रीवा में विकास की हकीकत उजागर: सड़क नहीं होने से 2 किमी खाट पर ढोकर ले जाई गई महिला, एंबुलेंस नहीं पहुंची, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत

रीवा में विकास की हकीकत उजागर: सड़क नहीं होने से 2 किमी खाट पर ढोकर ले जाई गई महिला, एंबुलेंस नहीं पहुंची, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत नदना डिहिया से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है।

यहां सड़क संपर्क न होने के कारण एक गंभीर रूप से घायल आदिवासी महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी और उसकी मौत हो गई।

बिजली गिरने से गंभीर रूप से झुलसी थी महिला

घटना रविवार देर शाम की बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, रामकली रावत (पति स्व. राम स्वयंवर रावत) पर आकाशीय बिजली गिर गई थी। हादसे में वह गंभीर रूप से झुलस गईं, लेकिन घटना के तुरंत बाद भी वह जीवित थीं और उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने की आवश्यकता थी।

परिजनों और ग्रामीणों ने तुरंत एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क न होने और कच्चे, कीचड़ भरे रास्ते के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका।

एंबुलेंस नहीं पहुंची तो खाट पर 2 किलोमीटर का सफर

स्थिति बिगड़ती देख ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाया और लगभग 2 किलोमीटर तक दलदल, कीचड़ और जलभराव से भरे कच्चे रास्ते पर पैदल कंधों पर उठाकर अस्पताल की ओर ले जाने का प्रयास किया।

ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते में कई जगह जमीन इतनी खराब थी कि चलना बेहद मुश्किल हो गया था। कीचड़ और फिसलन के कारण लोगों को बार-बार रुकना पड़ा।

इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई, लेकिन कोई भी पक्की सड़क या वाहन उपलब्ध न होने के कारण समय पर इलाज संभव नहीं हो सका।

अस्पताल पहुंचने से पहले हुई मौत

ग्रामीण किसी तरह महिला को अस्पताल तक लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि एंबुलेंस समय पर गांव पहुंच जाती या सड़क सुविधा होती, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।

5 लाख की स्वीकृति, फिर भी सड़क अधूरी

ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि इस मार्ग के लिए विधायक निधि से करीब 5 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन वर्षों बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ या अधूरा छोड़ दिया गया।

गांव में आज भी हालात ऐसे हैं कि बारिश या आपात स्थिति में लोग पैदल भी आसानी से आवाजाही नहीं कर सकते। यह स्थिति पूरे क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की कमी को दर्शाती है।

वीडियो वायरल, ग्रामीणों में आक्रोश

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें ग्रामीणों को खाट पर महिला को कीचड़ भरे रास्ते से ले जाते हुए देखा जा सकता है।

वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकारें गांव-गांव तक विकास पहुंचाने का दावा करती हैं, तो फिर ऐसी स्थिति क्यों बनी हुई है।

आपातकालीन सेवाएं भी नाकाम

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में न तो एंबुलेंस की नियमित पहुंच है और न ही वैकल्पिक आपातकालीन व्यवस्था। बारिश के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जिससे कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पाता।

स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले भी इस इलाके में ऐसी समस्याएं सामने आती रही हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।

प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क निर्माण योजनाओं और सरकारी निधि के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोगों का कहना है कि विकास योजनाएं कागजों पर पूरी दिखती हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति बिल्कुल अलग है।

जांच और कार्रवाई की मांग तेज

घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में लापरवाही की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही गांव में तत्काल सड़क निर्माण, एंबुलेंस पहुंच व्यवस्था और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।

निष्कर्ष

रीवा की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में बुनियादी सुविधाओं की कमी, धीमी विकास प्रक्रिया और कमजोर आपातकालीन ढांचे की गंभीर तस्वीर पेश करती है, जहां समय पर मदद न मिलने से एक कीमती जान चली गई।