RBI MPC Meeting: रेपो रेट पर फैसला 5 अगस्त को, विशेषज्ञों को ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद कम; महंगाई और ग्रोथ पर रहेगी नजर

RBI MPC Meeting: रेपो रेट पर फैसला 5 अगस्त को, विशेषज्ञों को ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद कम; महंगाई और ग्रोथ पर रहेगी नजर

 भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee-MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार 3 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है। इस बैठक में देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार RBI रेपो रेट में बदलाव नहीं कर सकता है और मौजूदा दर को बरकरार रख सकता है।

RBI MPC बैठक के फैसलों का ऐलान 5 अगस्त 2026 को किया जाएगा। इसमें केंद्रीय बैंक महंगाई के रुख, आर्थिक विकास, वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और तरलता (Liquidity) की स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगा।

रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रहने की संभावना

RBI ने इससे पहले जून 2026 में हुई मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था।

उस बैठक में केंद्रीय बैंक ने जहां ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, वहीं भविष्य की महंगाई को लेकर अनुमान में बदलाव किया गया था। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था।

वर्तमान वित्त वर्ष में RBI की कुल छह MPC बैठकें होनी हैं। अप्रैल में पहली बैठक के बाद अगस्त की बैठक इस साल की तीसरी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक है।

महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों पर RBI की नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल ब्याज दरों में जल्दबाजी में कोई बदलाव नहीं करना चाहेगा।

केंद्रीय बैंक के सामने कई चुनौतियां हैं—

घरेलू महंगाई का दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
वैश्विक बाजार की अनिश्चितता
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
आर्थिक विकास की गति

इन सभी पहलुओं को देखते हुए RBI संतुलित फैसला लेने की कोशिश करेगा।

दिसंबर में बढ़ सकती हैं ब्याज दरें: विशेषज्ञ

इक्विरस सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड मौलिक पटेल के अनुसार, अगस्त की बैठक में रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम है।

उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण थोक एवं खुदरा महंगाई पर दबाव बना रह सकता है।

उन्होंने अनुमान जताया कि पूरे वित्त वर्ष के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई करीब 4.9 प्रतिशत रह सकती है।

पटेल के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सख्त मौद्रिक नीतियों को देखते हुए RBI भविष्य के फैसलों में सावधानी बरतेगा। उन्होंने संभावना जताई कि दिसंबर की समीक्षा बैठक में केंद्रीय बैंक 25 बेसिस पॉइंट (0.25 प्रतिशत) की बढ़ोतरी कर सकता है।

रेपो रेट क्या होती है और इसका असर कैसे पड़ता है?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI देश के बैंकों को अल्प अवधि के लिए कर्ज देता है।

जब महंगाई ज्यादा बढ़ती है तो RBI रेपो रेट बढ़ाकर बाजार में पैसों की उपलब्धता कम करने की कोशिश करता है।

रेपो रेट बढ़ने पर—

बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना महंगा हो जाता है।
बैंक ग्राहकों के लिए होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।
बाजार में पैसों का प्रवाह कम होता है।
मांग घटने से महंगाई नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
रेपो रेट घटाने से क्या होता है?

जब अर्थव्यवस्था धीमी होती है और विकास को बढ़ावा देने की जरूरत होती है, तब RBI रेपो रेट कम कर सकता है।

रेपो रेट कम होने पर—

बैंकों को RBI से सस्ता कर्ज मिलता है।
बैंक ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध करा सकते हैं।
लोगों की खरीदारी और निवेश बढ़ सकता है।
आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
होम लोन और EMI पर पड़ेगा असर

RBI के फैसले का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। अगर रेपो रेट में बदलाव होता है तो बैंक होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं।

हालांकि, अगर RBI इस बार रेपो रेट को स्थिर रखता है तो मौजूदा कर्ज लेने वालों की EMI में तुरंत कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।

RBI के सामने संतुलन बनाने की चुनौती

RBI के लिए सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को नियंत्रित रखने के साथ-साथ आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखना है।

अगर ब्याज दरें ज्यादा बढ़ाई जाती हैं तो कर्ज महंगा हो सकता है और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। वहीं, दरें कम रखने से बाजार में पैसे की उपलब्धता बढ़ सकती है, लेकिन महंगाई का दबाव बढ़ने का खतरा रहता है।

अब सभी की नजरें 5 अगस्त को आने वाले RBI MPC के फैसले पर टिकी हैं, जिससे ब्याज दरों और आर्थिक नीति की आगे की दिशा साफ होगी।