हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी पर सियासी घमासान: प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल, पूर्व कप्तान वीरेंन रास्क्विन्हा ने भी जताई नाराजगी

हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी पर सियासी घमासान: प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल, पूर्व कप्तान वीरेंन रास्क्विन्हा ने भी जताई नाराजगी

भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी अब खेल के मैदान से निकलकर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गई है। आगामी FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 से पहले Hockey India ने भारतीय पुरुष और महिला टीमों के लिए नई जर्सी पेश की है, जिसमें केसरिया रंग को प्रमुखता दी गई है। इसके बाद जर्सी के रंग को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छिड़ गई है।

कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi Vadra ने गुरुवार को नई जर्सी के रंग को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की पहचान अहिंसा, सच्चाई और भाईचारे जैसे मूल्यों से बनी है और इन्हें बदला नहीं जा सकता। प्रियंका ने जर्सी के रंग में बदलाव को इतिहास और देश की मूल पहचान से जुड़े व्यापक राजनीतिक मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

27 जुलाई को लॉन्च हुई नई जर्सी

नई जर्सी को 27 जुलाई 2026 को आगामी वर्ल्ड कप की तैयारी के बीच पेश किया गया। भारत की पुरुष और महिला दोनों सीनियर टीमों के लिए नया किट डिजाइन किया गया है। भारतीय पुरुष टीम इस साल बेल्जियम और नीदरलैंड्स में होने वाले FIH वर्ल्ड कप में हिस्सा लेगी। टूर्नामेंट 15 से 30 अगस्त 2026 तक आयोजित होना है।

नई जर्सी में पारंपरिक नीले रंग के बजाय केसरिया रंग को प्रमुखता मिलने के बाद हॉकी प्रशंसकों के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने नए डिजाइन का स्वागत किया, जबकि कई प्रशंसकों ने टीम की पारंपरिक नीली पहचान को बनाए रखने की बात कही।

प्रियंका गांधी बोलीं- देश की आत्मा नहीं बदली जा सकती

संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने जर्सी के रंग को लेकर कहा कि चाहे यूनिफॉर्म बदली जाए या शिक्षा नीति के जरिए इतिहास को बदलने की कोशिश की जाए, देश की मूल भावना को बदला नहीं जा सकता।

उन्होंने भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई, महात्मा गांधी और अहिंसा-सत्य के मूल्यों का जिक्र करते हुए कहा कि देश की आत्मा भाईचारे, एकता और आपसी प्रेम में बसती है। उनके बयान ने जर्सी विवाद को सीधे राजनीतिक बहस से जोड़ दिया।

पूर्व कप्तान वीरेंन रास्क्विन्हा ने भी उठाया सवाल

नई जर्सी को लेकर भारत के पूर्व हॉकी कप्तान और ओलंपियन वीरेंन रास्क्विन्हा ने भी सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान लंबे समय से नीले रंग के साथ जुड़ी रही है और उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान नीली जर्सी गर्व से पहनी।

रास्क्विन्हा ने जर्सी के केसरिया रंग को लेकर हॉकी इंडिया से इसके पीछे का तर्क पूछा। उनके मुताबिक भारतीय टीम और उसके प्रशंसकों की पहचान पारंपरिक रूप से नीले रंग से जुड़ी रही है।

हॉकी इंडिया ने रंग बदलने की वजह भी बताई

विवाद के बीच हॉकी इंडिया की ओर से जर्सी के रंग में बदलाव को लेकर स्पष्टीकरण भी सामने आया है। संगठन के मुताबिक यह फैसला केवल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि तकनीकी जरूरतों और खिलाड़ियों-कोचिंग स्टाफ से मिले फीडबैक को ध्यान में रखकर लिया गया।

हॉकी इंडिया ने बताया कि पिछले कुछ मौकों पर भी भारतीय टीम के किट के रंग में बदलाव किया गया है। उदाहरण के तौर पर 2014 हॉकी वर्ल्ड कप में पीले रंग की जर्सी और 2018 वर्ल्ड कप में स्काई ब्लू रंग की अलग डिजाइन इस्तेमाल की गई थी।

संगठन के अनुसार मौजूदा बदलाव के पीछे एक अहम तकनीकी कारण यह है कि पारंपरिक नीली जर्सी कई बार नीले सिंथेटिक खेल मैदान के साथ दृश्य रूप से मिल जाती है। ऐसे में खिलाड़ियों को मैदान पर स्पष्ट रूप से अलग दिखाने के लिए रंग बदलने पर विचार किया गया।

हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि केसरिया रंग का चयन तकनीकी फीडबैक के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में मौजूद रंग के प्रतीकात्मक महत्व को ध्यान में रखकर किया गया है।

वर्ल्ड कप में बड़ी चुनौती के लिए तैयार टीम

जर्सी विवाद के बीच भारतीय टीम का पूरा ध्यान अब वर्ल्ड कप पर है। FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया, नीदरलैंड्स, जर्मनी, इंग्लैंड, बेल्जियम, अर्जेंटीना, पाकिस्तान, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड, जापान, फ्रांस और वेल्स जैसी टीमें हिस्सा लेंगी।

हॉकी इंडिया के मुताबिक भारतीय पुरुष टीम की 20 सदस्यीय टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ कई युवा खिलाड़ी भी शामिल हैं। टीम की कमान हरमनप्रीत सिंह के हाथों में है। युवा खिलाड़ियों में मोहिथ एचएस, यशदीप सिवाच, राजिंदर सिंह और आदित्य अर्जुन लालगे जैसे नाम शामिल हैं।

विवाद का केंद्र जर्सी, लेकिन नजरें पदक पर

नई जर्सी के रंग को लेकर राजनीतिक और खेल जगत में बहस जरूर शुरू हो गई है, लेकिन भारतीय टीम के लिए असली चुनौती मैदान पर प्रदर्शन की होगी। भारत लंबे समय से हॉकी की मजबूत परंपरा वाला देश रहा है और आगामी वर्ल्ड कप में टीम की नजर बेहतर प्रदर्शन पर होगी।

ऐसे में फिलहाल सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भारतीय हॉकी टीम नीले या केसरिया रंग में मैदान पर उतरेगी, बल्कि यह भी है कि नई जर्सी टीम के लिए कितनी भाग्यशाली साबित होती है। वर्ल्ड कप शुरू होने के बाद इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा जवाब भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन ही देगा।

एक नजर में पूरा विवाद
27 जुलाई: हॉकी इंडिया ने नई पुरुष और महिला टीम जर्सी पेश की।
नई पहचान: जर्सी में केसरिया रंग को प्रमुखता दी गई।
विवाद: पारंपरिक नीले रंग को हटाने पर सवाल उठे।
प्रियंका गांधी: बदलाव को देश की पहचान और इतिहास से जुड़े मुद्दे से जोड़ा।
वीरेंन रास्क्विन्हा: भारतीय हॉकी की नीली पहचान का हवाला देते हुए सवाल उठाया।
हॉकी इंडिया का पक्ष: रंग बदलने के पीछे खिलाड़ियों-कोचों की सलाह और मैदान पर बेहतर विजिबिलिटी जैसे तकनीकी कारण बताए।
वर्ल्ड कप: 15 से 30 अगस्त 2026 तक बेल्जियम और नीदरलैंड्स में।