'अदालत को गुमराह किया': सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, CJI बोले- 'अगर यह अहंकार नहीं तो ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी बदलनी पड़ेगी'

'अदालत को गुमराह किया': सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, CJI बोले- 'अगर यह अहंकार नहीं तो ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी बदलनी पड़ेगी'

'इंडियाज गॉट लेटेंट' (India's Got Latent) शो से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्टैंड-अप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उन पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि समय रैना ने पहले दिए गए न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया और अदालत को गुमराह किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने "अदालत को हल्के में लिया" और उसके आदेशों का उल्लंघन किया।

यह मामला 'इंडियाज गॉट लेटेंट' शो में दिव्यांग व्यक्तियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों और उससे जुड़े कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन से संबंधित है। इसी मामले में अदालत ने अन्य चार कॉमेडियनों पर भी समान जुर्माना लगाया।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन भी शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा कि समय रैना ने अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया।

पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि अदालत को यह मानने का कारण है कि समय रैना ने "कोर्ट को हल्के में लिया" (Taken the Court for a Ride) और आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया। अदालत ने दो सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने और अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

पहले 10 लाख का प्रस्ताव, फिर 3 लाख का जुर्माना

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुरुआत में 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही थी। हालांकि, समय रैना के वकील द्वारा अंतिम अवसर देने की अपील के बाद अदालत ने राशि घटाकर 3 लाख रुपये कर दी। साथ ही चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक आदेशों का पालन नहीं हुआ तो और कड़ी कार्रवाई तथा भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।

मामला आखिर है क्या?

यह पूरा विवाद 'इंडियाज गॉट लेटेंट' शो में दिव्यांग व्यक्तियों पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। इस मामले में Cure SMA Foundation of India ने याचिका दायर की थी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियनों को निर्देश दिया था कि वे अपने मंच का उपयोग सकारात्मक सामाजिक उद्देश्य के लिए करें। अदालत ने उनसे कहा था कि वे नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित करें जिनमें दिव्यांग व्यक्तियों की प्रेरणादायक कहानियों को मंच मिले और दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए धन जुटाया जाए।

अनुपालन नहीं करने पर कोर्ट नाराज

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह, जो Cure SMA Foundation की ओर से पेश हुईं, ने अदालत को बताया कि समय रैना ने पहले दिए गए आश्वासन के बावजूद न तो फाउंडेशन से संपर्क किया और न ही दिव्यांग व्यक्तियों को अपने कार्यक्रमों में शामिल करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया।

उन्होंने अदालत को बताया कि समय रैना लगातार अपने शो कर रहे हैं, लेकिन न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अदालत ने उनके आचरण पर गंभीर नाराजगी जताई।

केंद्र सरकार ने भी उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी समय रैना के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि हाल के एक शो में समय रैना ने चल रही न्यायिक कार्यवाही पर अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए मजाक किया।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि शुरुआत में उन्होंने इस विषय को अदालत के समक्ष नहीं रखने का निर्णय लिया था, लेकिन जब यह सामने आया कि अदालत के पूर्व निर्देशों का भी पालन नहीं हुआ, तब यह मुद्दा उठाना आवश्यक हो गया।

"अगर यह अहंकार नहीं तो ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी बदलनी पड़ेगी"

समय रैना के वकील ने अदालत में दलील दी कि SMA Foundation से संपर्क न करने के पीछे किसी प्रकार का अहंकार नहीं था और वे अपने मुवक्किल को अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए प्रेरित करेंगे।

इस पर CJI सूर्यकांत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि विदेश में रहकर वे भारतीय कानून की पहुंच से बाहर हो जाते हैं।

उन्होंने टिप्पणी की,

"अगर यह अहंकार नहीं है, तो फिर हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी भी बदलनी पड़ेगी।"

अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में सम्मान पाने के लिए दूसरों का सम्मान करना आवश्यक है और किसी भी वर्ग का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।

किन-किन पर लगा जुर्माना?

सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना के अलावा विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठाक्कर और निशांत जगदीश तंवर पर भी 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत का कहना था कि सभी ने पूर्व निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने और अदालत के निर्देशों के अनुपालन से संबंधित हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो भविष्य में और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।