मंदिर में VIP दर्शन पर सवाल भगवान के सामने सब बराबर हैं, मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मंदिरों में VIP और विशेष दर्शन व्यवस्था को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने सख्त मौखिक टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जब भगवान के सामने सभी श्रद्धालु समान हैं, तो फिर VIP दर्शन जैसी व्यवस्था की जरूरत क्यों है।
भगवान किसी का इंतजार नहीं करते
सुनवाई के दौरान जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मंत्रियों और विधायकों को यह नहीं समझना चाहिए कि वे किसी भी समय मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं और भगवान उनका इंतजार कर रहे हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि VIP दर्शन से आम श्रद्धालुओं को लंबे समय तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है, जो समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
याचिका में क्या मांग की गई
यह याचिका विश्व हिंदू परिषद (VHP) की उत्तर तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष पी. चोक्कलिंगम द्वारा दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि VIP दर्शन और विशेष दर्शन व्यवस्था को समाप्त किया जाए।
हालांकि याचिका में कुछ वर्गों को छूट देने की बात भी कही गई है, जैसे वरिष्ठ नागरिक दिव्यांगजन गर्भवती महिलाएं नवविवाहित जोड़े मंदिर से जुड़े कलाकार और संवैधानिक पदाधिकारी
सरकार ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि मंदिर के संचालन समय में कोई बदलाव नहीं किया गया था और पहले दिए गए आरोपों पर रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई है।
अगली सुनवाई 6 हफ्ते बाद
हाईकोर्ट ने सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई लगभग 6 हफ्ते बाद निर्धारित की है।
धार्मिक समानता पर बहस फिर तेज
इस मामले ने एक बार फिर मंदिरों में VIP दर्शन की परंपरा और धार्मिक समानता के मुद्दे पर बहस को तेज कर दिया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सनातन धर्म में सभी मनुष्यों को समान माना गया है, इसलिए किसी तरह का भेदभाव उचित नहीं है।
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