'स्याही से नहीं जागा सिस्टम, अब खून से जगाऊंगी पचमढ़ी बचाने की मुहिम में पर्यावरणविद् डॉ. राखी बाला का बड़ा ऐलान

'स्याही से नहीं जागा सिस्टम, अब खून से जगाऊंगी पचमढ़ी बचाने की मुहिम में पर्यावरणविद् डॉ. राखी बाला का बड़ा ऐलान

मध्य प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन और 'सतपुड़ा की रानी' के नाम से प्रसिद्ध पचमढ़ी को पर्यावरणीय संकट से बचाने की लड़ाई अब नए चरण में पहुंच गई है। पर्यावरण संरक्षण के लिए लंबे समय से सक्रिय पर्यावरणविद् डॉ. राखी बाला ने प्रशासन की कथित निष्क्रियता के खिलाफ अनोखे विरोध का ऐलान करते हुए कहा है कि "जब स्याही से लिखे पत्रों ने सिस्टम को नहीं जगाया, तो अब अपने खून से पत्र लिखकर जगाऊंगी।"

उनके इस बयान ने पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। डॉ. राखी बाला का कहना है कि पचमढ़ी में लगातार बढ़ते अवैध निर्माण, जल स्रोतों पर बढ़ते दबाव और जंगलों के क्षरण को रोकने के लिए कई बार प्रशासन को ज्ञापन दिए गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

पचमढ़ी के अस्तित्व को बचाने की मुहिम

डॉ. राखी बाला का कहना है कि पचमढ़ी केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि मध्य भारत की जैव विविधता और प्राकृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां के जंगल, झरने, जल स्रोत और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इस प्राकृतिक धरोहर से वंचित हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कर होने वाले निर्माण भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

रक्त से पत्र लिखने की घोषणा

प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से नाराज डॉ. राखी बाला ने घोषणा की है कि वह जल्द ही जिला कलेक्टर को अपने रक्त से पत्र लिखकर पर्यावरण संरक्षण की मांग करेंगी। उनका कहना है कि यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक होगा, जिसका उद्देश्य केवल प्रशासन और सरकार का ध्यान पचमढ़ी के संरक्षण की ओर आकर्षित करना है।

जंतर-मंतर तक ले जाएंगी आंदोलन

डॉ. राखी बाला ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वह इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाएंगी और नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगी। उनका कहना है कि पचमढ़ी केवल मध्य प्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे देश की प्राकृतिक विरासत है और इसे बचाना सभी की जिम्मेदारी है।

पर्यावरण संरक्षण पर फिर शुरू हुई बहस

डॉ. राखी बाला के इस ऐलान के बाद पर्यावरण संरक्षण और अवैध निर्माणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पचमढ़ी की प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए सख्त नियमों का पालन और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है कि वह इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और पचमढ़ी के संरक्षण के लिए क्या नई पहल की जाती है।