खंडवा में किशोर कुमार को याद कर रहा देश, 97वीं जयंती पर गूंजे सदाबहार गीत; जानिए 'आभास' से 'किशोर दा' बनने की कहानी

खंडवा में किशोर कुमार को याद कर रहा देश, 97वीं जयंती पर गूंजे सदाबहार गीत; जानिए 'आभास' से 'किशोर दा' बनने की कहानी

मध्य प्रदेश का खंडवा शहर मंगलवार को एक बार फिर अपने सबसे चहेते सितारे की यादों में डूबा नजर आया। भारतीय सिनेमा के महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार की 97वीं जयंती पर उनकी जन्मभूमि में उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया गया। उनके चाहने वालों ने उनके गीतों को याद कर सुरों के इस महान कलाकार को अपनी श्रद्धांजलि दी।

किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को खंडवा में हुआ था। उनका असली नाम आभास कुमार गांगुली था। संगीत और कला की दुनिया में कदम रखने के बाद यही आभास अपनी मेहनत, अलग अंदाज और बेहतरीन आवाज के दम पर दुनिया के लिए किशोर कुमार बन गए।

किशोर दा की पहचान सिर्फ एक गायक के रूप में नहीं रही, बल्कि उन्होंने अभिनय, संगीत निर्देशन और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। शुरुआती दौर में उन्होंने फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आवाज ने उन्हें भारतीय संगीत का ऐसा सितारा बना दिया, जिसकी चमक आज भी कायम है।

उनकी गायकी की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह हर तरह के भाव को अपनी आवाज में उतार देते थे। खुशी, प्यार, दर्द और जिंदगी के अलग-अलग रंगों को उन्होंने अपने गीतों के जरिए लोगों तक पहुंचाया। यही वजह है कि कई दशक बीत जाने के बाद भी उनके गाने आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं।

'जिंदगी एक सफर है सुहाना', 'ये शाम मस्तानी', 'मेरे सपनों की रानी' और 'रूप तेरा मस्ताना' जैसे गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच खास जगह रखते हैं। उनकी आवाज में एक अलग तरह की मिठास और अपनापन था, जिसने उन्हें हर पीढ़ी का पसंदीदा बना दिया।

खंडवा में किशोर कुमार की जयंती सिर्फ एक जन्मदिन का आयोजन नहीं, बल्कि उस कलाकार को याद करने का अवसर है, जिसने अपनी आवाज से भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयां दीं। उनकी जन्मस्थली पर हर साल प्रशंसक जुटते हैं और उनके अमर गीतों के जरिए उन्हें याद करते हैं।

किशोर कुमार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और उनके गीत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। खंडवा से शुरू हुआ आभास कुमार गांगुली का सफर भारतीय संगीत इतिहास के सबसे यादगार अध्यायों में शामिल हो चुका है।