मध्य प्रदेश में नए राज्यपाल को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल: मंगुभाई पटेल का पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा, राष्ट्रपति के फैसले पर टिकीं निगाहें
मध्य प्रदेश के संवैधानिक और राजनीतिक परिदृश्य में इस समय राज्यपाल पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्यपाल मंगुभाई छगनभाई पटेल का संवैधानिक पांच वर्षीय कार्यकाल 7 जुलाई 2026 को पूरा हो रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति भवन की ओर से अभी तक न तो उनके कार्यकाल को बढ़ाने और न ही नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। ऐसे में प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में संभावित नियुक्ति को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
संविधान के प्रावधानों के अनुसार राज्यपाल का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लेकिन जब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हो जाती या वर्तमान राज्यपाल को पदमुक्त नहीं किया जाता, तब तक वे अपने उत्तराधिकारी के कार्यभार संभालने तक पद पर बने रह सकते हैं। इसलिए अंतिम निर्णय राष्ट्रपति की ओर से जारी अधिसूचना पर निर्भर करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिल्ली दौरे पर बढ़ी चर्चाएं
राज्यपाल के कार्यकाल की समाप्ति के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिल्ली दौरा भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री सोमवार को दिल्ली रवाना हो रहे हैं और उनके रात्रि विश्राम का कार्यक्रम भी राजधानी में निर्धारित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरान मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तथा केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर सकते हैं। चर्चाओं में यह भी शामिल है कि मध्य प्रदेश के नए राज्यपाल की नियुक्ति, संगठनात्मक विषयों तथा दतिया विधानसभा उपचुनाव सहित अन्य राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श हो सकता है।
हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।
कार्यकाल समाप्ति से पहले राज्यपाल से हुई महत्वपूर्ण मुलाकात
राज्यपाल के कार्यकाल की समाप्ति से ठीक पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 जून को भोपाल स्थित लोक भवन पहुंचकर मंगुभाई पटेल से शिष्टाचार भेंट की थी। इसके बाद 2 जुलाई को प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी राज्यपाल से मुलाकात की।
इन बैठकों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हुईं, हालांकि दोनों मुलाकातों को आधिकारिक तौर पर सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया गया।
दतिया उपचुनाव भी राजनीतिक समीकरणों का अहम हिस्सा
इसी बीच मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों इस सीट को प्रतिष्ठा का चुनाव मान रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के दौरान उपचुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवार के चयन और चुनावी रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि इस संबंध में भी पार्टी की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
2021 में संभाली थी मध्य प्रदेश के 19वें राज्यपाल की जिम्मेदारी
मंगुभाई छगनभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को मध्य प्रदेश के 19वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण की थी। उनकी नियुक्ति का आदेश 6 जुलाई 2021 को राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी किया गया था।
गुजरात से आने वाले मंगुभाई पटेल लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय नेता रहे हैं। वे गुजरात सरकार में मंत्री रह चुके हैं और वर्ष 2014 में गुजरात विधानसभा के कार्यकारी उपाध्यक्ष (Acting Speaker) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष रहा उनका फोकस
राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मंगुभाई पटेल ने विशेष रूप से जनजातीय विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन अभियान पर जोर दिया।
उन्होंने प्रदेश के कई आदिवासी बहुल जिलों का लगातार दौरा किया और जनजातीय समुदायों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, शिक्षा तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की।
विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया की पहचान, जांच और जागरूकता अभियान को लेकर उनके प्रयासों को काफी महत्व दिया गया। राज्य सरकार और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाकर इस दिशा में कई कार्यक्रम संचालित किए गए।
इसके अलावा उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में उच्च शिक्षा संस्थानों की नियमित समीक्षा, दीक्षांत समारोहों में भागीदारी तथा नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बल दिया।
संवैधानिक दायित्वों का किया निर्वहन
अपने कार्यकाल के दौरान मंगुभाई पटेल ने संविधान के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा पारित विभिन्न विधेयकों पर निर्णय लिए, विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्तियां कीं तथा संवैधानिक संस्थाओं के साथ समन्वय बनाए रखा।
उन्होंने विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों, राष्ट्रीय पर्वों, सामाजिक अभियानों और ग्रामीण विकास से जुड़े आयोजनों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
मध्य प्रदेश में राज्यपालों का हालिया इतिहास
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान राज्यपाल पद पर कई बदलाव हुए हैं।
आनंदीबेन पटेल ने 23 जनवरी 2018 से 29 जुलाई 2019 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।
इसके बाद लालजी टंडन ने 29 जुलाई 2019 से 30 जून 2020 तक राज्यपाल का पद संभाला।
लालजी टंडन के निधन के बाद 1 जुलाई 2020 से 7 जुलाई 2021 तक उत्तर प्रदेश की राज्यपाल रहते हुए आनंदीबेन पटेल ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला।
इसके बाद 8 जुलाई 2021 को मंगुभाई पटेल ने राज्यपाल पद की जिम्मेदारी संभाली।
पांच वर्ष का संवैधानिक कार्यकाल
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। हालांकि राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर बने रहते हैं। इसका अर्थ है कि पांच वर्ष पूरे होने के बाद भी वे तब तक पद पर बने रह सकते हैं, जब तक राष्ट्रपति उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं कर देते या उन्हें पदमुक्त नहीं किया जाता।
यही कारण है कि कार्यकाल पूरा होने के बावजूद राज्यपाल के पद पर तत्काल परिवर्तन होना आवश्यक नहीं होता।
क्या मिल सकता है कार्यकाल विस्तार?
राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मंगुभाई पटेल को कार्यकाल विस्तार मिलेगा या मध्य प्रदेश को नया राज्यपाल मिलेगा।
हालांकि अब तक राष्ट्रपति भवन, गृह मंत्रालय या केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए किसी भी संभावित नाम या नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
अब राष्ट्रपति भवन के फैसले का इंतजार
फिलहाल पूरे मामले में अंतिम निर्णय राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा। यदि नए राज्यपाल की नियुक्ति होती है तो जल्द ही शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वहीं यदि कार्यकाल विस्तार का निर्णय लिया जाता है तो मंगुभाई पटेल अपनी जिम्मेदारियां आगे भी निभाते रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी होने वाला निर्णय मध्य प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक हलकों के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा। तब तक प्रदेश की निगाहें केंद्र सरकार और राष्ट्रपति भवन के अगले आधिकारिक फैसले पर टिकी रहेंगी।
news desk MPcg