PoK में विरोध-प्रदर्शनों की खबरों पर पाकिस्तान ने बढ़ाई डिजिटल पाबंदी, कई न्यूज वेबसाइट्स और यूट्यूब चैनल ब्लॉक होने का दावा

PoK में विरोध-प्रदर्शनों की खबरों पर पाकिस्तान ने बढ़ाई डिजिटल पाबंदी, कई न्यूज वेबसाइट्स और यूट्यूब चैनल ब्लॉक होने का दावा

 पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में जारी राजनीतिक असंतोष और विरोध-प्रदर्शनों की खबरों को लेकर पाकिस्तान में डिजिटल सेंसरशिप बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने उन कई न्यूज वेबसाइट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाई है, जो PoK में चल रहे प्रदर्शनों, स्थानीय असंतोष और कथित सुरक्षा कार्रवाई से जुड़ी खबरें प्रकाशित कर रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में कई स्थानीय और क्षेत्रीय न्यूज वेबसाइट्स की पहुंच सीमित कर दी गई है। इसके अलावा कुछ अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच भी कुछ क्षेत्रों में प्रभावित होने की बात सामने आई है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इन प्रतिबंधों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

PoK में अशांति की खबरों के बीच उठाया गया कदम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। इन प्रदर्शनों से जुड़ी खबरों की व्यापक कवरेज के बाद कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की गई।

जिन वेबसाइट्स और चैनलों पर रोक की बात कही जा रही है, उनमें वे प्लेटफॉर्म शामिल हैं जो स्थानीय प्रदर्शन, लोगों की नाराजगी और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्टिंग कर रहे थे।

डिजिटल अधिकारों से जुड़े संगठनों ने इस तरह की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

विपक्ष और सरकार विरोधी आवाजों पर भी नजर

रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि प्रतिबंधों का असर पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं और सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी पड़ा है।

24 जून के एक अदालत आदेश के बाद पाकिस्तान में कुछ ऐसे चैनलों और सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई, जो विपक्षी दलों, जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और सरकार विरोधी आवाजों से जुड़े हुए हैं।

हालांकि, इन प्रतिबंधों को लेकर पाकिस्तान सरकार या संबंधित संस्थानों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

कई यूट्यूब चैनल भी निशाने पर

इससे पहले जुलाई में भी पाकिस्तान में कई यूट्यूब चैनलों पर कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) की रिपोर्ट के आधार पर इस्लामाबाद की एक न्यायिक अदालत ने कुछ यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक करने के निर्देश दिए थे।

कुछ डिजिटल अधिकार समूहों ने आशंका जताई कि लगातार बढ़ती ऑनलाइन पाबंदियों से पाकिस्तान में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्र बहस का दायरा सीमित हो सकता है।

डिजिटल अधिकार संगठनों ने जताई चिंता

डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान में पहले से ही मीडिया संस्थानों और पत्रकारों पर दबाव की शिकायतें आती रही हैं। ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने से लोगों तक सूचनाओं की पहुंच प्रभावित हो सकती है।

उनका कहना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म आम लोगों के लिए अपनी बात रखने और घटनाओं की जानकारी साझा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं।

PoK में चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी विवाद

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी हाल के दिनों में विवाद सामने आए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव के दूसरे चरण के दौरान कई क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम और लॉजिस्टिकल समस्याएं देखने को मिलीं। इसके कारण कुछ मतदान केंद्रों तक पहुंचने में दिक्कतें आईं और मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई।

दूसरे चरण में 21 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ, जिनमें PoK के मुजफ्फराबाद डिवीजन के नौ क्षेत्र और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे।

पाकिस्तान में बढ़ रही डिजिटल निगरानी

पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से ऑनलाइन कंटेंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निगरानी बढ़ी है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए कई बार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई कर चुकी हैं।

वहीं, आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पाबंदियां मीडिया स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी को प्रभावित कर सकती हैं।

निष्कर्ष:
PoK में विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों के बीच पाकिस्तान में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती पाबंदियों ने एक बार फिर मीडिया स्वतंत्रता और ऑनलाइन सेंसरशिप को लेकर बहस तेज कर दी है। हालांकि, वेबसाइट्स और चैनलों को ब्लॉक करने की खबरों पर पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।