पहली ही राइड में खराब निकली Royal Enfield बाइक, कंज्यूमर कोर्ट ने कंपनी और डीलर पर लगाया ₹2.3 लाख से ज्यादा का जुर्माना
नई बाइक खरीदने के बाद अगर उसमें शुरुआत से ही गंभीर खराबियां सामने आएं, तो ग्राहक के अधिकारों की रक्षा के लिए उपभोक्ता कानून मौजूद हैं। केरल के त्रिशूर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऐसे ही एक मामले में रॉयल एनफील्ड और उसके अधिकृत डीलर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी और डीलर को ग्राहक को 2.3 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने का आदेश दिया है।
मामला एक नई रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल से जुड़ा है, जिसमें ग्राहक ने दावा किया था कि डिलीवरी के तुरंत बाद ही कई तकनीकी और निर्माण संबंधी खामियां सामने आ गई थीं। आयोग ने सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कंपनी और डीलर की जिम्मेदारी तय की।
नवंबर 2016 में खरीदी थी नई बाइक
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने नवंबर 2016 में रॉयल एनफील्ड की एक नई मोटरसाइकिल बुक की थी। कंपनी की बेहतर गुणवत्ता और भरोसे के आधार पर उसने बाइक खरीदने का फैसला किया। लोन सहित उसने करीब 1.32 लाख रुपये का भुगतान किया और 12 दिसंबर 2016 को उसे मोटरसाइकिल की डिलीवरी मिली।
ग्राहक के अनुसार, डिलीवरी के बाद जब उसने पहली टेस्ट राइड ली तो बाइक में कई समस्याएं महसूस हुईं। उसने आरोप लगाया कि नई बाइक होने के बावजूद उसमें ऐसी कमियां थीं, जो सामान्य रूप से पुराने वाहन में देखने को मिलती हैं।
पहली राइड में सामने आईं कई खामियां
ग्राहक ने आयोग को बताया कि बाइक में व्हील अलाइनमेंट की समस्या थी। इसके अलावा पेंट की गुणवत्ता खराब थी, व्हील ड्रम और साइलेंसर पर जंग के निशान दिखाई दिए। बाइक चलाते समय कंपन और अन्य तकनीकी परेशानियां भी महसूस हुईं।
ग्राहक को आशंका थी कि यह बाइक चेन्नई में आई बाढ़ से प्रभावित स्टॉक का हिस्सा हो सकती है। इसी वजह से उसने वाहन बदलने की मांग की, लेकिन डीलर ने बाइक बदलने से इनकार कर दिया।
डीलर की ओर से ग्राहक को भरोसा दिलाया गया कि पहली सर्विसिंग के दौरान समस्याओं को ठीक कर दिया जाएगा। हालांकि, ग्राहक इससे संतुष्ट नहीं हुआ और उसने पुलिस तथा आरटीओ में भी शिकायत की। समाधान नहीं मिलने के बाद उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
कंपनी और डीलर ने आरोपों से किया इनकार
सुनवाई के दौरान डीलर ने ग्राहक के आरोपों को खारिज किया। डीलर का कहना था कि वाहन डिलीवरी के समय पूरी तरह जांचा गया था और उसमें कोई खराबी नहीं थी।
कंपनी रॉयल एनफील्ड ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वारंटी नियमों के तहत कंपनी खराब पार्ट्स की मरम्मत या उन्हें बदलने के लिए जिम्मेदार है। कंपनी ने पूरी बाइक बदलने या खरीद राशि वापस करने की मांग को उचित नहीं माना।
विशेषज्ञ जांच रिपोर्ट बनी अहम आधार
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने एक स्वतंत्र विशेषज्ञ की जांच रिपोर्ट पर भरोसा किया। विशेषज्ञ ने केवल 508 किलोमीटर चली बाइक का निरीक्षण किया था।
जांच में बाइक में कई गंभीर कमियां सामने आईं। रिपोर्ट में व्हील मिसअलाइनमेंट, हैंडल में कंपन, कुछ पुर्जों के मुड़े होने, तेल रिसाव, जंग और पेंट खराब होने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया।
आयोग ने माना कि एक नई मोटरसाइकिल में इस तरह की खराबियां सामान्य नहीं हैं और इससे यह साबित होता है कि वाहन डिलीवरी के समय ही गुणवत्ता संबंधी समस्या से प्रभावित था।
प्री-डिलीवरी रिपोर्ट को आयोग ने नहीं माना पर्याप्त
डीलर ने अपनी प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन रिपोर्ट भी पेश की थी, लेकिन आयोग ने इसे पर्याप्त नहीं माना। आयोग ने कहा कि डीलर का आंतरिक रिकॉर्ड स्वतंत्र विशेषज्ञ की जांच रिपोर्ट को नजरअंदाज करने का आधार नहीं बन सकता।
पीठ ने कहा कि ग्राहक को नया वाहन खरीदने के बाद बेहतर गुणवत्ता और सुरक्षित संचालन का अधिकार है। यदि कोई वाहन शुरुआत से ही गंभीर कमियों के साथ दिया जाता है, तो यह सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आता है।
आयोग ने दिए ये आदेश
त्रिशूर उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष सी.टी. साबू और सदस्य श्रीजा एस. तथा राम मोहन आर. की पीठ ने कंपनी और डीलर को ग्राहक को मुआवजा देने का आदेश दिया।
आयोग के आदेश के अनुसार:
रॉयल एनफील्ड को बाइक की कीमत 1,13,573 रुपये वापस करने होंगे।
इस राशि पर 30 नवंबर 2016 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
डीलर को ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा।
कानूनी खर्च के रूप में कंपनी और डीलर को संयुक्त रूप से 20 हजार रुपये देने होंगे।
इस तरह कुल भुगतान राशि 2.3 लाख रुपये से अधिक हो गई है।
उपभोक्ता अधिकारों को लेकर अहम फैसला
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला नए वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया है कि कंपनियां और डीलर केवल बिक्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक को सही गुणवत्ता वाला उत्पाद मिले।
यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि यदि कोई नया वाहन खरीदने के बाद उसमें गंभीर खराबियां सामने आती हैं और कंपनी या डीलर उचित समाधान नहीं देते, तो ग्राहक उपभोक्ता कानून के तहत न्याय की मांग कर सकता है।
news desk MPcg