उत्तराखंड के जंगलों में धधकी आग, उत्तरकाशी की बाड़ाहाट और मुखेम रेंज में बढ़ा खतरा

उत्तराखंड के जंगलों में धधकी आग, उत्तरकाशी की बाड़ाहाट और मुखेम रेंज में बढ़ा खतरा

Uttarakhand के Uttarkashi जिले में वनाग्नि की घटनाएं लगातार भयावह रूप लेती जा रही हैं। भीषण गर्मी और शीतकालीन वर्षा में कमी के कारण जंगलों में आग तेजी से फैल रही है। ताजा घटनाओं में बाड़ाहाट और मुखेम रेंज के कई वन क्षेत्रों में आग भड़क उठी, जिससे वन संपदा के साथ-साथ आसपास के गांवों और सड़कों पर भी खतरा मंडराने लगा है।

डुंडा रेंज से शुरू हुई आग ने बढ़ाई चिंता

शनिवार को डुंडा रेंज के बड़ेथी और खरवां गांवों से लगे जंगलों में अचानक आग लग गई। तेज हवाओं और सूखी वनस्पतियों के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। अगले ही दिन यह आग बाड़ाहाट रेंज क्षेत्र तक पहुंच गई, जिससे वन विभाग की मुश्किलें और बढ़ गईं।

स्थानीय लोगों के अनुसार आग इतनी तेज थी कि दूर-दूर तक धुएं का गुबार दिखाई दे रहा था। कई इलाकों में लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानी हुई और वन्य जीवों के लिए भी खतरा बढ़ गया।

पोखरी गांव के जंगलों तक पहुंची लपटें

दोपहर बाद मनेरा बाईपास रोड से लगे पोखरी गांव के जंगलों में भी आग फैल गई। आग की लपटें सड़क के काफी करीब पहुंचने से वाहनों की आवाजाही पर भी असर पड़ा। कई वाहन चालकों को सावधानी बरतते हुए रास्ता पार करना पड़ा।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जंगलों के आसपास सतर्क रहने की अपील की है। धुएं के कारण कई जगहों पर दृश्यता भी प्रभावित हुई।

पहले भी भड़क चुकी है भीषण आग

चार दिन पहले गुरुवार को बाड़ाहाट रेंज के बसुंगा, मैणागाड और गोफियारा क्षेत्र में भी आग लगने की बड़ी घटना सामने आई थी। उस समय स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि आग पर काबू पाने के लिए कई एजेंसियों को एक साथ मैदान में उतरना पड़ा।

वन विभाग के साथ-साथ फायर सर्विस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और क्यूआरटी की संयुक्त टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद आग को नियंत्रित किया। हालांकि सूखे मौसम के कारण आग दोबारा भड़कने का खतरा लगातार बना हुआ है।

शीतकालीन वर्षा की कमी बनी बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार शीतकालीन वर्षा सामान्य से काफी कम हुई, जिसकी वजह से जंगलों में नमी नहीं बन पाई। सूखी घास, पत्तियां और पेड़ आग फैलने का सबसे बड़ा कारण बन रहे हैं।

अप्रैल के अंतिम सप्ताह में हुई हल्की बारिश से कुछ दिनों के लिए राहत जरूर मिली थी, लेकिन मई में तापमान बढ़ने के साथ हालात फिर खराब होने लगे। लगातार बढ़ती गर्मी और तेज हवाएं वनाग्नि को और खतरनाक बना रही हैं।

वन संपदा और वन्य जीवों पर संकट

लगातार फैल रही आग से जंगलों की जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंच रहा है। पेड़-पौधों के साथ छोटे वन्य जीव और पक्षी भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। कई इलाकों में जानवर सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो इसका असर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में जंगलों की आग मिट्टी की उर्वरता और जल स्रोतों को भी प्रभावित करती है।

प्रशासन और राहत टीम अलर्ट पर

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं। कई जगहों पर फायर लाइन बनाने और आग को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशासन ने स्थानीय लोगों से जंगलों में आग लगाने जैसी गतिविधियों से बचने की अपील की है। साथ ही यदि कहीं धुआं या आग दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचना देने के निर्देश जारी किए गए हैं।

आने वाले दिनों में बढ़ सकती है चुनौती

मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक उत्तरकाशी और आसपास के क्षेत्रों में तापमान ऊंचा बना रह सकता है। यदि बारिश नहीं हुई तो वनाग्नि की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में प्रशासन, वन विभाग और आपदा राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जंगलों को सुरक्षित रखने और आग को आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने से रोकने की होगी।