भी सामने आती है।
अभी क्या स्थिति है?
आरोपी अविनाश शुक्ला के कमरे से "रामराज्य कोष" लिखा संदूक बरामद हुआ है।
संदूक पर QR कोड मिलने के बाद डिजिटल लेन-देन की जांच शुरू की गई है।
मामले में अब तक करीब 80 लाख रुपये की बरामदगी का दावा किया गया है।
सभी आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
SIT को जांच पूरी करने के लिए 15 जुलाई तक का समय मिला है।
मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों तथा SIT की रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएंगे।