Shahdol: रसपुर ग्राम पंचायत में रेत खनन से जल संकट, किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

शहडोल जिले की रसपुर ग्राम पंचायत में रेत खनन से जलस्तर गिरावट और कृषि भूमि बंजर होने की समस्या ने किसानों को चिंतित किया है। जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र पटेल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने ब्यौहारी एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि अनियंत्रित खनन भूजल पुनर्भरण और नदी तटों को नुकसान पहुंचा रहा है।

Shahdol: रसपुर ग्राम पंचायत में रेत खनन से जल संकट, किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

शहडोल, 23 अप्रैल 2025: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले की रसपुर ग्राम पंचायत में अवैध रेत खनन के कारण जलस्तर में लगातार हो रही गिरावट ने स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस मुद्दे को लेकर जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र पटेल के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों और किसानों ने ब्यौहारी के उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें रेत खनन पर तत्काल रोक लगाने और जल संकट के समाधान की मांग की गई।

जलस्तर गिरावट से बंजर हो रही कृषि भूमि

ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि अनियंत्रित रेत खनन के कारण न केवल गांव के कुएं और तालाब सूख रहे हैं, बल्कि खेती के लिए आवश्यक भूजल स्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है। स्थानीय किसान रामकृष्ण यादव ने कहा, "हमारी खेती पूरी तरह से जल स्रोतों पर निर्भर है। रेत खनन ने हमारे तालाबों और कुओं को बर्बाद कर दिया है। अगर यही हाल रहा, तो हमारी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।"
 
ग्राम पंचायत की सरपंच राधा बाई ने बताया कि रेत खनन की गतिविधियों ने गांव की जलापूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। "हमारे तालाबों में पानी की भारी कमी हो गई है, जिससे पशुओं और घरेलू उपयोग के लिए भी पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है। हमने प्रशासन से इस समस्या को गंभीरता से लेने की गुहार लगाई है," उन्होंने कहा।

रेत खनन: विकास या विनाश?

हालांकि, रेत खनन के कुछ समर्थक इसे क्षेत्र के आर्थिक विकास का आधार मानते हैं। एक स्थानीय ठेकेदार, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बात की, ने कहा, "रेत खनन से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलता है। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देता है। लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि खनन पर्यावरण के अनुकूल हो।" 

वहीं, पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अनियंत्रित रेत खनन न केवल जलस्तर को प्रभावित करता है, बल्कि नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया को भी बाधित करता है। विशेषज्ञ डॉ. अजय मिश्रा के अनुसार, "रेत खनन से नदी तटों का कटाव बढ़ता है, जिससे आसपास की कृषि भूमि बंजर हो जाती है। इसके लिए सख्त नियम और निगरानी जरूरी है।" 

पहले भी उठ चुकी है आवाज

यह पहली बार नहीं है जब शहडोल जिले में रेत खनन को लेकर विवाद सामने आया है। नवंबर 2024 में बुढार थाना क्षेत्र में रेत खनन को लेकर ग्रामीणों और ठेका कंपनी के बीच तनाव की खबरें सामने आई थीं, जहां ग्रामीणों ने ठेकेदारों पर धमकाने का आरोप लगाया था। इसके बावजूद, प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

ज्ञापन सौंपने के दौरान सैकड़ों ग्रामीण और किसान उपस्थित थे, जिन्होंने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की। ब्यौहारी एसडीएम ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी और उचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, स्थानीय प्रशासन इस मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।